(24×7न्यूजटाइम संवाददाता)
भोपाल। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने आज कहा कि ज्ञान पाना और ज्ञान देना, सुसंस्कृत समाज के निर्माण के लिए दोनों जरूरी है और ज्ञान का दान समाज की सेवा के साथ नैतिक मूल्यों के प्रति समर्पण भी है।
डॉ यादव राजधानी भोपाल में राज्य स्तरीय शिक्षक सम्मान समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने प्राथमिक एवं माध्यमिक विद्यालयों के 55 लाख से अधिक विद्यार्थियों को शाला गणवेश खरीदने के लिए 330 करोड़ रुपए की धनराशि सीधे उनके बैंक खातों में अंतरित की।
उन्होंने कहा कि गुरु के बिना जीवन तमस (अंधकार) में होता है। गुरु ही अपने ज्ञान से सबके जीवन को ज्योतिर्मय बनाते हैं। शिक्षा व्यक्ति को सुसंस्कृत और संस्कारवान इंसान बनाती है। दशरथनंदन राम को मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम बनाने का श्रेय आचार्य विश्वामित्र को जाता है, वहीं गुरु सांदीपनी ने कान्हा को वह शिक्षा दी, जिसने उन्हें भगवत गीता का ज्ञान देने वाला श्रीकृष्ण बनाया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि गुरुजन सदैव पूजनीय हैं, क्योंकि वे अपने ज्ञान और परिश्रम से शिक्षा के मंदिरों को प्रकाशित करते हैं। प्रदेश सरकार शिक्षकों के मान-सम्मान के लिए निरंतर प्रयासरत है। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर सम्मानित सभी शिक्षकों का अभिवादन कर प्रदेश के विद्यार्थियों के भविष्य निर्माण में उनके योगदान की सराहना की।
डॉ. यादव ने शिक्षकों के हित में घोषणा करते हुए कहा कि प्रदेश के शैक्षणिक संवर्ग के सहायक शिक्षक एवं उच्च श्रेणी शिक्षक तथा नवीन शैक्षणिक संवर्ग के प्राथमिक शिक्षक एवं माध्यमिक शिक्षकों को चतुर्थ क्रमोन्नत समयमान वेतनमान का लाभ दिया जाएगा। इससे प्रदेशभर के 1 लाख 50 हजार शिक्षक लाभान्वित होंगे। इसके लिए जल्द ही कैबिनेट में प्रस्ताव लाया जाएगा और वित्त वर्ष 2025-26 से ही सभी पात्र शिक्षकों को चौथे वेतनमान की सौगात मिलेगी। इससे राज्य सरकार पर करीब 117 करोड़ रुपए का अतिरिक्त व्यय भार आएगा।
उन्होंने कहा कि एआई के युग में आप मशीनें तो अच्छी से अच्छी बना सकते हैं, लेकिन संस्कार केवल गुरु ही दे सकते हैं। आज प्रदेश के 55 लाख बच्चों को 330 करोड़ रुपए की राशि गणवेश के लिए दी गई है। प्रदेश में सांदीपनि विद्यालय खोले जा रहे हैं। हमारे सरकारी स्कूलों का परिणाम निजी स्कूलों से बेहतर रहा है, जो 15 साल में सबसे अच्छा रहा है।





