(24×7न्यूजटाइम संवाददाता)
नई दिल्ली। भारत सरकार और अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (आईएलओ) के बीच हुए समझौता ज्ञापन (एमओयू) से देश के युवाओं को वैश्विक रोजगार में मदद मिलेगी। केंद्रीय श्रम एवं रोजगार तथा युवा मामले एवं खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने यह बात भारत सरकार और अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (आईएलओ) के बीच मंगलवार को ‘अंतरराष्ट्रीय व्यावसायिक वर्गीकरण’ को बढ़ावा देने के लिए समझौता ज्ञापन के लिए वर्चुअल रूप में शामिल होने के अवसर पर कही। इस समझौता ज्ञापन पर जेनेवा, स्विट्जरलैंड में भारत के राजदूत और स्थायी मिशन, अरिंदम बागची और आईएलओ के महानिदेशक गिल्बर्ट एफ. हौंगबो ने हस्ताक्षर किया। इस एमओयू से देश के युवाओं को वैश्विक रोजगार के अवसरों का लाभ प्राप्त करने में मदद मिलेगी।
इस अवसर पर डॉ. मांडविया ने कहा कि भारत सरकार और आईएलओ के बीच साझेदारी तीव्र परिवर्तन के दौर में काम के भविष्य को आकार देने के लिए साझा प्रतिबद्धता दर्शाती है। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय संदर्भ वर्गीकरण डेटा की तुलना को बढ़ावा देगा और कौशल की आपसी पहचान को बढ़ावा देगा। डॉ. मांडविया ने कहा कि अगले दो वर्षों में हमारा लक्ष्य औपचारिक क्षेत्र में 3.5 करोड़ से अधिक रोजगार सृजित करना है। डॉ. मंडाविया ने कहा कि इससे युवाओं के रोजगार में उल्लेखनीय वृद्धि होगी और सामाजिक सुरक्षा आंकड़ों का दायरा और विस्तृत होगा।
डॉ. मांडविया ने श्रम बाजार की दक्षता एवं श्रमिक कल्याण को बढ़ाने के लिए डिजिटल नवाचार का लाभ उठाने की भारत की प्रतिबद्धता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि यह प्रतिबद्धता हाल ही में अंतरराष्ट्रीय श्रम सम्मेलन में दिखाई दी जहां भारत ने दो प्रमुख डिजिटल सार्वजनिक वस्तुओं, राष्ट्रीय करियर सेवा (एनसीएस) पोर्टल और ई-श्रम पोर्टल को प्रस्तुत किया।
डॉ. मांडविया ने कहा कि इन डिजिटल पहलों में अन्य सदस्य देशों द्वारा पारस्परिक शिक्षा एवं अनुकूलन की अपार संभावनाएं उपलब्ध हैं।
अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन के महानिदेशक ने कहा कि इस समझौता ज्ञापन का विश्व के देशों पर दूरगामी प्रभाव पड़ेगा। उन्होंने श्रम गतिशीलता एवं सामाजिक सुरक्षा से जुड़े मामलों में भारत के अच्छे कार्यों पर प्रकाश डाला।
इस कार्यक्रम के दौरान, केंद्रीय श्रम एवं रोजगार सचिव, वंदना गुरनानी ने कहा कि यह एमओयू हरित, डिजिटल एवं स्वास्थ्य सेवा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में व्यवहार्यता अध्ययन एवं प्रायोगिक अभ्यास के लिए एक रूपरेखा प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि यह समझौता ज्ञापन भविष्य में व्यापक सहयोग के लिए अवसर प्रदान करता है जिससे वैश्विक कार्यबल को लाभ मिलेगा।
यह एमओयू देश के युवाओं के लिए वैश्विक नौकरी के अवसरों को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह समझौता भारतीय श्रमिकों को वैश्विक श्रम बाजारों में सुगमता से एकीकृत होने में मदद करेगा। यह कदम भारत के विश्व की कौशल राजधानी बनने के दृष्टिकोण को बल देता है साथ ही कार्यबल की कमी से जूझ रहे देशों के लिए प्रतिभा का एक विश्वसनीय स्रोत भी बनने में सहायता प्रदान करता है।
इस पहल में भारतीय स्नातकों की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ावा देने की क्षमता है। साथ ही इसमें देश को उच्च गुणवत्ता, भविष्य के लिए तैयार शिक्षा एवं कौशल के लिए एक अंतरराष्ट्रीय केंद्र के रूप में स्थापित करने की भी क्षमता है।





