वर्ष 2024-25 में उत्तर प्रदेश से यूएस को 36850 करोड़ का हुआ निर्यात

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(24×7न्यूजटाइम संवाददाता)
लखनऊ। अमेरिका की तरफ से भारत पर लगाये गए 50 फीसद टैरिफ (25 फीसद टैरिफ 25 फीसद पेनाल्टी) को लेकर एमएसएमई उद्योग को बचाने की दिशा में सरकार सभी विकल्पों पर ध्यान दे रही है। इसमें एमएसएमई विभाग की तरफ से सरकार को छूट देने के साथ ही मार्किट के विकल्पों पर विचार करने का सुझाव दिया गया है।
टैरिफ को लेकर भारत अमेरिका की तनातनी के पूर्व वर्ष 2024-25 में अकेले उत्तर प्रदेश से 36850 करोड़ रुपये यानी 4.20 विलियन यूएस डॉलर का निर्यात किया गया था। जिसमे डेयरी प्रोडक्ट से लेकर लेदर, टेक्सटाइल, कार्पेट, जेम्स एंड ज्वेलरी, आयरन एंड स्टील, इलेक्ट्रॉनिक, आटोमोबाइल पार्ट्स और फर्नीचर शामिल है। जिनमे सबसे ज्यादा हिस्सेदारी को देखा जाए तो 487.45 मिलियन यूएस डॉलर के इलेक्ट्रॉनिक आइटम, 445.81 मिलियन डॉलर के कपड़े, 396.87 मिलियन डॉलर के कार्पेट और 322.11 मिलियन डॉलर के स्टील और आयरन शामिल है।
वहीं भारत द्वारा यूएस को किये जा रहे निर्यात पर नजर डालें तो 2023-24 में कुल 91.2 विलियन यूएस डॉलर का निर्यात किया गया था। जबकि द्विपक्षीय वस्तु व्यापार के तहत यह आंकड़ा 134 विलियन यूएस डॉलर का था। इनमें इलेक्ट्रॉनिक मशीनरी से लेकर जेम्स एंड ज्वेलरी, फार्मास्युटिकल, इंडस्ट्रियल मशीनरी, मिनरल्स ऑयल, आयरन स्टील, वेहिकल, आर्गेनिक केमिकल्स सहित कपड़े शामिल हैं।
वही टैरिफ लगने के बाद एमएसएमई विभाग के मुताबिक टेक्सटाइल एंड गारमेंट पर 60 से 65 प्रतिशत, मीट, डेयरी, पोल्ट्री प्रोडक्ट पर 54.50 प्रतिशत, लेदर गुडस एंड फुटवियर पर 52.5 प्रतिशत से 59.5 प्रतिशत, कार्पेट्स पर 53.70 प्रतिशत, इंजीनियरिंग गुड्स पर 50 से 55 प्रतिशत, आयरन एंड स्टील पर 50 से 53 प्रतिशत, जेम्स एंड ज्वेलरी पर 50 से 63.5 प्रतिशत टैक्स बढ़ गया है।
ऐसे में टैरिफ के चलते उत्तरप्रदेश सरकार अमेरिका के साथ होने वाले व्यापार को नुकसान से बचाने के लिए जापान, साउथ कोरिया, यूके, यूएई जैसे देशों में अमेरिका को निर्यात होने वाले प्रोडक्ट को उतारने की दिशा में तैयारी कर रही है।
एमएसएमई विभाग के सचिव प्रांजल यादव के मुताबिक इस दिशा में सरकार काफी गम्भीर है। वैश्विक बाजार को ध्यान में रखते हुए रणनीति अपनाई जा रही है। जिससे उद्योग को बचाया जा सके। जिसमे विपणन विकास सहायता, गेटवे पोर्ट सहायता, एयर फ्रेट सहायता योजनाओं में दी जा रही धनराशि में वृद्धि करने के साथ ही, राज्य मार्किट डेवलपमेंट असिस्टेंट योजना को पर्याप्त वित्तपोषित करने की दिशा में प्रयास किया जा रहा है।

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