सुप्रीम कोर्ट ने 17 साल से जेल में बंद अरुण गवली की जमानत मंजूर की

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(24×7न्यूजटाइम संवाददाता)
नई दिल्ली।उच्चतम न्यायालय ने 2007 में मुंबई के शिवसेना पार्षद कमलाकर जामसांडेकर की हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे अरूण गवनी की जमानत गुरुवार को मंजूर कर ली। न्यायमूर्ति एम. एम. सुंदरेश और न्यायमूर्ति एन. कोटिश्वर सिंह की पीठ ने कहा कि गवली ने 17 साल और तीन महीने से ज्यादा जेल में बिताए हैं, जबकि दोषसिद्धि के खिलाफ उसकी अपील अदालत में लंबित है। पीठ ने कहा, “निस्संदेह अपीलकर्ता 17 साल और तीन महीने से जेल में है। हम इस तथ्य पर भी ध्यान देते हैं कि वह 76 वर्ष का है।” शीर्ष न्यायालय ने निचली अदालत की ओर से लगायी गयी शर्तों के अधीन उसे जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया और मामले की अंतिम सुनवाई फरवरी 2026 में तय की। गवली ने बॉम्बे उच्च न्यायालय के नौ दिसंबर-2019 के फैसले को चुनौती दी थी, जिसमें 2012 में मुंबई सत्र न्यायालय द्वारा उसकी दोषसिद्धि और आजीवन कारावास की सजा को बरकरार रखा गया था। निचली अदालत ने उस पर 17 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया था। भायखला के दगड़ी चॉल से राजनीति में आए गवली ने अखिल भारतीय सेना की स्थापना की और 2004 से 2009 के बीच चिंचपोकली निर्वाचन क्षेत्र से विधायक रहे। उन्हें और अन्य लोगों को 2006 में गिरफ्तार किया गया और बाद में जमसांडेकर की हत्या के मामले में दोषी ठहराया गया।

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