(24×7न्यूजटाइम संवाददाता)
कोलकाता। मीडिया स्कॉलर पामेला फिलिपोस ने तर्क दिया है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की राजनीतिक संचार रणनीति ने भारत के मीडिया परिदृश्य में एक निर्णायक बदलाव किया है और उन्होंने डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से सीधे जनता से बात की है।
सुश्री फिलिपोस ने एपीजे कोलकाता लिटरेरी फेस्टिवल के 27वें संस्करण में कहा कि पुराने मीडिया से मोदी ने रणनीति के तहत किनारा किया और वह राजनीतिक संचार में एक महत्वपूर्ण बदलाव लेकर आये। उन्होंने कहा कि 2000 के दशक की शुरुआत में टेलीविजन पत्रकार करण थापर द्वारा असहज और लगातार सवालों का सामना करने के बाद उन्होंने प्रधानमंत्री बनने के बाद से बड़े पैमाने पर संवाददाता सम्मेलनों से परहेज किया है।
सुश्री फिलिपोस ने कहा कि श्री मोदी ने जल्दी ही समझ लिया था कि सोशल मीडिया कितना ताकतवर हो सकता है। सोशल मीडिया ने उन्हें जनता से सीधे जुड़ने का मौका दिया, जिससे पत्रकार, सवाल और एडिटोरियल जांच-पड़ताल खत्म हो गयी।
उन्होंने कहा, “अंतर यह है कि कुछ देश ऐसे हैं जो सरकार से सवाल पूछने की नागरिक की इस क्षमता को हमसे ज़्यादा गंभीरता से लेते हैं। और मैं अक्सर कहती हूं, यह बहुत दुख की बात है कि लोग बोलने और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार के लिए लड़ने के लिए सड़कों पर नहीं उतरे हैं। आपने आखिरी बार कब सुना कि लोग बाहर आकर कह रहे हों, हमें चुप क्यों कराया जा रहा है? क्या यह चुनाव का मुद्दा बन गया है?”
उन्होंने कहा, “हालांकि इसे होना चाहिए था, यह हमारे लोकतंत्र के लिए बहुत ज़रूरी है, लेकिन यह कभी चुनाव का मुद्दा नहीं बना। मैं एक सार्वजनिक मंच पर होने के नाते सभी से अनुरोध करती हूं कि हम उन लोगों से सवाल पूछें जो हम पर शासन करते हैं।”





