(24×7न्यूजटाइम संवाददाता)
नई दिल्ली। वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के मुख्य स्लैबों की संख्या चार से घटकर दो करने के प्रस्ताव को जीएसटी परिषद की मंजूरी मिलने से खेती को नया जीवन मिला है। नए स्लैब के कारण अब किसानों की लागत में कमी आयेगी और खेती में मशीनीकरण को बढ़ावा मिलेगा।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने परिषद की 56वीं बैठक के बाद बताया कि खेती के काम में इस्तेमाल होने वाले ट्रैक्टर पर लगने वाले 12 प्रतिशत जीएसटी को कम करके पांच प्रतिशत के स्लैब में डाल दिया गया है। इससे ट्रैक्टर की कीमत कम हो जायेगी। यही नहीं ट्रैक्टर टायर और पुर्जों पर जो पहले 18 प्रतिशत जीएसटी लगता था उसे कम करके पांच प्रतिशत के स्लैब में डाल दिया गया है।
जीएसटी परिषद ने खेत की तैयारी में काम आने वाले उपकरणों के साथ साथ कटाई, थ्रेसिंग के लिए मशीनों पर लगने वाले 12 प्रतिशत से कम होकर पांच प्रतिशत कर दिया गया है। इससे कृषि, बागवानी और वानिकी में इस्तेमाल होने वाली मशीनें भी सस्ती हो जायेंगी।
इस बैठक में टपक सिंचाई प्रणाली और छिड़कांव से होने वाली सिंचाई में काम आने वाले उपकरणों पर लगने वाला जीएसटी 12 प्रतिशत से कम होकर पांच प्रतिशत करने का फैसला किया गया। इससे किसानों की सिंचाई पर आने वाली लागत कम हो जाएगी।
सरकार के जैव कीटनाशक और सू्क्ष्म पोषक तत्वों पर लगने वाले 12 प्रतिशत जीएसटी से कम करके पांच प्रतिशत करने के प्रस्ताव पर परिषद ने मोहर लगा दी। इससे भी किसान की लागत कम होगी और किसान की जेब पर पड़ने वाला बोझ कम हो जाएगा।





