शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद से मिले अलंकार अग्निहोत्री, दिल्ली में बड़े आंदोलन की तैयारी

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(24×7न्यूजटाइम संवाददाता)
वाराणसी। उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में सिटी मजिस्ट्रेट पद से इस्तीफा देकर सुर्खियों में आये अलंकार अग्निहोत्री ने रविवार शाम को केदार घाट स्थित विद्या मठ में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती से मुलाकात की। शंकराचार्य के मौन व्रत पर होने के कारण उनकी बातचीत इशारों में ही हो पाई।
अलंकार अग्निहोत्री ने एससी-एसटी एक्ट को लेकर सात फरवरी को दिल्ली कूच करने की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का जनाधार लगातार कम हो रहा है। निलंबन के प्रकरण पर वे संवैधानिक तरीके से कोर्ट के माध्यम से जवाब देंगे। आंदोलन एससी-एसटी एक्ट के खिलाफ होगा, जो दिल्ली में बड़ा रूप लेगा। फर्जी मुकदमों में लोगों को फंसाया जा रहा है।
सात फरवरी को देश के विभिन्न संगठनों और संस्थाओं के लोग दिल्ली कूच करेंगे। 6 फरवरी तक एससी-एसटी एक्ट को काला कानून मानकर वापस नहीं लिया गया, तो देश की राजधानी दिल्ली के लिए हम सभी 7 फरवरी को कूच करेंगे। शंकराचार्य जी मौन होने के कारण उनसे इस मुद्दे पर अभी विस्तार से बात नहीं हो पाई।
श्री अग्निहोत्री ने कहा कि महाराज जी मौन व्रत पर थे, इसलिए बहुत अधिक बात नहीं हो पाई। सनातन धर्म में किसी भी अच्छे कार्य से पहले बड़ों का आशीर्वाद लेना आवश्यक बताया गया है। एससी-एसटी एक्ट की विभीषिका पूरे देश को झेलनी पड़ रही है। 85 प्रतिशत लोग इस एक्ट को नहीं चाहते। सामान्य वर्ग केंद्र सरकार से काफी नाराज है।
उन्होने कहा “ दिल्ली कूच को लेकर रणनीति तैयार की जा रही है। इस संदर्भ में महाराज जी से बातचीत नहीं हो पाई। मेरी कोई राजनीतिक आकांक्षा नहीं है, देश कल्याण की भावना मेरे अंदर है। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) की जो नियमावली आई थी, अगर वह लागू हो जाती तो सिविल वॉर जैसी स्थिति बन सकती थी। इन सबके मूल में एससी-एसटी एक्ट है। खास वर्ग से लाभ लेने की मंशा है। जब भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) है, तो विशेष किसी एक्ट की आवश्यकता ही क्या है।”
अलंकार ने कहा “ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सामने मैंने शंकराचार्य जी के मुद्दे को लेकर बात रखी थी, लेकिन दिल्ली तंत्र के सामने कोई बात क्यों नहीं पहुंच पा रही है। कोई विधायक हो या सांसद, दिल्ली तक बात पहुंच ही नहीं पाता। यूजीसी की नियमावली विभाजनकारी थी। नौकरी पर लौटने का प्रश्न ही नहीं उठता। अभी मुझे बहुत काम करना है। देश का नुकसान न हो, इसलिए इसकी शुरुआत करना जरूरी था।”

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