(24x7newstime Correspondent)
लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को कहा कि 2017 से 2025 के बीच उत्तर प्रदेश ने जीएसडीपी में लंबी छलांग लगाई है जो दर्शाता है कि प्रदेश के विकास पर निरंतर अग्रसर है।
विधान परिषद में योगी ने अपने संबोधन में कहा कि 2016-17 में यूपी की जीएसडीपी 13 लाख करोड़ था, जो इस वित्तीय वर्ष के अंत तक बढ़कर 35 लाख करोड़ होने जा रही है। यूपी का जीडीपी में योगदान मात्र 8 फीसदी रह गया था, वह इस वित्तीय वर्ष के अंत तक बढ़कर साढ़े नौ फीसदी तक पहुंचेगा। 2016-17 में प्रति व्यक्ति आय 43 हजार थी, वह इस वित्तीय वर्ष के अंत तक बढ़कर 1.20 लाख रुपये हो जाएगी। नेशनल पर कैप्टा इनकम दो लाख रुपये है, हमने आधे से अधिक की दूरी तय की है। यूपी का एक्सपोर्ट 84 हजार करोड़ से बढ़कर 1 लाख 86 हजार करोड़ रुपये हुआ है। यूपी में अब केंद्रीय करों पर निर्भरता कम हुई है। यूपी ने अपने राजस्व को बढ़ाने में सफलता प्राप्त की है। रेवेन्यू सरप्लस स्टेट के रूप में मजबूती के साथ बढ़ने वाले राज्यों में यूपी का अग्रणी स्थान है।
उन्होंने कहा कि 2017 के बाद यूपी में इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ सरकारी सोच व अप्रोच में सार्थक बदलाव देखने को मिला है। इससे दो बातें स्पष्ट हो जाती हैं कि 2017 के पहले की संभावनाएं क्या थीं और इसके बाद क्या हुआ। अगले 22 वर्ष के अंदर विकसित भारत के संकल्पों को पूरा करने की दिशा में कौन सी कार्ययोजना बनानी होगी, जो लक्ष्यों को प्राप्त करने में मदद कर सके। यूपी में संभावनाएं पहले भी थीं। इसके बावजूद यूपी की भूमिका अलग-अलग समय में क्या रहीं, यह किसी से छिपा नहीं है। 1947 से लेकर 1960 के दशक में देश की अर्थव्यवस्था में यूपी का योगदान 14 फीसदी से अधिक था। 2017 आते-आते यह घटकर मात्र आठ फीसदी रह गया। सीएम ने 1947 से 2017, 2017 से 2025 के मध्य एनडीए सरकार के प्रयासों का परिणाम व 2025 से 2047 के बीच की व्यापक कार्ययोजना को लेकर चर्चा की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जीआईएस के दौरान लखनऊ आए प्रधानमंत्री ने कहा था कि यूपी में एक आशा है। यूपी उम्मीद बन चुका है। भारत दुनिया के लिए ब्राइट स्पॉट है तो यूपी भारत की ग्रोथ को ड्राइव करने वाला अहम नेतृत्व भी दे रहा है। अमृतकाल में भारत के सारथी के रूप में पीएम ने भारत को विजन 2047 दिया। विकसित भारत में यूपी की भूमिका पर चर्चा करने के लिए इन मुद्दों को समझने और उसके अनुरूप कार्य करने की आवश्यकता है।
उन्होने कहा कि विशाल सामर्थ्य के बावजूद नीतिगत उदासीनता के कारण 2017 के पहले यूपी लगातार पिछड़ता गया। इसकी गिनती बीमारू राज्य के रूप में हो गई। योजनाएं बनती थीं- घोषणाएं होती थीं, लेकिन न इच्छाशक्ति थी, न पारदर्शिता और न क्रियान्वयन का संकल्प। सरकार की उदासीनता के कारण बिजली, सड़क, जल, स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं हो पाती थीं। युवाओं के लिए न रोजगार था, न ही किसानों को राहत, निवेशकों को प्रदेश पर भरोसा भी नहीं था। अपराध व अराजकता का बोलबाला था। पलायन की पीड़ा थी।
योगी ने इंसेफेलाइटिस का जिक्र करते हुए बच्चों की मौत और उनके परिजनों का दर्द बयां किया। उन्होने सरकारी नौकरियों में भ्रष्टाचार व भाई-भतीजावाद पर भी प्रहार किया। उन्होने कहा कि अब कानून का राज, अपराध-अपराधियों के लिए जीरो टॉलरेंस नीति, उद्योगों के लिए सुरक्षित वातावरण, निवेशकों के लिए यूपी ड्रीम डेस्टिनेशन के रूप में उभरा है। जल, थल, नभ की बेहतरीन कनेक्टिविटी, एक्सप्रेसवे-मेट्रो का बेहतरीन जुड़ाव है।
उन्होने कहा कि 1947 में भारत वैश्विक जीडीपी में मात्र दो फीसद की हिस्सेदारी रखता था, लेकिन उस समय भारत दुनिया की छठवीं अर्थव्यवस्था थी। 1960 में कांग्रेस सरकार की गलत नीतियों के कारण भारत 10वें स्थान पर पहुंचा। 1980 से लेकर 2014 तक भारत 11वें स्थान पर पहुंचा। 2014 में नरेंद्र मोदी के पीएम बनने पर भारत का भाग्योदय हुआ। पिछले 11 वर्ष में भारत ने आर्थिक विकास के नए प्रतिमान स्थापित किए हैं, उसका परिणाम है कि भारत आज चौथी बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में स्थापित हुआ है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि 1990 के दशक में औद्योगिक इकाइयों में तालाबंदी, निवेशक हतोत्साहित, ऐतिहासिक व पौराणिक नगर होने के बावजूद यूपी में निराशा का वातावरण था। उपजाऊ भूमि, नदियां और श्रम बल के बावजूद आर्थिक रफ्तार काफी धीमी थी। आजादी के बाद 2016-17 तक राष्ट्रीय जीडीपी में यूपी का योगदान लगातार घटता गया। 2017 में यूपी के योगदान की स्थिति बहुत दयनीय थी। यूपी का बजट केंद्रीय करों- सहायता पर अधिक निर्भर हो गया था। नीति आयोग के फिजिकल हेल्थ इंडेक्स में यूपी को पिछड़े राज्य के रूप में माना गया था।





