(24×7 न्यूजटाइम संवाददाताा)
नयी दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने निर्धारित अवधि से अधिक समय तक जेल में बंद रहने को मजबूर एक दोषी की याचिका पर मध्य प्रदेश सरकार को 25 लाख रुपये का मुआवज़ा देने उसे देने का सोमवार को निर्देश दिया।
न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला और न्यायमूर्ति के वी विश्वनाथन की पीठ ने इस तथ्य पर गौर करते हुए कि दोषी सोहन सिंह ने 11 साल और सात महीने जेल में बिताए, लेकिन उसकी जेल की सज़ा केवल सात साल की थी।
याचिकाकर्ता ने दुष्कर्म के एक मामले में अतिरिक्त कारावास की सज़ा काटी थी , हालांकि वह कुछ समय के लिए ज़मानत पर था।
पीठ ने इस मामले में भ्रामक हलफ़नामा दायर करने के लिए राज्य सरकार के वकील से भी सवाल किये।
अदालत ने राज्य सरकार की इस चूक के लिए भी कड़ी आलोचना की, जिसके कारण दोषी को ज़रूरत से ज़्यादा जेल में रहना पड़ा।
अपीलकर्ता सिंह ने मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के 10 अक्टूबर, 2017 के फैसले के खिलाफ शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया था।
याचिकाकर्ता पर भारतीय दंड संहिता की धारा 376(1), 450 और 560बी के तहत दंडनीय अपराध के लिए सत्र न्यायाधीश (खुरई, जिला सागर, मध्य प्रदेश) की अदालत में मुकदमा चलाया गया और दोषी ठहराया गया था।





