(24×7न्यूजटाइम संवाददाता)
नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने जिला न्यायाधीश के पद पर सीधी भर्ती से संबंधित एक विवाद पर सुनवाई पूरी होने के बाद गुरुवार को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। मुख्य न्यायाधीश बी आर गवई और न्यायाधीश न्यायमूर्ति एम एम सुंदरेश, न्यायमूर्ति अरविंद कुमार, न्यायमूर्ति एससी शर्मा और न्यायमूर्ति के विनोद चंद्रन की संविधान पीठ ने तीन दिनों की सुनवाई के बाद अपना फैसला सुरक्षित रखा लिया।
यह मामला जिला न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए पात्रता मानदंड निर्धारित करने से संबंधित है। शीर्ष अदालत ने संविधान के अनुच्छेद 233(2) की व्याख्या से संबंधित कुछ सवालों पर विचार किया। पहला, क्या अधीनस्थ न्यायिक सेवाओं के लिए भर्ती किए जाने पर बार में सात वर्ष पूरे कर चुके न्यायिक अधिकारी को बार की रिक्ति के विरुद्ध अतिरिक्त जिला न्यायाधीश के रूप में नियुक्ति का अधिकार होगा? दूसरा, क्या जिला न्यायाधीश के रूप में नियुक्ति के लिए पात्रता केवल नियुक्ति के समय देखी जानी है या आवेदन के समय या दोनों समय?
इसके अलावा न्यायमूर्ति सुंदरेश ने एक अतिरिक्त मुद्दा सुझाया था – क्या बार और न्यायिक सेवा में संयुक्त अनुभव को सीधी भर्ती के माध्यम से जिला न्यायाधीश के लिए एक साथ माना जा सकता है? इन सवालों पर संविधान पीठ ने संबंधित सभी पक्षों की दलीलें विस्तार पूर्वक सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया।
शीर्ष अदालत ने अजय कुमार सिंह को प्रस्ताव का समर्थन करने वाले पक्ष के लिए नोडल अधिवक्ता नियुक्त किया था। वहीं, जॉन मैथ्यू को विरोध करने वाले पक्ष के लिए नोडल अधिवक्ता। शीर्ष अदालत की संविधान पीठ ने जिला न्यायाधीश के पद पर सीधी भर्ती से संबंधित विवाद सुलझाने के लिए 23 से 25 सितंबर तक सुनवाई करने का 12 सितंबर को प्रताव किया था।





