Tuesday, June 2, 2026
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यू पी के हर जिले में दो सप्ताह में खुल जायेंगे मिशन शक्ति केन्द्र

केन्द्र की प्रभारी होगी महिला पुलिस इंस्पेक्टर, तैनात होंगे 22 पुलिसकर्मी

(24×7न्यूजटाइम संवाददाता)
लखनऊ।मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मिशन शक्ति 5 का शुभांरभ करते हुए प्रदेश के हर थाने में मिशन शक्ति केंद्र स्थापित करने के निर्देश दिये थे ताकि प्रदेश की बेटियों और महिलाओं को भयमुक्त वातावरण, गरिमामयी जीवन और आत्मनिर्भरता की दिशा में सशक्त बनाया जा सके। इसी क्रम में डीजीपी ने मिशन शक्ति केंद्र को लेकर सभी जिलों के पुलिस अधिकारियों को दिशा-निर्देश दिये, जिसमें मिशन शक्ति केंद्र को लेकर गाइडलाइन जारी की गयी है। इसके तहत महिला शिकायतकर्ताओं के प्रति संवेदनशीलता, तत्परता और प्राथमिकता सुनिश्चित करने, शिकायतों का त्वरित और गुणवत्तापूर्ण निस्तारण, समुचित काउंसिलिंग, सहयोग और संरक्षण आदि निश्चित करने के निर्देश दिये गये हैं। इतना ही नहीं सभी केंद्र, पुलिस चौकियों की तरह कार्य करेंगे और महिला अपराधों से जुड़े मामलों की विवेचना भी करेगा।

केंद्रों पर 3 से 5 वर्ष की अवधि के लिए तैनात होंगे पुलिसकर्मी
डीजीपी राजीव कृष्ण ने बताया कि मिशन शक्ति केंद्र में एक प्रभारी निरीक्षक/उपनिरीक्षक (प्राथमिकता महिला अधिकारी), 1 से 4 उपनिरीक्षक, 4 से 15 आरक्षी (जिनमें 50 प्रतिशत महिलाएं), 1 से 2 महिला होमगार्ड तथा आवश्यकता पड़ने पर परामर्शदाताओं की नियुक्ति के निर्देश दिये गये हैं। उन्होंने बताया कि सभी केंद्रों पर कर्मियों को 3 से 5 वर्ष की अवधि तक तैनात रखा जाएगा और प्रशिक्षित कर्मियों के स्थानांतरण का प्रावधान भी होगा। डीजीपी द्वारा जारी गाइडलाइन में थानों के प्रभारी निरीक्षक/थानाध्यक्ष को निर्देश दिया गया है कि मिशन शक्ति केन्द्र के लिए एक अलग कक्ष, कम्प्यूटर, अभिलेख, स्टेशनरी, महिला शौचालय और अन्य आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए जाए।

मिशन शक्ति केन्द्र की जिम्मेदारी
– महिला हेल्प डेस्क की ड्यूटी और कार्यवाही का रोस्टर तैयार कर समय पर फॉलोअप करना।
– एंटी रोमियो स्क्वॉड्स और महिला बीट योजना का नियमित क्रियान्वयन और पर्यवेक्षण करना।
– महिलाओं के खिलाफ अपराधों से संबंधित एफआईआर, विवेचनाओं और अभियुक्तों के खिलाफ निवारक कार्यवाहियों का समानांतर रिकॉर्ड रखना।
– पीड़िताओं को काउंसिलिंग, कानूनी सहायता, पुनर्वास और क्षतिपूर्ति जैसी सेवाओं के लिए वन स्टॉप सेंटर, डीएलएसए, जिला प्रोबेशन अधिकारी, समाज कल्याण अधिकारी, बाल कल्याण समिति और फैमिली कोर्ट आदि से समन्वय स्थापित करना।
– संवेदनशील मामलों में समयबद्ध चिकित्सा जांच और दबिश सुनिश्चित करना।
– पलायन संबंधी प्रकरणों और झूठे आरोपों वाले मामलों में अनिवार्य काउंसिलिंग करना।
– महिला सुरक्षा और साइबर सुरक्षा से जुड़े जागरूकता कार्यक्रम नियमित आयोजित करना।

