(24×7 न्यूजटाइम संवाददाता)
नयी दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को चुनाव आयोग से कहा कि वह इस साल नवंबर में होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले बिहार की मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान मतदाताओं के लिए ‘आधार’ को 12वें दस्तावेज़ के रूप में स्वीकार करे।
न्यायमूर्ति सूर्य कांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने संबंधित पक्षों की दलीलें सुनने के बाद पहचान के प्रमाण के रूप में आधार को स्वीकार करने का निर्देश दिया। चुनाव आयोग ने पहले पुनरीक्षण प्रक्रिया के दौरान मतदाताओं को शामिल करने के लिए 11 दस्तावेज़ों की सूची बनाई थी।
शीर्ष अदालत ने चुनाव आयोग को बूथ स्तर के अधिकारियों को आधार स्वीकार करने के निर्देश जारी करने का आदेश दिया, जिसमें स्पष्ट किया गया कि अधिकारी इसकी प्रामाणिकता और वास्तविकता की पुष्टि करने के हकदार होंगे।
राष्ट्रीय जनता दल (राजद) और अन्य की याचिका पर सुनवाई करते हुए पीठ ने माना कि आधार कार्ड नागरिकता का प्रमाण नहीं है। पीठ ने यह भी कहा कि जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 23(4) को ध्यान में रखते हुए आधार किसी भी व्यक्ति की पहचान स्थापित करने के उद्देश्य से एक दस्तावेज़ है।





