मदर डेयरी ने पेश किया पर्यावरण अनुकूल ‘मिल्क पाउच’, मिट्टी में पड़ कर स्वत: गल-पच जाएगा

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नयी दिल्ली(24×7न्यूजटाइम संवाददाता)। दूध एवं दुग्ध उत्पादों के विकास की प्रमुख संस्था एवं राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी मदर डेयरी ने पहली बार पैकिंग के लिए एक ऐसा मिल्क पाउच प्रस्तुत किया है जो एक बार इस्तेमाल के बाद मिट्टी में मिल कर धीरे धीरे गल-पच जाएगा।
एनडीडीबी के अध्यक्ष डाॅ मीनेश शाह ने मंगलवार को यहां कहा कि पर्यावरण और पारिस्थितिकी को ध्यान में रखते मदर डेयरी ने जैविक तरीके से गल-पच कर मिट्टी बन जाने वाले विशेष डीग्रेडेबल उत्पाद से तैयार पाउच का उपयोग करने का फैसला किया है। इसे मदर डेयरी के लोकप्रिय गाय के दूध की पैकिंग में इस्तेमाल किया जाएगा और इसकी शुरुआत विश्व पर्यावरण दिवस पर पांच जून को की जाएगी। इस डिग्रेडेबल पैकेजिंग में ऐसे उत्पाद का इस्तेमाल किया गया है जो दूध की थैली को बायोअवेलेबल-वैक्स (जैविक मोम) में बदलने में सहायक बनाती है। उस बायोअवेलेबल वैसक्स को मिट्टी में मौजूद माइक्रोब्स सूक्षम टुकड़ों में विभाजित करके प्राकृतिक तत्वों में बदल देते हैं।
उन्होंने बताया कि इस पाउच की सामग्री को ऐसे डिजाइन किया गया है कि यह कुछ ही वर्षों में अपघटित हो मिट्टी में मिल जाए। उन्होंने कहा कि मदर डेयरी पोषण के माध्यम से लोगों के जीवन का समृद्ध बनाने और जिम्मेदारी एवं संवेदनशीलता के साथ पर्यावरण की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।
डॉ शाह ने यह भी बताया कि अभी दूध की पैकेजिंग में इस्तेमाल होने वाले 50 प्रतिशत पालीथिन पाउच ही रिसाइकिल के उपलब्ध हो पाते हैं। शेष 50 प्रतिशत मिल्क पाउच का समुचित निस्तारण न हो पाना चिंता का विषय रहा है और इसे ही ध्यान में रखकर जैविक तरीके से अपघटनीय दूध की थैलियों का विकसित किया गया है। दूध और दुग्ध उत्पाद पेश करने वाली कोई भी कंपनी इस विशेष प्रकार के पाउच को बनाने की सामग्री राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड की पूर्ण स्वामित्व वाली कंपनी आईडीएमसी से ले सकती है।
श्री शाह ने बताया कि इस पाउच के इस बदलाव का उपभोक्ताओं के लिए दूध की कीमतों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। इसका दूध के पाउच के स्टोरेज, हैंडलिंग या डिस्पोजल का का तरीका पहले जैसा ही रहेगा। महत्वपूर्ण बात यह है कि नयी पैकेजिंग से दूध की गुणवत्ता, शेल्फ लाइफ या स्वाद पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
मदर डेयरी के प्रबंध निदेशक जयतीर्थ चारी ने इस मौके पर कहा कि मदर डेयरी पांच दशकों से डेयरी सेक्टर में नवाचार में अग्रणी रही है। इस प्रतिबद्धता के तहत चार वर्षों में से अधिक समय तक अनुसंधान करके यह मिट्टी में मिल जाने वाला मिल्क पाउच विकसित किया गया है। यह पर्यावरण में प्लास्टिक का कोई निशान नहीं छोड़ता। इस पाउच के आ जाने से प्लास्टिक के फैलाव की समस्या को कम करने में और स्वच्छ इकोसिस्टम बनाने में मदद मिलेगी।

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