तय की गई अधिकारियों की जिम्मेदारी
– परिक्षेत्रीय पुलिस महानिरीक्षक/उपमहानिरीक्षक रेंज Change Agent के रूप में इस व्यवस्था को लागू करेंगे और नियमित निरीक्षण करेंगे।
– नोडल अधिकारी द्वारा एक थाने के मिशन शक्ति केन्द्र से दूसरे थाने के मिशन शक्ति केन्द्र में कार्मिकों के स्थानान्तरण के लिए कमिश्नरेट/जनपद के पुलिस आयुक्त/वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक/पुलिस अधीक्षक को प्रस्ताव भेजा जायेगा, जिस पर संबंधित पुलिस आयुक्त/वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक/पुलिस अधीक्षक जनपदीय स्थापना बोर्ड की गोष्ठी में विचार करेंगे।
– उप निरीक्षक/मुख्य आरक्षी/ आरक्षी का Transfer/Induction /Deinduction बिना नोडल अधिकारी के प्रस्ताव के नहीं होगा।
– सभी मिशन शक्ति केन्द्रों की मासिक कार्ययोजनाओं और रणनीतियों को अन्तिम रूप देना एवं यह सुनिश्चित करना कि महिला सुरक्षा सम्बन्धी सभी कार्य पुलिस मुख्यालय और वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा निर्गत नवीनतम दिशा-निर्देशों के अनुरूप हों।
– सभी मिशन शक्ति केन्द्र प्रभारी के साथ मासिक समीक्षा बैठक एवं समग्र प्रदर्शन की निगरानी और मूल्यांकन करना।

यह होगी केंद्र पर तैनात प्रभारी की जिम्मेदारी
– महिला हेल्प डेस्क और मिशन शक्ति केन्द्र के लिए पर्याप्त मानव संसाधन, वित्तीय संसाधन और भौतिक बुनियादी ढांचे की उपलब्धता सुनिश्चित करना।
– विभिन्न सरकारी विभागों (जैसे समाज कल्याण, स्वास्थ्य, शिक्षा), न्यायिक अधिकारियों और अन्य संगठनों के साथ जिला स्तरीय समन्वय स्थापित करना। यह सुनिश्चित करना कि पीडि़त महिलाओं को सभी आवश्यक सहायता सेवाएं उपब्लध कराना।
– सभी मिशन शक्ति केन्द्र कर्मियों की जवाबदेही तय करना और किसी भी लापरवाही या कदाचार के मामले में सख्त कार्यवाही सुनिश्चित करना।
– अधीनस्थ कर्मियों के लिए नियमित प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण कार्यक्रमों की योजना तैयार कर उनके प्रभावी क्रियान्वयन का पर्यवेक्षण करना, जिससे भविष्य में नवीन कर्मी उपलब्ध रहें।
– महिलाओं एवं बालिकाओं के लिए सेल्फ डिफेन्स क्लासेज आयोजित कराना, जिसमें महिला शक्ति केन्द्र के कर्मी भी सम्मिलित हो सकते हैं।
– प्रकरण को आवश्यकतानुसार चिन्हित कर पीड़िता की काउंसिलिंग प्रोफेशनल साइकोलॉजिस्ट से कराने की व्यवस्था सुनिश्चित करना।
– वन स्टॉप सेंटर की क्षमता का आंकलन कर आवश्यकतानुसार इन्हैन्समेन्ट की कार्यवाही प्रारम्भ करना।
– मिशन शक्ति केन्द्र सम्बन्धित थाने का एक भाग है जो महिला चौकी की भांति कार्यों को सम्पादित करेगा। मिशन शक्ति केन्द्र की प्रभारी, थाने के प्रभारी निरीक्षक/ थानाध्यक्ष के नियंत्रणाधीन कार्य करेंगी।
– संबंधित प्रभारी निरीक्षक/थानाध्यक्ष द्वारा मिशन शक्ति केन्द्र के औपचारिक रूप से प्रारम्भ किये जाने/लांच किये जाने के 2 सप्ताह के अन्दर अपने थाने में मिशन शक्ति केन्द्र की स्थापना कराकर सुचारू रूप से क्रियाशील कराया जाना सुनिश्चित करना।
– अपने थाने के मिशन शक्ति केन्द्र का नियमित निरीक्षण, केन्द्र में कार्यरत कर्मियों की नियमित ब्रीफिंग एवं संसाधनों के संबंध में अपेक्षित सहयोग प्रदान करना।
– यह सुनिश्चित करना कि महिला शक्ति केन्द्र प्रभारी का मोबाइल नम्बर ग्राम पंचायत स्तर पर प्रसारित किया जाए।

