एनआरएचएम के तहत हुयी वित्तीय अनियमितिता पर छह के खिलाफ मुकदमा

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श्रावस्ती(24×7न्यूजटाइम संवाददाता)। उत्तर प्रदेश विजिलेंस एस्टैब्लिशमेंट ने श्रावस्ती जिले में राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (एनआरएचएम) के तहत हुए वित्तीय एवं प्रशासनिक अनियमितताओं के मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए पूर्व विधायक, दो सेवानिवृत्त मुख्य चिकित्सा अधिकारियों (सीएमओ) समेत छह लोगों के खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज किया है।
विभागीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, उत्तर प्रदेश विजिलेंस एस्टैब्लिशमेंट के सिविल इन्वेस्टिगेशन (सीआई) सेक्टर, लखनऊ द्वारा की गई खुली जांच में वर्ष 2017-18 से 2021-22 के बीच एनआरएचएम के तहत दवाओं, चिकित्सा उपकरणों की खरीद, रखरखाव कार्यों तथा अन्य वित्तीय लेन-देन में गंभीर अनियमितताओं के आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए गए। जांच रिपोर्ट शासन को सौंपे जाने के बाद आरोपियों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज करने की स्वीकृति प्रदान की गई।
बताया जाता है कि विजिलेंस इंस्पेक्टर कमलेश्वर प्रसाद यादव की तहरीर पर लखनऊ स्थित विजिलेंस थाने में तत्कालीन सीएमओ डॉ. दिनेश कुमार सिंह, डॉ. विपेंद्र कुमार सिंह, वरिष्ठ सहायक कोमल प्रसाद, वरिष्ठ सहायक अनिल पांडे, पयागपुर के पूर्व विधायक मुकेश श्रीवास्तव उर्फ ज्ञानेंद्र प्रताप श्रीवास्तव तथा आरपी ग्रुप ऑफ कंस्ट्रक्शन के स्वामी राजेंद्र प्रसाद श्रीवास्तव के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज की गई है।
जांच में आरोप लगाया गया है कि स्वास्थ्य विभाग में दवाओं एवं उपकरणों की खरीद के दौरान निर्धारित निविदा प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। कई मामलों में वित्तीय नियमों की अनदेखी करते हुए भुगतान किए गए तथा सरकारी धन के उपयोग में पारदर्शिता नहीं बरती गई।
विजिलेंस जांच में यह भी सामने आया कि रखरखाव और मरम्मत संबंधी कार्यों में ठेकेदार फर्म को कथित रूप से बिना कार्य पूर्ण किए अथवा आंशिक कार्यों पर पूर्ण भुगतान कर दिया गया। इसके अतिरिक्त मुद्रण कार्यों में भी टेंडर प्रक्रिया का पालन न करने के आरोप लगाए गए हैं।
एफआईआर के अनुसार तत्कालीन सीएमओ स्तर पर प्रशासनिक नियंत्रण में शिथिलता बरती गई तथा अधीनस्थ अधिकारियों को वित्तीय मामलों में मनमानी करने की छूट दी गई। जांच एजेंसी ने दोनों सेवानिवृत्त सीएमओ की भूमिका को प्रथम दृष्टया संदिग्ध माना है।
चिकित्सा प्रतिपूर्ति से जुड़े मामलों में भी अनियमितताओं का उल्लेख किया गया है। आरोप है कि बिना आवश्यक अभिलेखों एवं रजिस्टरों के संधारण के भुगतान किए गए तथा कुछ मामलों में मानकों के विपरीत भुगतान स्वीकृत किए गए। जांच के दौरान वाउचरों की पड़ताल में कथित रूप से अवैध लेन-देन के संकेत भी मिले हैं।
विजिलेंस की इस कार्रवाई के बाद श्रावस्ती स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप की स्थिति है। मामले की विवेचना जारी है और जांच एजेंसी अब दस्तावेजी साक्ष्यों, वित्तीय अभिलेखों तथा संबंधित अधिकारियों की भूमिका की विस्तृत जांच करेगी।

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