Tuesday, June 2, 2026
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ओबीसी आरक्षण मामले पर उच्चतम न्यायालय की व्यवस्था के बाद मध्यप्रदेश में राजनीति तेज

(24x7newstime Correspondent)
भोपाल । मध्यप्रदेश लोकसेवा (अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और अन्य पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण) संशोधन अधिनियम, 2019 – ओबीसी आरक्षण की संवैधानिक वैधता को लेकर उच्चतम न्यायालय की ओर से व्यवस्था दिए जाने के बाद राज्य में अब इस मामले को लेकर राजनीति तेज हो गई है। न्यायालय ने कल इस मामले की सुनवाई करते हुए इसे ‘टॉप ऑफ द बोर्ड’ की श्रेणी में रखा और 23 सितंबर से इस प्रकरण की प्रतिदिन सुनवाई करने की व्यवस्था दी है। राज्य सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता, अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के एम नटराज और महाधिवक्ता प्रशांत सिंह ने उच्चतम न्यायालय में तर्क प्रस्तुत किए। कल आई इस व्यवस्था के बाद प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की तरह डॉ मोहन यादव सरकार भी ओबीसी आरक्षण को लेकर राजनीतिक दुर्भावना और सोची-समझी रणनीति के चलते, इस महत्वपूर्ण मसले को लंबित कर रही है। राज्य में पिछड़ा वर्ग के संवैधानिक अधिकारों को रोकने और युवा भविष्य को बर्बाद करने के लिए भाजपा को बड़ी कीमत चुकानी पड़ेगी। उन्होंने कहा कि सामाजिक न्याय की इस लड़ाई को कांग्रेस हर मोर्चे पर लड़ेगी और ओबीसी वर्ग के अधिकारों के लिए निर्णायक संघर्ष भी करेगी। वहीं भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश मीडिया प्रभारी आशीष अग्रवाल ने इस फैसले को सरकार की जीत प्रतिपादित किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि एक वह समय था, जब पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ स्वयं गलत आंकड़े अपनी सरकार के समय देते थे। न्यायालय में वकील खड़ा नहीं करते थे, ताकि पिछड़े वर्ग को उनका हक नहीं मिले। आज यह समय है जब मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के नेतृत्व की मध्यप्रदेश की भाजपा सरकार प्रतिबद्धता से, सामूहिकता से सुनिश्चित करने में लगी है कि पिछड़े वर्ग को उनका हक मिले और वह दिन दूनी, रात चौगुनी तरक्की करें।

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