Tuesday, June 2, 2026
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उद्योग के लिए अब 75 दिन में मिलती है पर्यावरणीय मंजूरी: यादव

(24×7न्यूजटाइम संवाददाता)

नयी दिल्ली। केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने रविवार को कहा कि पिछले 11 साल में सरकार ने व्यापार को आसान बनाने की दिशा में काफी काम किया है और किसी उद्योग के लिए पर्यावरणीय मंजू्री मिलने में मात्र 75 दिन का समय लगता है।
भारत ग्लोबल इंडस्ट्रीज फोरम द्वारा यहां आयोजित एक अधिवेशन को संबोधित करते हुये श्री यादव ने कहा कि सत्ता में आने के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कारोबार की आसानी की जो बात कही उसके चार मंत्र दिये – अनुपालना को कम कर लंबित सरकारी फाइलों की संख्या कम करना, कारोबार की अनुपालना में छोटी-छोटी चूक को आपराधिक श्रेणी से बाहर करने का फैसला, डिजिटलाइजेशन और मंजूरी प्रक्रियाओं को आसान करना।
उन्होंने कहा कि एक समय था जब कांग्रेस के राज में अगर किसी कारोबारी को पर्यावरणीय मंजूरी, वन्य मंजूरी, वन्य जीव मंजूरी आदि चाहिये होती थी तो औसत तीन साल लगते थे जिसे घटाकर मौजूदा सरकार 75 दिन पर लेकर आयी है। ऐसा इसलिए संभव हुआ कि सरकार डिजिटलाइजेशन की तरफ कदम बढ़ाते हुये परिवेश 2 पोर्टल लेकर आयी है। पहले सरकार में कभी फाइलें एक-दूसरे से बातें नहीं करती थीं। पर्यावरण की फाइल का वन विभाग को पता नहीं होता था, वन विभाग की फाइल का वन्य जीव वालों को पता नहीं होता था। मौजूदा सरकार ने सबको एक मंच पर लाकर खड़ा किया है और यह हर मंत्रालय के लिए सच है।
श्री यादव ने कहा कि सरकार की नीतियों का परिणाम है कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में जब दुनिया को लगने लगा था कि भारतीय अर्थव्यवस्था के सामने एक नयी चुनौती सिर उठा रही है, दो दिन पहले आये पहली तिमाही के सकल घरेलू उत्पाद के आंकड़ों में 7.8 प्रतिशत की वृद्धि देखी गयी। उन्होंने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था में लगातार आगे बढ़ने की क्षमता है और 2047 की तरफ देश को किसी प्रतिस्पर्धा में नहीं, अपने नैतिक मूल्यों को लेकर आगे बढ़ना चाहिये।
स्वदेशी जागरण मंच के अखिल भारतीय सह-संगठन मंत्री सतीश कुमार ने कहा कि साल 2047 तक देश का 30 लाख करोड़ डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य छोटा है और भारत से स्वर्णिम इतिहास को देखते हुये इससे कहीं ज्यादा क्षमता है। उन्होंने कहा कि भारत पहली सदी से 15वीं सदी तक दुनिया के सकल उत्पादन में एक-तिहाई का योगदान देता था। आजादी के बाद एक समय था जब सरकार दुनिया के दूसरे देशों के सामने गेहूं के लिए झोली फैलाती थी, आज हमने अमेरिका से उसकी शर्तों पर व्यापार समझौता करने से इनकार कर दिया है।
श्री कुमार ने कहा कि दुनिया का 40 प्रतिशत चावल भारत से निर्यात होता है। गेहूं के निर्यात में भारत दूसरे और डेयरी में पहले स्थान पर है। चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर सॉफ्ट लैंडिंग करने वाला भारत अकेला देश है।
उन्होंने विश्वास जताया कि वर्तमान समय में जारी आयात शुल्क युद्ध में भारत सबसे बड़ा विजेता बनकर उभरेगा। उन्होंने कहा कि देश को 2047 तक सिर्फ समृद्ध ही नहीं महान भी बनाना है और इसके लिए हमें अपने पारंपरिक नैतिक और जीवन मूल्यों के साथ आगे बढ़ना होगा। राज्यसभा सांसद विक्रमजीत सिंह साहनी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दौरे पर चीन के साथ व्यापार को लेकर आज हुये फैसलों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि आर्थिक विकास का लाभ जबतक आम लोगों को नहीं मिलेगा सही मायने में विकास नहीं होगा।

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