दोहा/नई दिल्ली (24×7न्यूजटाइम संवाददाता/एजेंसी)। कई इस्लामी देशों ने रविवार को येरुशलम में कथित सोमालीलैंड का ‘दूतावास’ खोले जाने की कड़े शब्दों में संयुक्त रूप से निंदा की है। इन देशों ने इस कदम को अवैध, अस्वीकार्य और अंतर्राष्ट्रीय कानून एवं संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों का उल्लंघन बताया है। इन देशों में कतर, मिस्र, सऊदी अरब, जॉर्डन, तुर्की, पाकिस्तान, इंडोनेशिया और सोमालिया सहित कुल 16 देश शामिल हैं।
दोहा से जारी एक संयुक्त बयान में इन देशों के विदेश मंत्रियों ने खुद को स्वतंत्र घोषित करने वाले सोमालीलैंड क्षेत्र द्वारा ‘अधिकृत’ यरुशलम में एक कथित राजनयिक मिशन स्थापित करने के कदम की आलोचना की।
मंत्रियों ने कहा कि यह कदम अंतर्राष्ट्रीय कानून और संबंधित अंतर्राष्ट्रीय प्रस्तावों का ‘घोर उल्लंघन’ है और अधिकृत येरुशलम की कानूनी और ऐतिहासिक स्थिति का सीधा उल्लंघन करता है।
संयुक्त बयान में येरुशलम की स्थिति को बदलने या अंतर्राष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों के विपरीत व्यवस्थाओं को वैध बनाने के उद्देश्य से की जाने वाली किसी भी एकतरफा कार्रवाई को खारिज करने की बात दोहराई गई है। बयान में कहा गया, “मंत्री अधिकृत येरुशलम में एक अवैध दूतावास को स्थापित करने या अंतर्राष्ट्रीय कानून के खिलाफ किसी भी संस्था या व्यवस्था को वैधता देने के उद्देश्य से किए जाने वाले किसी भी एकतरफा उपाय को स्पष्ट रूप से खारिज करते हैं।”
विदेश मंत्रियों ने इस बात पर जोर दिया कि अंतर्राष्ट्रीय कानून के तहत पूर्वी येरुशलम अधिकृत फिलिस्तीनी क्षेत्र है और इसकी कानूनी या ऐतिहासिक स्थिति को बदलने का कोई भी प्रयास ‘शून्य और अप्रभावी’ है, जिसका कोई कानूनी आधार नहीं है।
इसके साथ ही उन्होंने सोमालिया की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के प्रति अपना कड़ा समर्थन व्यक्त किया, जिसकी सरकार सोमालीलैंड के स्वतंत्रता के दावे को मान्यता नहीं देती है। मंत्रियों ने सोमालिया की एकता को कमजोर करने वाले किसी भी एकतरफा कदम को खारिज किया।
उल्लेखनीय है कि उत्तरी सोमालिया के एक स्वशासी क्षेत्र सोमालीलैंड ने 1991 में सोमालिया से स्वतंत्रता की घोषणा की थी, लेकिन इसे एक संप्रभु राज्य के रूप में व्यापक अंतर्राष्ट्रीय मान्यता नहीं मिली है।
यह घटनाक्रम येरुशलम की स्थिति को लेकर बढ़ी राजनयिक संवेदनशीलता के बीच सामने आया है, जिसे फिलिस्तीन अपने भविष्य के राज्य की राजधानी के रूप में देखता है, जबकि इजरायल इस शहर को अपनी अविभाज्य राजधानी मानता है। अंतर्राष्ट्रीय समुदाय बड़े पैमाने पर पूर्वी यरुशलम को 1967 के युद्ध में इजरायल द्वारा कब्जा किया गया क्षेत्र मानता है।





