(24×7न्यूजटाइम संवाददाता)
भोपाल/बैतूल। पितृपक्ष के पहले ही दिन चंद्रग्रहण के चलते मध्यप्रदेश के प्रमुख मंदिरों में रविवार दोपहर से सोमवार सुबह तक धार्मिक परंपराओं के अनुसार पट बंद रहेंगे। सूतक और ग्रहण काल में पूजा-अर्चना, आरती और दर्शन पूरी तरह स्थगित रहेंगे।
वही बैतूल जिले में रविवार दोपहर 12 बजे से मंदिरों के कपाट बंद कर दिए गए। बैतूल बाजार स्थित श्री रूक्मणी बालाजी मंदिर के मुख्य पुजारी असीम पंडा ने बताया कि ग्रहण समाप्ति के बाद सोमवार सुबह 6रू30 बजे शुद्धिकरण प्रक्रिया पूरी कर कपाट पुनः खोले जाएंगे।
ज्योतिषीय गणना के अनुसार चंद्रग्रहण का सूतक काल रविवार दोपहर 12रू55 बजे से प्रारंभ हो गया है। ग्रहण रात 9रू55 बजे शुरू होकर सोमवार तड़के 1रू26 बजे समाप्त होगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सूतक काल से लेकर ग्रहण समाप्ति तक भोजन बनाना, खाना और किसी भी शुभ कार्य का आयोजन वर्जित माना जाता है।
इसी प्रकार पूरे प्रदेश में भी रविवार दोपहर 12रू30 बजे से मंदिरों के पट बंद हो गए। बैतूल जिले के मुलताई में ताप्ती मंदिर में नियमित शाम की आरती के स्थान पर दोपहर 12 बजे विशेष आरती की गई। इसके बाद ताप्ती मंदिर सहित नगर के जगदीश मंदिर, लक्ष्मीनारायण मंदिर और सत्यनारायण मंदिर के कपाट बंद कर दिए गए। सोमवार सुबह स्नान और शुद्धिकरण के बाद पुनः पूजन-अर्चन और आरती की जाएगी।
विशेषज्ञों के अनुसार धार्मिक मान्यताओं में चंद्रग्रहण को अशुभ माना जाता है, जबकि वैज्ञानिक दृष्टिकोण से यह एक खगोलीय घटना है, जिसमें पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है और उसकी छाया चंद्रमा पर पड़ती है। इस प्रकार पूरे मध्यप्रदेश में चंद्रग्रहण के दौरान धार्मिक परंपराओं का पालन करते हुए मंदिरों में पट बंद रहेंगे, जिसमें बैतूल जिले के मंदिर भी शामिल हैं।





