(24×7न्यूजटाइम संवाददाता)
नयी दिल्ली। विदेश सचिव विक्रम मिस्री रविवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने देशों के संबंधों के भविष्य की एक रूपरेखा प्रस्तुत की है जिसमें दोनों के बीच “भागीदारी” बढ़ने पर बल है ना कि प्रतिद्वंद्विता पर।
श्री मिस्री श्री मोदी की चीन यात्रा के दौरान उनके विभिन्न कार्यक्रमों के बारे में संवाददाताओं को जानकारी दे रहे थे। उन्होंने बताया कि श्री मोदी शंघाई सहयोग संगठन (सीएसओ) शिखर सम्मेलन के पूर्ण सत्र को कल संबोधित करेंगे। श्री मोदी ने आज दिन में चीन के राष्ट्रपति के साथ द्विपक्षीय बातचीत की। गौरतलब है कि पिछले साल अक्टूबर में कजान के बाद दोनों नेता एक साल में दूसरी बार मिले हैं।
श्री मिस्री ने बताया कि श्री मोदी कल रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ द्विपक्षीय बैठक करेंगे।
उन्होंने भारत- चीन संबंध पर एक सवाल के जवाब में कहा कि दोनों नेताओं ने बातचीत में इस बात पर जोर दिया है कि हमें जिस भविष्य की कामना करनी चाहिए, जिसके लिए लक्ष्य करना चाहिए और इसके लिए प्रयास करना चाहिए , वह भागीदारी का भविष्य है ना कि प्रतिद्वंद्विता का। उन्होंने कहा कि भारत- चीन सीमा पर साओ की तैनाती एक वास्तविकता है, लेकिन लगता है कि पिछले एक साल में जिस तरह की स्थितियां बनी है उसे सीमा पर स्थित यदि सामान्य नहीं हुई है तो भी सामान्य की ओर बढ़ रही है।
उन्होंने कहा कि यह स्थिति एक समय पर कुछ कार्रवाई के कारण स्वरूप सामने आयी। उन्होंने कहा, ” न केवल हमारे आज के दोनों नेताओं, बल्कि बीते समय के नेताओं ने भी भारत और चीन के मध्यावधिक और दीर्घावधिक संबंधों का एक खाका तैयार किया है। दो बड़े पड़ोसी देश होने के नाते, विश्व की दो बड़ी अर्थव्यवस्थाएं होने के नाते और दोनों को मिलाकर 2.8 अरब की आबादी के नाते हमारा प्रयास होना चाहिए कि हमारे भविष्य के संबंध भागीदारी के हों ,ना की प्रतिद्वंद्विता के। उन्होंने कहा कि विश्व व्यापार संगठन और संयुक्त राष्ट्र संघ जैसी बहुपक्षीय व्यवस्थाओं के संचालन में कमियां हैं। अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक, वाणिज्यिक और आर्थिक तथा वित्तीय क्षेत्र की बहुपक्षी व्यवस्थाओं में भारत और चीन के साझाहित स्पष्ट रूप से जुड़े हैं। उन्होंने कहा कि भारत और चीन के बीच व्यापार में असंतुलन के मुद्दे को हल किए जाने की आवश्यकता पर भी दोनों नेताओं ने आज बातचीत की है। श्री मिश्री ने एक सवाल के जवाब में कहा कि ताइवान को लेकर भारत के दृष्टिकोण में कोई बदलाव नहीं आया है।





