(24X7newstime Correspondent)
नयी दिल्ली। भारत ने गुरुवार को दोहराया कि उसने सिंधु जल संधि के बारे में तथाकथित मध्यस्थता न्यायालय के फैसले कभी स्वीकार नहीं किया है और वह इस बारे में पाकिस्तान के चुनिंदा और भ्रामक संदर्भों को सिरे से खारिज करता है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने साप्ताहिक ब्रीफिंग के दौरान सिंधु जल संधि के बारे में तथाकथित मध्यस्थता न्यायालय के फैसले के बारे में एक प्रश्न पर कहा कि इस न्यायालय के फैसले अधिकार क्षेत्र से बाहर हैं और भारत ने न तो इन्हें कभी स्वीकार किया और न ही इनका भारत के जल इस्तेमाल के अधिकार पर कोई असर पड़ता है। उन्होंने कहा कि यह संधि भारत सरकार के एक संप्रभु निर्णय के कारण स्थगित है।
उन्होंने कहा,“ भारत ने तथाकथित मध्यस्थता न्यायालय की वैधता, औचित्य या क्षमता को कभी स्वीकार नहीं किया है। इसलिए इसके फैसले अधिकार क्षेत्र से बाहर, कानूनी स्थिति से रहित हैं और इनका भारत के जल उपयोग के अधिकारों पर कोई असर नहीं पड़ता है। भारत तथाकथित ‘फैसले’ के संबंध में पाकिस्तान के चुनिंदा और भ्रामक संदर्भों को भी स्पष्ट रूप से खारिज करता है। जैसा कि 27 जून 2025 की प्रेस विज्ञप्ति में दोहराया गया है, सिंधु जल संधि भारत सरकार के एक संप्रभु निर्णय के कारण स्थगित है, जो पाकिस्तान द्वारा बर्बर पहलगाम हमले सहित सीमा पार आतंकवाद को लगातार समर्थन देने के जवाब में लिया गया था।”





