यूपी का 11वां रामसर साइट्स बना एटा का पटना पक्षी अभयारण्य

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एटा का ‘पटना पक्षी अभयारण्य’ रामसर साइट्स घोषित, पीएम मोदी-सीएम योगी ने दी बधाई

(24×7न्यूजटाइम संवाददाता)
लखनऊ। विश्व वेटलैंड्स दिवस (02 फरवरी) से पहले उत्तर प्रदेश को बड़ा उपहार मिला। केंद्र सरकार ने उत्तर प्रदेश के पटना पक्षी अभयारण्य (एटा) को रामसर साइट्स में शामिल किया है। उल्लेखनीय है कि यूपी में पहले 10 रामसर साइट्स थीं, लेकिन पटना पक्षी अभयारण्य का नाम जुड़ने के साथ ही यह संख्या 11 हो गई है। उत्तर प्रदेश की इस बड़ी उपलब्धि पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बधाई दी है। देश में सर्वाधिक रामसर साइट्स तमिलनाडु में हैं, जबकि दूसरे स्थान पर उत्तर प्रदेश है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में एटा का पटना पक्षी विहार अब विश्व मानचित्र में शामिल हो चुका है। यहां संकटग्रस्त प्रजातियों को संरक्षण मिलता है। वर्ष 2017 के पश्चात अनवरत हो रहे कार्यों की बदौलत न सिर्फ प्रदेश की जैव विविधता, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों को मजबूती मिली है। पटना पक्षी विहार 108.86 हेक्टेयर क्षेत्रफल में फैला है। इसकी संरक्षण क्षमता एक लाख से अधिक जल-पक्षियों की है। सर्दियों में यहां बड़ी संख्या में प्रवासी पक्षियों का भी आगमन होता है। 1990 में इस क्षेत्र को अभयारण्य घोषित किया था। इसका नाम एटा जनपद की जलेसर तहसील के पटना गांव के नाम पर रखा गया था। यह कुल 178 प्रजातियों के पक्षियों का आश्रय स्थल है। यहां जलीय पौधों समेत वनस्पतियों की 252 प्रजातियां पाई जाती हैं।
यह स्थल नियमित रूप से 44 से अधिक जल-पक्षी प्रजातियों और चार आर्द्र‌भूमि पक्षी प्रजातियों सरकिडियोर्निस मेलानोटस, अनहिंगा मेलानोगास्टर, मारेका स्ट्रेपेरा और एंसर एंसर की जैव-भौगोलिक आबादी के 1 प्रतिशत से अधिक का संरक्षण करता है। गर्मियों में जब आसपास की अधिकांश आर्द्रभूमि पूरी तरह से सूख जाती है तो पटना झील सारस क्रेन (ग्रस एंटीगोन) की शरणस्थली बन जाती है। यह अभयारण्य नीलगाय (बोसेलाफस ट्रैगोकैमेलस), जैकाल (कैनिस ऑरियस), मॉनिटर छिपकली (वरानस बेंगालेंसिसी), जंगली बिल्ली (फेलिस चाउस), पॉर्क्यूपाइन (हिस्ट्रिक्स इंडिका) आदि जानवरों का भी घर है। यहां वनस्पतियों की कई देशी प्रजातियां पाई जाती हैं। पटना पक्षी विहार के अंदर स्थित भगवान शिव का प्राचीन मंदिर आस्था और तीर्थयात्रा का महत्वपूर्ण केंद्र है।
उत्तर प्रदेश में अब तक 10 वेटलैंड थे। इनके नाम नवाबगंज पक्षी अभयारण्य (उन्नाव), पार्वती अरगा (गोंडा), समान (मैनपुरी), समसपुर (रायबरेली), सरसई नावर झील (इटावा), सांडी (हरदोई), सूर सरोवर (आगरा), बखीरा (संतकबीर नगर), ऊपरी गंगा नदी (बृजघाट से नरोरा तक, बुलंदशहर) व हैदरपुर वेटलैंड (मुजफ्फरनगर) हैं।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस उपलब्धि पर अपने सोशल मीडिया अकाउंट ‘एक्स’ पर पोस्ट कर शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री ने लिखा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में पर्यावरण संरक्षण के प्रति भारत की प्रतिबद्धता निरंतर वैश्विक मान्यता प्राप्त कर रही है। उत्तर प्रदेश के एटा स्थित पटना पक्षी अभयारण्य तथा गुजरात के कच्छ स्थित छारी-ढांड को रामसर स्थलों के रूप में शामिल किया जाना नीति, संरक्षण और संवर्धन की उस यात्रा को दर्शाता है, जहां पारिस्थितिकी और विकास एक साथ आगे बढ़ते हैं। यह अंतरराष्ट्रीय सम्मान सतत संरक्षण, पारिस्थितिक संतुलन और जैव विविधता की रक्षा के प्रति भारत के संकल्प को रेखांकित करता है। एटा, उत्तर प्रदेश के लोगों तथा आर्द्रभूमि संरक्षण के लिए समर्पित सभी हितधारकों को हार्दिक बधाई।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस उपलब्धि पर अपने सोशल मीडिया अकाउंट ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए लिखा कि एटा (उत्तर प्रदेश) स्थित पटना पक्षी अभयारण्य तथा कच्छ (गुजरात) स्थित छारी-ढांड के रामसर स्थल घोषित होने पर अत्यंत प्रसन्नता है। वहां की स्थानीय जनता तथा आर्द्रभूमि संरक्षण के प्रति समर्पित सभी लोगों को हार्दिक बधाई। ये मान्यताएं जैव विविधता के संरक्षण और महत्वपूर्ण पारिस्थितिक तंत्रों की रक्षा के प्रति हमारी प्रतिबद्धता की पुनः पुष्टि करती हैं। ये आर्द्रभूमियां असंख्य प्रवासी व स्थानीय प्रजातियों के लिए सुरक्षित आवास के रूप में निरंतर फलती-फूलती रहें, यही कामना है।

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