Tuesday, June 2, 2026
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पीएम मोदी का लालकिलेे से पाक कड़ा संदेश, कहा.. खून और पानी साथ-साथ नहीं बहेंगे

(24x7newstime Correspondent)

नयी दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पाकिस्तान के साथ भारत के संबंधों पर देश का रुख एक बार फिर शुक्रवार को स्पष्ट किया और कहा कि ‘खून और पानी’ साथ-साथ नहीं बहेंगे। श्री मोदी ने ऐतिहासिक लाल किले की प्राचीर से 79वें स्वतंत्रता दिवस समारोह को संबोधित करते हुए पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान का नाम लिये बिना उसे सख्त चेतावनी दी।
श्री मोदी ने कहा, “हमारा देश कई दशकों से आतंक को झेलता आया है। देश के सीने को छलनी कर दिया गया है। अब हमने एक न्यू नॉर्मल स्थापित किया। आतंक को और आतंकी को पालने-पोसने वालों, आतंकियों को ताकत देने वालों को अब हम अलग-अलग नहीं मानेंगे। वो मानवता के समान दुश्मन है। उनके बीच कोई फर्क नहीं है। श्री मोदी ने पाकिस्तान के खिलाफ ‘ऑपरेशन सिंदूर’ समेत अन्य कड़े कदमों की चर्चा कर भारतीय सेना के सामर्थ्य को नमन किया। भारत की बढ़ती सैन्य ताकत का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, “अब भारत ने तय कर लिया है कि इन न्यूक्लियर धमकियों को अब हम सहने वाले नहीं हैं। न्यूक्लियर ब्लैकमेल लंबे अरसे से चला आया है। अब वो ब्लैकमेल नहीं सहा जाएगा। आगे भी अगर दुश्मनों ने ये कोशिश जारी रखी तो हमारी सेना तय करेगी, सेना की शर्तों पर, सेना जो समय निर्धारित करे, उस समय पर, सेना जो तौर तरीके तय करें उस तौर तरीके से, सेना जो लक्ष्य तय करे उस लक्ष्य को अब हम अमल में लाकर के रहने वाले हैं। हम मुंह तोड़ जवाब देंगे।” श्री मोदी ने सिंधु नदी जल समझौता और जम्मू-कश्मीर में आतंकी गतिविधियों पर कहा, “अब भारत ने तय कर लिया है कि खून और पानी एक साथ नहीं बहेंगे। अब देशवासियों को भली-भांति पता चला है कि सिंधु का समझौता कितना अन्यायपूर्ण है। कितना एकतरफा है।” उन्होंने आगे कहा, “भारत से निकलती नदियों का पानी दुश्मनों के खेत को सींच रहा है और मेरे देश के किसान, मेरे देश की धरती पानी के बिना प्यासी है।” श्री मोदी ने कहा, “ये ऐसा समझौता था, जिसने पिछले 7 दशक से मेरे देश के किसानों का अकल्पनीय नुकसान किया है। अब हिंदुस्तान के हक का जो पानी है उस पर अधिकार सिर्फ और सिर्फ हिंदुस्तान का है। हिंदुस्तान के किसानों का है। भारत कतई सिंधु समझौते को, उस स्वरूप को दशकों तक सहा है। उस स्वरूप को आगे नहीं सहा जाएगा। किसान हित में, राष्ट्रहित में यह समझौता हमें मंजूर नहीं है।”

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