Tuesday, June 2, 2026
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तकनीकी उद्यमिता में देश का प्रतिनिधित्व करने तैयार मध्यप्रदेशः डॉ. मोहन यादव

मध्यप्रदेश में हुआ ‘एक्ज़ीक्यूशन डिकेड’ का शुभारंभ
जीआईएस-2025 ने खोले तकनीकी उद्यमिता और अवसरों के द्वार

देश की विकास यात्रा महानगरों से टियर-2 शहरों की ओर बढ़कर नए औद्योगिक और तकनीकी अध्याय लिख रही है। मध्यप्रदेश इस परिवर्तन की अगुवाई करते हुए देश के उभरते ‘टेक्नोलॉजी पावरहाउस’ के रूप में स्थापित हो रहा है। फरवरी 2025 में आयोजित ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट (GIS) के बाद राज्य को ₹2,500 करोड़ के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए। इससे रोजगार के 30 हजार से अधिक अवसर सृजित होंगे।

राज्य सरकार की रणनीतिक योजनाओं, नवाचारपरक नीतियों और त्वरित कार्यान्वयन से यह सुनिश्चित हुआ है कि प्रदेश केवल योजनाएँ बनाने तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि धरातल पर ठोस परिणाम भी दिखाई दे रहे हैं। जीसीसी (Global Capability Centers), सेमीकंडक्टर, ड्रोन, एवीजीसी-एक्सआर (एनिमेशन, विजुअल इफैक्ट्स, गेमिंग, कॉमिक्स, ऐक्सटेंडेड रियलिटी) और स्पेस-टेक जैसे फ्यूचरिस्टिक उद्यमिता क्षेत्रो में भी राज्य ने तेज़ी से अपनी पकड़ मज़बूत की है।

जीसीसी पॉलिसी से आकर्षित हो रहीं वैश्विक कंपनियां

राज्य सरकार की ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (जीसीसी) पॉलिसी 2025 के आकर्षक प्रावधानों से प्रदेश मध्यम आकार की वैश्विक कंपनियों का पसंदीदा निवेश स्थल बनता जा रहा है। भोपाल और इंदौर में पाँच प्रमुख कंपनियाँ, जिनमें डिजिटल कंसल्टेंसी, मेडिकल टेक्नोलॉजी, आईटी और फाइनेंशियल प्लानिंग से जुड़ी कंपनियाँ शामिल हैं, अपने संचालन केंद्र स्थापित कर रही हैं। प्रारंभिक चरण में ही इनसे 740 से अधिक उच्च-कौशल रोजगार सृजित होंगे। राष्ट्रीय और अन्तर्राष्ट्रीय मंचों पर निवेशकों से सार्थक संवाद के परिणामस्वरूप प्रदेश देश का अग्रर्णी ‘जीसीसी-डेस्टिनेशन’ बनकर उभर रहा है।

विशेष ड्रोन नीति से गांवों तक पहुंच रही तकनीकी क्रांति

आईआईएसईआर भोपाल में ₹85.51 करोड़ की लागत से 60 हजार वर्गफुट क्षेत्र में फैला ‘एआई-एनेबल्ड ड्रोन सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ विकसित किया जा रहा है। इसे अत्याधुनिक यूएवी लैब्स, सिमुलेशन एनवायरमेंट, स्टार्टअप इनक्यूबेशन प्रोग्राम और ‘रेडी टू सपोर्ट इंडस्ट्रीज’ के दृष्टिकोण से तैयार किया जा रहा है। तीन वर्ष में यहाँ 200 से अधिक शोधकर्ता और प्रमाणित ड्रोन विशेषज्ञ तैयार होंगे। यह केंद्र 10 पेटेंट, 30 से अधिक शोध प्रकाशन और वाणिज्यिक तकनीकों के विकास पर काम कर रहा है। प्रशिक्षण, इनक्यूबेशन और आईपी कॉमर्शियलाइजेशन के माध्यम से यह केंद्र आत्मनिर्भर बनने की दिशा में अग्रसर है।

सेमीकंडक्टर क्षेत्र में नवाचारों से विकसित हो रहा तकनीकी उद्यमिता का ईकोसिस्टम

अटल बिहारी वाजपेयी अखिल भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी एवं प्रबंधन संस्थान (एबीवी-आईआईआईटीएम) ग्वालियर में ₹14.67 करोड़ की लागत से ‘सेमीकंडक्टर साइंस एंड टेक्नोलॉजी फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ स्थापित किया जा रहा है। आने वाले पाँच वर्षों में यह केंद्र वीएलएसआई, आईओटी, ग्रीन चिप टेक्नोलॉजी और क्वांटम हार्डवेयर के क्षेत्र में अनुसंधान करेगा। इस केंद्र में प्रति वर्ष 150–200 सेमीकंडक्टर्स के विशेषज्ञ प्रोफेशनल्स तैयार किए जाएँगे। पाँचवें वर्ष तक यह केंद्र आत्मनिर्भर होकर देश का इनोवेशन हब बन जाएगा। इससे देश के सेमीकंडक्टर मिशन में नए पेटेंट, उत्पाद और स्टार्टअप्स का आधार सशक्त होगा।

इनक्यूबेशन सेंटर्स से सशक्त होगा स्टार्टअप ईकोसिस्टम

प्रदेश में स्टार्टअप ईकोसिस्टम को गति देने के लिए नए इनक्यूबेशन सेंटर स्थापित किए जा रहे हैं। राज्य सरकार के सहयोग से इंदौर में DAV इनक्यूबेशन सेंटर,प्रारंभिक चरण में स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने के लिए विकसित किया जा रहा है। आईआईटी इंदौर का DRISHTI CPS फाउंडेशन (₹4.89 करोड़) डीप-टेक स्टार्टअप्स के लिए नेशनल मिशन ऑन साइबर-फिजिकल सिस्टम्स के अंतर्गत स्थापित किया गया है। यह लगभग 100 स्टार्टअप्स को सहयोग प्रदान करेगा। वर्ष 2025 के अंत तक यह पूरी तरह तैयार होकर अपना काम प्रारंभ कर देगा। यहां फंडिंग प्रोग्राम, शेयर्ड वर्किंग स्पेस और स्टार्टअप एक्सेलेरेशन योजनाओं पर काम किया जाएगा।

टेक रियल एस्टेट और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर में बड़ी छलांग

मध्यप्रदेश में तकनीकी और डिजिटल अवसंरचना का परिदृश्य तेजी से बदल रहा है। इंदौर के ग्रोथ कॉरिडोर में एक वैश्विक आईटी सेवा कंपनी अपना बड़ा डिलीवरी हब विकसित कर रही है। भोपाल में एक राष्ट्रीय डाटा सेंटर ऑपरेटर नई क्षमता स्थापित कर रहा है। एक प्रमुख डिजिटल इंजीनियरिंग कंपनी नए आईटी पार्क में साझेदारी कर रही है। अत्याधुनिक सरफेस माउंट टेक्नोलॉजी (SMT) लाइन स्थापित की जा रही है, जिससे इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा मिलेगा। आगामी ‘ईएमसी 2.0’ योजना इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम डिजाइन और मैन्युफैक्चरिंग (ESDM) इकोसिस्टम के लिए नए क्लस्टर तैयार करेगी।

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