यह है सहायक पुलिस उपायुक्त/क्षेत्राधिकारी की जिम्मेदारी
– क्षेत्राधिकारी अपने सर्किल में मिशन शक्ति केन्द्र के लिए सहायक नोडल अधिकारी होंगे। इनकी भूमिका नीति के क्रियान्वयन और पर्यवेक्षण तथा अपने क्षेत्राधिकार में महिला सुरक्षा पहलों के समग्र समन्वय की होगी।
– अपने सर्किल के सभी मिशन शक्ति केन्द्र और महिला हेल्प डेस्क के समग्र प्रदर्शन की निगरानी, मूल्यांकन एवं मासिक/पाक्षिक प्रगति रिपोर्ट की समीक्षा करना। अपने क्षेत्राधिकार में महिलाओं के खिलाफ अपराधों के रुझानों और पैटर्न का विश्लेषण करना तथा निवारक उपायों का सुझाव देना तथा नोडल अधिकारी के अनुमोदनोपरान्त क्रियान्वित कराना।
– महिला हेल्प डेस्क और मिशन शक्ति केन्द्र के लिए पर्याप्त मानव संसाधन, वित्तीय संसाधन और भौतिक बुनियादी ढांचा की उपलब्धता सुनिश्चित करना।
– अपने अधीनस्थ समस्त मिशन शक्ति केन्द्र कर्मियों की जवाबदेही तय करना और किसी भी लापरवाही या कदाचार के मामले में सख्त कार्यवाही सुनिश्चित करना।
– अपने सर्किल के प्रत्येक थाने की मिशन शक्ति केन्द्र का आकस्मिक निरीक्षण कर विवरण निरीक्षण पुस्तिका में अंकित करना।
– थाने जाने पर मिशन शक्ति केन्द्र के सभी कर्मचारियों के साथ सम्मेलन करना, उनकी समुचित ब्रीफिंग करना, फीडबैक लेना, मिशन शक्ति केन्द्र की कार्यक्षमता वृद्धि के संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश देना।

यह है कमिश्नरेट/जनपदीय पुलिस आयुक्त/वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक/पुलिस अधीक्षक की जिम्मेदारी
– मिशन शक्ति केन्द्र के संचालन के लिए पर्यवेक्षक (Supervisor)के रूप में कार्य करेंगे।
– अपर पुलिस अधीक्षक स्तर के अधिकारी को मिशन शक्ति केन्द्र के कमिश्नरेट/जनपदीय नोडल अधिकारी के रूप में नियुक्त कर उनके द्वारा किए जा रहे कार्यों का पर्यवेक्षण/मार्गदर्शन करना।
– कमिश्नरेट/जनपद स्तर पर महिला एवं बाल सुरक्षा से संबंधित रणनीति का निर्धारण और उसके क्रियान्वयन हेतु दिशा-निर्देश देना।
– प्रत्येक माह की अपराध गोष्ठी में मिशन शक्ति केन्द्र के प्रभारी के कार्यों एवं समस्याओं की नियमित समीक्षा करना।
– मिशन शक्ति केन्द्र के सन्दर्भ में अधीनस्थ अधिकारियों द्वारा प्रस्तुत की गई रिपोर्टों के आधार पर निर्णय लेना और सुधारात्मक निर्देश देना।
– मिशन शक्ति केन्द्र में पर्याप्त मानव संसाधन, वित्तीय संसाधन और भौतिक बुनियादी ढांचा की उपलब्धता सुनिश्चित कराना।
– मिशन शक्ति केन्द्र में लापरवाही या संवेदनहीनता पर अनुशासनात्मक कार्यवाही सुनिश्चित करना और समयबद्ध, न्यायसंगत समाधान की जिम्मेदारी तय करना।
– पुलिस आयुक्त/वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक/पुलिस अधीक्षक 2 सप्ताह के अन्दर अपने कमिश्नरेट/जनपद के सभी थानों में मिशन शक्ति केन्द्र की स्थापना कराकर सुचारू रूप से क्रियाशील कराया जाना सुनिश्चित कराएंगे।
– विभिन्न सरकारी विभागों (जैसे-समाज कल्याण, स्वास्थ्य, शिक्षा) न्यायिक अधिकारियों और अन्य हितधारकों के साथ जिला स्तरीय समन्यव स्थापित करना। यह सुनिश्चित करना कि पीड़ित महिलाओं को सभी आवश्यक सहायता सेवाएं उपलब्ध कराना।

हर तीन माह में होगी केंद्रों के कार्यों की समीक्षा
– महिला एवं बाल सुरक्षा संगठन, महिला शक्ति केन्द्र की व्यवस्था को सम्पूर्ण प्रदेश में कियान्वित करायेंगें तथा उसकी कार्यवाही की त्रैमासिक समीक्षा करेंगे।
– महिला सुरक्षा के लिए जागरूकता एवं प्रचार-प्रसार कराने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश व पैम्फलेट/होर्डिंग के प्रारूप तैयार कर जनपदों को उपलब्ध करायेंगे।

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