Tuesday, June 2, 2026
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आईएएस दीपक कुमार सक्सेना की जनसम्पर्क विभाग में होगी प्रशासनिक दक्षता और ईमानदारी की असली परख

मुख्यमंत्री मोहन यादव से मिले नवनियुक्त मध्यप्रदेश के जनसम्पर्क आयुक्त दीपक सक्सेना

(24×7न्यूजटाइम संवाददाता)
भोपाल। जबलपुर में कई बड़े घोटालों की परतें खोलले वाले, सैकड़ों कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर कर अपनी प्रशासनिक क्षमता का लोहा मनवाने वाले, प्रदेश के सबसे महत्वपूर्ण जनसम्पर्क विभाग की जिम्मेदारी संभलने वाले नवनियुक्त जनसम्पर्क आयुक्त, आईएएस अधिकारी दीपक कुमार सक्सेना ने मुख्यमंत्री मोहन यादव से शिष्टाचार भेंट की। श्री दीपक सक्सेना 2010 बैच के आईएएस अधिकारी है। कमीश्नर बनने से पहले वे जबलपुर के कलेक्टर थे। जहॉ पर अपनी प्रशासनिक क्षमता और ईमानदारी से केवल जनता को राहत ही नही दी बल्कि भ्रष्टाचार में लिप्त घोटालेबाज सैकड़ों सरकारी अधिकारियों एवं कर्मचारियों के पर सिकंजा कसते हुए लगभग डेढ़ साल के कार्यकाल में दीपक कुमार सक्सेना ने 80 से ज्यादा एफआईआर दर्ज कराई। इनमें स्कूल घोटाला, धान,घोटाला, फर्टिलाइजर घोटाला और जमीन से जुड़े विवादित घोटाले, वेयरहाउस घोटाला, धान मिलिंग एवं ट्रांसपोर्ट घोटाला प्रमुख थे। जिससे जबलपुर में हड़कम्प मच गया। हर अधिकारी कर्मचारी में कलेक्टर का खौफ दिखने लगा। जैसे ही दीपक सक्सेना का कलेक्टर के पद से हटने की खबर मिली जबलपुर के सरकारी कर्मचारियों में खुशी की लहर दौड़ गयी।


आईएएस दीपक कुमार सक्सेना ने आज विधिवत जनसम्पर्क आयुक्त एवं प्रबंध निदेशक माध्यम का पद भार ग्रहण कर लिया, उसके बाद विभागीय अधिकारियों से मुलाकात की और फिर मुख्यमंत्री आवास पर जाकर मुख्यमंत्री मोहन यादव से मिले और उनपर विश्वास प्रकट करने के लिए मुख्यमंत्री का आभार प्रकट किया।
मध्य प्रदेश के गुना जिले में 29 दिसम्बर 1967 को जन्में दीपक कुमार सक्सेना की प्राथमिक शिक्षा तो गुना में ही हुई लेकिन विद्युत विभाग में कार्यरत पिता का स्थानांतरण उज्जैन होने के कारण पूरा परिवार उज्जैन चला आया और कक्षा 6 से लेकर शेष पढ़ाई उज्जैन में हुई। गणित में रूचि के कारण श्री सक्सेना ने गणित विषय से स्नातकोत्तर (एमएससी) उर्तीण किया । उसके बाद नौकरी की तलाश, बैंक में नौकरी लग गई। लेकिन बैंक की नौकरी भाई नही और इस्तीफा देकर सिविल सेवा की तैयारी करने लगे। पहली बार में ही सिविल सेवा की परीक्षा में सफल हुए। और मध्य प्रदेश राज्य सिविल सेवा के अधिकारी बने। उसके बाद 2010 में भारतीय प्रशासनिक सेवा का कैडर अवार्ड हुआ।


श्री दीपक कुमार सक्सेना प्रदेश के विभिन्न विभागों में विभिन्न पदों पर तैनात रहे। इतना ही नही कई ऐसे कार्य किये है जिसने प्रदेश में एक मिशाल पैदा की है। उन्होंने सैकड़ों वर्षों पुराने राजस्व रिकॉर्ड को सुरक्षित और डिजिटल स्वरूप में संरक्षित करने के लिए आधुनिक एयरकंडीशन रिकॉर्ड रूम की स्थापना की। यह पहल पूरे प्रदेश में एक मॉडल बनी है।
जनसंपर्क आयुक्त का पद न सिर्फ सरकार और जनता के बीच संवाद का प्रमुख माध्यम माना जाता है, बल्कि इसे मुख्यमंत्री का सबसे भरोसेमंद पद भी माना जाता है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने प्रशासनिक सर्जरी में दीपक कुमार सक्सेना पर भरोसा जताते हुए जनसंपर्क आयुक्त बनाकर उनकी ईमानदारी और प्रशासनिक दक्षता ईनाम दिया है। लेकिन यह देखना होगा कि क्या दीपक कुमार सक्सेना मीडिया और सरकार के बीच सामंजस्य स्थापित करने के साथ- साथ जनसम्पर्क विभाग में विज्ञापन वितरण और समाचार पत्र की सूचीबद्धता में व्याप्त तथाकथित
भ्रष्टाचार और प्रेस अधिमान्यता में अनियमितताओं पर भी अंकुश लगा पायेंगे या पहले की तरह चलता रहेगा। क्योंकि जनसम्कर्प विभाग की कार्यशैली को सुधार पाना उनके लिए सबसे बड़ी चुनौती होगी। यही नही दीपक कुमार सक्सेना के जनसम्पर्क आयुक्त बनने से छोटे और मध्य समाचार पत्र और पत्रकारों में एक न्याय की उम्मीद जगी है।

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