(24X7newstime Correspondent)
नयी दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने जम्मू-कश्मीर काे पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग वाली याचिका पर गुरुवार को केंद्र सरकार को जबाव तलब किया।
मुख्य न्यायाधीश बी आर गवई और न्यायमूर्ति के विनोद चंद्रन की पीठ ने केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से कहा कि वह इस मामले में जहूर अहमद भट और इरफान हाफिज लोन द्वारा दायर याचिकाओं पर आठ हफ़्ते के भीतर अपना रुख स्पष्ट करें।
पीठ के समक्ष श्री मेहता ने कहा कि निर्णय लेने (राज्य का दर्जा बहाल करने के बारे में) की प्रक्रिया में कई तथ्यों पर विचार किया जाता है।
उन्होंने कहा, “हमने (सरकार ने) चुनावों के बाद राज्य का दर्जा देने का आश्वासन दिया था लेकिन देश के इस हिस्से की स्थिति कुछ अजीब सी है।”
इस पर आवेदकों की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने कहा कि केंद्र सरकार ने राज्य का दर्जा बहाल करने के संबंध में अनुच्छेद 370 को कमज़ोर करने (निष्क्रिय) की वैधता पर सुनवाई के दौरान इस अदालत को आश्वासन दिया था। उस आश्वासन के समय से अब तक 21 महीने बीत चुके हैं।
उनकी इस दलील पर पीठ ने कहा, “पहलगाम में जो हुआ (आतंकी हमला) उसे आप नज़रअंदाज़ नहीं कर सकते। संसद और कार्यपालिका को फैसला राज्य के दर्जे के बारे में लेना है।”
गौरतलब है कि पाकिस्तान समर्थित आतंकवादियों के एक समूह ने 22 अप्रैल, 2025 को पहलगाम में 26 पर्यटकों की कथित तौर पर धर्म पूछकर हत्या कर दी थी, जिसके बाद पाकिस्तान में आतंकवादी नेटवर्क के खिलाफ ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत सफल सशस्त्र अभियान चलाया गया।
अक्टूबर, 2024 में दायर याचिका में दावा किया गया था कि जम्मू-कश्मीर के राज्य के दर्जे को समयबद्ध तरीके से बहाल न करना संघवाद के उस विचार का उल्लंघन है जो संविधान के मूल ढांचे का एक हिस्सा है।
गौरतलब है कि “जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम- 2019” पारित होने के बाद पांच अगस्त, 2019 को जम्मू-कश्मीर को दो केंद्र शासित प्रदेशों, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में पुनर्गठित किया गया था।





