
विदिशा पुस्तक मेला का शुभारंभ
बेहतर जिन्दगी के लिए बेहतर रास्ता बताने का काम करती है किताबें : विजय मनोहर तिवारी
(24×7न्यूजटाइम संवाददाता)
विदिशा। जिला प्रशासन और नेशनल बुक न्यास, भारत के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित पुस्तक मेला का शुभारंभ अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया है। विदिशा के रविंद्र नाथ टैगोर सांस्कृतिक भवन ऑडिटोरियम में आयोजित पुस्तक मेला के शुभारंभ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कार्यक्रम के मुख्य अतिथि माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के कुलगुरू विजय मनोहर तिवारी ने पुस्तक मेला को अतिमहत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि बेहतर जिन्दगी के लिए बेहतर रास्ता बताने का काम किताबे करती है। उन्होंने परम्परा और संस्कृति को समावेश करने वाली किताबो, ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और किताबो को घर की आत्मा बताते हुए कहा कि अध्ययन से हम जीवन की असली यात्रा की ओर आगे बढ सकते है। उन्होंने विदिशा जिले की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि को रेखांकित करते हुए किताबो के प्रति रूझान कैसे बढाए की जानकारियां सांझा की। उन्होंने कहा कि लिखने पढने की सीख उन्हें अपनी मां से मिली है। विदिशा विधायक मुकेश टण्डन ने कहा कि सम्पूर्ण दुनिया को किताबो की मदद से जाना जा सकता है। संस्कृति, इतिहास हरेक परिस्थितियों को किताबे समावेश करती है। उन्होंने आने वाली पीढी के लिए किताबो की महत्वता को रेखांकित करते हुए कहा कि ज्ञान ही निरंतर बढता है। पुस्तको का ज्ञान कभी व्यर्थ नही जाता।

विदिशा के कलेक्टर अंशुल गुप्ता ने पुस्तक मेला के शुभांरभ को सम्बोधित करते हुए कहा कि युवा पीढ़ी का ध्यान किताबो की ओर बढे। आने वाले दो तीन वर्षाे में सोशल मीडिया के क्षेत्र में होने वाले नवाचारो को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि किताबो से जो ज्ञान प्राप्त होता है। वह स्थायी और सत्यता का प्रतीक है। उन्होंने नेशनल बुक ट्रस्ट के द्वारा विदिशा में पुस्तक मेला आयोजित करने के प्रति धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि पुस्तक मेला में पाठको की आवश्यकता व अभिरूचि के अनुसार उच्च क्वालिटी लेखनी की किताबे सुगमता से प्राप्त हो रही है। श्री गुप्ता ने जिले के सभी प्रबुद्ध नागरिको से आव्हान किया है कि पुस्तक मेला के इस अवसर का अधिक से अधिक दोहन करें और मन माफिक लेखक की किताबे सुगमता से क्रय करें।
रविन्द्रनाथ टेगौर सांस्कृतिक भवन आडिटोरियम परिसर में आयोजित पुस्तक मेला में साहित्य और पठन संस्कृति को बढ़ावा देने के उद्देश्य से पुस्तक मेले का आयोजन किया गया। इस मेले में देशभर के प्रतिष्ठित प्रकाशकों की पुस्तकें प्रदर्शित की गईं। मेले में बाल साहित्य, विज्ञान, इतिहास, संस्कृति, प्रतियोगी परीक्षाओं से संबंधित तथा क्षेत्रीय भाषाओं की पुस्तकें विशेष आकर्षण का केंद्र रहीं। मेले में विद्यार्थियों, शोधार्थियों, अध्यापकों, साहित्यप्रेमियों और आम नागरिकों की उत्साहपूर्ण भागीदारी रही। पुस्तक प्रेमियों ने नई-नई पुस्तकों का अवलोकन और क्रय किया। इस अवसर पर पुस्तक विमोचन एवं साहित्यिक गोष्ठियों का भी आयोजन किया गया, जिसमें लेखकों और विद्वानों ने पठन संस्कृति को जीवन में अपनाने पर जोर दिया।





