Tuesday, June 2, 2026
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अविमुक्तेश्वरानंद के साथ अभद्रता के मामले पर मानवाधिकार आयोग ने लिया संज्ञान

(24×7न्यूजटाइम संवाददाता)
प्रयागराज। प्रयागराज माघ मेले में मौनी अमावस्या के दिन शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के शिष्यों के साथ कथित अभद्रता को लेकर शिकायतकर्ता डॉ. गजेंद्र सिंह यादव की शिकायत में लगाए गए आरोपों का राज्य मानवाधिकार आयोग ने संज्ञान लेते हुए शिकायत को निर्देशों के साथ निस्तारित किया। राज्य मानवाधिकार आयोग ने कहा है कि इस घटना की शिकायत में लगाए गए आरोपों की प्रकृति को देखते हुए शिकायत की एक कॉपी पुलिस कमिश्नर, प्रयागराज को भेजी जायेगी जो इस मामले को देखेंगे।आयोग ने प्रयागराज पुलिस कमिश्नर को निर्देश दिया है कि वो कानून के अनुसार अपनी तरफ से ज़रूरी कार्रवाई करेंगे।
आयोग ने शिकायतकर्ता के मामले के गुण दोष के आधार पर कोई राय नहीं दी है। डॉ यादव ने माघ मेले में 18 जनवरी मौनी अमावस्या के दिन स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्यों के साथ पुलिस द्वारा अभद्रता की राज्य मानवाधिकार आयोग से शिकायत की थी। इलाहाबाद उच्च न्यायालय में अधिवक्ता डॉ गजेंद्र सिंह यादव मामले को गंभीर मानते हुए राज्य मानवाधिकार आयोग से दखल देने की मांग की थी।
गजेंद्र यादव ने आयोग से शिकायत में मौनी अमावस्या के दिन स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को त्रिवेणी संगम जाने से रोके जाने की घटना को लेकर चिंता व्यक्त की थी। पूरे घटनाक्रम की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच और उत्तरदायी अधिकारियों के विरुद्ध विधिसम्मत कार्यवाही की मांग की गई थी। शिकायत में कहा गया था कि समाचार माध्यमों एवं प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार शंकराचार्य जी के धार्मिक काफिले को त्रिवेणी संगम की ओर जाने से रोका गया। उनके शिष्यों के साथ कथित रूप से मारपीट एवं धक्का-मुक्की की गई, जिससे तनावपूर्ण एवं अव्यवस्थित स्थिति उत्पन्न हुई, कहा गया था कि यह घटनाक्रम उस समय सामने आया जब अन्य संत-समुदायों एवं अखाड़ों को धार्मिक अनुष्ठान एवं पवित्र स्नान की अनुमति प्राप्त होने की बातें भी प्रकाश में आई।
शिकायत में कहा गया था कि यदि भीड़-नियंत्रण अथवा सुरक्षा कारणों से कोई प्रतिबंध आवश्यक था तो वह समान, तर्कसंगत एवं आनुपातिक होना चाहिए था। चयनात्मक रोक, अपमानजनक व्यवहार अथवा वैकल्पिक व्यवस्था के अभाव में किया गया। प्रशासनिक हस्तक्षेप संविधान प्रदत्त समानता का अधिकार (अनुच्छेद 14), धर्म की स्वतंत्रता (अनुच्छेद 25) तथा गरिमा के साथ जीवन के अधिकार (अनुच्छेद 21) का उल्लंघन करते हुए मानवाधिकार हनन की श्रेणी में आ सकता है।
मानवाधिकार आयोग से मांग की गई थी कि पूरे घटनाक्रम की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जाँच कराई जाए। मेला प्रशासन एवं पुलिस द्वारा अपनाई गई प्रक्रिया, आदेश एवं बल-प्रयोग की समीक्षा की जाए, मानवाधिकार उल्लंघन पाए जाने पर दोषी अधिकारियों के विरुद्ध विधिसम्मत कार्यवाही की मांग की गई थी।

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