Tuesday, June 2, 2026
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ग्रीनलैंड हासिल करने के लिये बल का प्रयोग नहीं करेगा अमेरिका : ट्रंप

(24×7न्यूजटाइम संवाददाता)
दावोस। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को कहा कि वह ग्रीनलैंड को हासिल करने के लिये बल का प्रयोग नहीं करेंगे, लेकिन अगर वह ऐसा करते हैं तो अमेरिका को कोई रोक नहीं पायेगा।
श्री ट्रंप ने यहां विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) में अपनी 70 मिनट की स्पीच में ग्रीनलैंड पर कब्ज़ा करने के उनके इरादे और इस मुद्दे को लेकर यूरोपीय संघ के साथ उनके मतभेद पर रोशनी डाली। उन्होंने अपने भाषण में कई बार ग्रीनलैंड को आइसलैंड कहकर भी संबोधित किया।
उन्होंने नाटो के खर्च पर कहा, “हमने कभी (नाटो से) कुछ नहीं मांगा, न ही हमें कभी कुछ मिला। अगर हम अपनी ताकत और बल का प्रयोग नहीं करते तो हमें कुछ मिलेगा भी नहीं। अगर ऐसा होता है तो हमें रोकने वाला कोई नहीं होगा, लेकिन मैं ऐसा करूंगा नहीं।”
ट्रंप प्रशासन ने ग्रीनलैंड पर कब्जा करने की प्रक्रिया में सेना के इस्तेमाल को खारिज नहीं किया था। श्री ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ग्रीनलैंड का स्वामित्व चाहता है क्योंकि अगर वह पट्टे पर होगा तो उसकी रक्षा नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा, “कोई भी भला किसी लाइसेंस समझौते या पट्टे पर मिली ज़मीन की रक्षा क्यों करना चाहेगा?”
उल्लेखनीय है कि ग्रीनलैंड डेनमार्क का हिस्सा है और वह नाटो का एक सहयोगी देश है। नाटो का अनुच्छेद-5 कहता है कि एक नाटो देश पर हमला सभी पर हमला माना जायेगा। अब तक इस अनुच्छेद का इस्तेमाल सिर्फ अमेरिका के संबंध में हुआ है। श्री ट्रंप ने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि अगर अमेरिका को ज़रूरत पड़ती है तो नाटो उनके बचाव के लिये आगे आयेगा।
श्री ट्रंप ने नाटो के साथ डेनमार्क के कम सुरक्षा खर्च की आलोचना करते हुए कहा कि सिर्फ़ अमेरिका ही ग्रीनलैंड की रक्षा कर सकता है। उन्होंने ग्रीनलैंड के विकास और सुधार की बात भी उठाई। श्री ट्रंप ने अमेरिका के ग्रीनलैंड पर नियंत्रण के बारे में बात करने के लिये “तुरंत” बातचीत का आह्वान किया, हालांकि यूरोपीय अधिकारी कई बार इस प्रस्ताव को ठुकरा चुके हैं।
श्री ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ग्रीनलैंड पर यूरोप के रुख़ को हमेशा याद रखेगा। उन्होंने कहा, “हमें दुनिया की रक्षा करने के लिये बर्फ का एक टुकड़ा चाहिये, लेकिन वह हमें इसे नहीं दे सकते। हमने कभी कुछ नहीं मांगा। हम चाहते तो खुद ही ज़मीन का वह टुकड़ा ले सकते थे, लेकिन हमने ऐसा नहीं किया।”
उन्होंने कहा, “यूरोप के पास एक विकल्प है। आप चाहें तो हां कह सकते हैं और हम इसका बहुत सम्मान करेंगे। आप चाहें तो ना भी कह सकते हैं और फिर हम याद रखेंगे कि मजबूत नाटो के बिना मज़बूत और सुरक्षित अमेरिका नहीं बन सकता। यही एक वजह है कि मैं हमारी सेना को बहुत मजबूत बनाने के लिये काम कर रहा हूं।”
इस बीच, श्री ट्रंप ने पड़ोसी मुल्क कनाडा की ओर रुख़ करते हुए कहा कि अमेरिका की वजह से ही कनाडा सुरक्षित है। उन्होंने कहा कि उनकी प्रस्तावित ‘गोल्डन डोम’ हवाई रक्षा प्रणाली कनाडा की भी रक्षा करेगी।
उन्होंने कहा, “कनाडा को हमारी तरफ से काफी चीजें मुफ्त मिल जाती हैं। उन्हें इसके लिये शुक्रगुज़ार होना चाहिये, लेकिन ऐसा नहीं है। मैंने आपके प्रधानमंत्री (मार्क कार्नी) को कल देखा। वह बहुत शुक्रगुज़ार नज़र नहीं आये। कनाडा, उन्हें हमारे प्रति शुक्रगुज़ार होना चाहिये। कनाडा ज़िन्दा है अमेरिका की वजह से।”
इस बीच, यूरोपीय संघ के विधायी निकाय ने बुधवार को उसे व्यापार समझौते की औपचारिक मंज़ूरी पर काम रोक दिया, जो उसने पिछली गर्मियों में राष्ट्रपति ट्रंप के साथ की थी। यूरोपीय संसद की अंतरराष्ट्रीय व्यापार समिति के चेयरमैन बर्न्ड लांगे ने कहा, “ग्रीनलैंड, डेनमार्क और उनके यूरोपीय सहयोगियों के खिलाफ टैरिफ सहित लगातार बढ़ते सभी खतरों को देखते हुए हमारे पास समझौते पर काम रोकने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है।”
श्री लांगे ने एक बयान में कहा, “जब तक अमेरिका टकराव के बजाय सहयोग के रास्ते पर फिर से आने का फैसला नहीं करता, तब तक समझौते को आगे बढ़ाने के लिये कोई कदम नहीं उठाया जाएगा।”

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