Tuesday, June 2, 2026
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अधर में लटकी 691 करोड़ खर्च के बाद भी पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के किनारे औद्योगिक गलियारा बनाने की योजना

(24×7न्यूजटाइम संवाददाता)
लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार की पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के किनारे औद्योगिक गलियारा विकसित करने की महत्वाकांक्षी योजना पर सवाल खड़े होने लगे हैं।
उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीडा) अब तक इस परियोजना पर करीब 691 करोड़ रुपये खर्च कर चुका है, लेकिन जमीन का बैनामा शुरू हुए दो साल बीत जाने के बावजूद एक भी उद्यमी ने यहां उद्योग लगाने में रुचि नहीं दिखाई है।
यूपीडा के सूत्रों की मानें तो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुरूप निवेश शिखर सम्मेलन के तहत मांगे गए प्रस्तावों में भी इस औद्योगिक गलियारे के लिए एक भी आवेदन प्राप्त नहीं हुआ है। पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के अंतिम छोर पर स्थित गाजीपुर जिले को औद्योगिक गलियारे के लिए चुना गया था। सरकार की योजना थी कि 340 किलोमीटर लंबे एक्सप्रेसवे के दोनों किनारों पर औद्योगिक इकाइयां स्थापित कर निवेश और रोजगार को बढ़ावा दिया जाए। यूपीडा के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, “ सरकार की मंशा के मुताबिक़ ही चरणबद्ध तरीके से जमीन अधिग्रहण की योजना बनाई गई थी। इसके तहत ही गाजीपुर जिले के मुहम्मदाबाद तहसील में 04 जनवरी 2024 से जमीन का बैनामा शुरू किया गया।”
यूपीडा के अधिकारी के अनुसार अब तक लगभग 202 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण किया जा चुका है, जिसमें अधिकांश जमीन किसानों से खरीदी गई है। इस पर 691 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं और इसमें से 570 करोड़ रुपये का भुगतान हो चुका है । शेष राशि की मांग शासन से की गई है। किसानों को सर्किल रेट से चार गुना तक मुआवजा दिया गया, जिससे परियोजना की लागत लगातार बढ़ती चली गई।”
सूत्रों की मानें तो यूपीडा अधिकारियों की चिंता यह है कि यदि भूमि अधिग्रहण पर करोड़ों रुपये तक खर्च करने के बाद भी कोई उद्यमी नहीं आया, तो इस भारी निवेश का उपयोग कैसे होगा। शुरुआती चरण में जमीन अधिग्रहण को प्राथमिकता दी गई, जबकि दूसरे चरण में अवस्थापना सुविधाएं और तीसरे चरण में उद्योगों की स्थापना प्रस्तावित थी।
अधिकारियों का कहना है कि अभी तक उद्यमियों की रुचि न दिखने से पूरा प्रोजेक्ट असमंजस में फंसा नजर आ रहा है। अब तक केवल उत्तर प्रदेश की एक कंपनी ने यहां निवेश की संभावना तलाशी थी। वह कंपनी मछली उत्पादन से जुड़ी एक बड़ी परियोजना लगाना चाहती थी, लेकिन उच्चस्तरीय टीम द्वारा स्थल निरीक्षण के बावजूद कोई औपचारिक प्रस्ताव दाखिल नहीं किया गया।
दरअसल परियोजना के पहले चरण में गाजीपुर जिले के जंगीपुर, चौकिया और भोपापुर गांवों की जमीन का बैनामा किया गया। इसी तरह अभी 13 मौजों की जमीन अधिग्रहण के दायरे में प्रस्तावित है। विशेषज्ञों का मानना है कि बिना ठोस निवेश प्रस्तावों के इतनी बड़ी रकम खर्च होना योजना क्रियान्वयन और निवेश रणनीति पर गंभीर सवाल खड़े करता है। अब देखना होगा कि सरकार इस औद्योगिक गलियारे को लेकर नीति में बदलाव करती है या निवेशकों को आकर्षित करने के लिए नए प्रोत्साहन पैकेज लाती है।

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