Saturday, June 13, 2026
spot_img

बुक कराने के बाद 48 घंटे तक बिना शुल्क रद्द करा सकेंगे हवाई टिकट

(24×7न्यूजटाइम संवाददाता/एजेंसी)
नयी दिल्ली। नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने रिफंड को लेकर हवाई यात्रियों की बढ़ती शिकायतों के मद्देनजर,नये नियम जारी किये हैं जिसके तहत बुकिंग के 48 घंटे के भीतर बिना किसी शुल्क के टिकट रद्द कराने या उसमें बदलाव का प्रावधान किया गया है।
नियामक ने रिफंड जारी करने की अधिकतम समय सीमा और न्यूनतम रिफंड की सीमा भी तय कर दी है। इसके लिए सिविल एविएशन रिक्वायरमेंट्स (सीएआर) में बदलाव किये गये हैं। सीएआर के तहत देश के नागरिक उड्डयन क्षेत्र का नियमन होता है। नये नियम 26 मार्च 2026 से प्रभावी होंगे।
नये नियमों के अनुसार, टिकट बुकिंग के बाद 48 घंटे तक एयरलाइंस यात्रियों को “लुक-इन ऑप्शन” देंगी। इस दौरान वे “बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के” टिकट रद्द करा सकेंगे या उसमें बदलाव कर सकेंगे। हालांकि यदि वे दूसरी उड़ान में बुकिंग कराने का विकल्प चुनते हैं तो दोनों के किराये में जो भी अंतर हो, उसका भुगतान उन्हें करना होगा।
“लुक-इन ऑप्शन” का लाभ उठाने के लिए घरेलू मार्गों के लिए कम से कम सात दिन पहले और अंतर्राष्ट्रीय मार्गों के लिए 15 दिन पहले बुकिंग करानी जरूरी है। यह बुकिंग सीधे विमान सेवा कंपनी के प्लेटफॉर्मों के जरिये करायी जानी अनिवार्य होगी। बुकिंग के 48 घंटे बाद टिकट में बदलाव या उसे रद्द कराने के लिए यात्रियों को कैंसिलेशन शुल्क देना होगा।
इसके अलावा नये जोड़े गये प्रावधान के अनुसार, यदि टिकट की बुकिंग ट्रैवल एजेंट या ट्रैवल पोर्टल से की गयी है तो यह सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी एयरलाइंस की होगी कि पात्र यात्रियों को रिफंड 14 दिन के भीतर दिया जाये क्योंकि “एजेंट भी उनके द्वारा नियुक्त प्रतिनिधि” हैं।
यात्रियों की सुविधा के लिए एक और प्रावधान यह किया गया है कि अगर टिकट सीधे एयरलाइंस के प्लेटफॉर्म से बुक कराये गये हैं और यात्री बुकिंग के 24 घंटे के भीतर नाम में गलती की बात एयरलाइंस की जानकारी में लाता है तो नाम सुधार के लिए कोई शुल्क नहीं लिया जायेगा।
किसी यात्री या एक ही पीएनआर पर बुक कराये गये यात्रियों में से किसी एक के यात्रा की अवधि में अस्पताल में भर्ती हो जाने की स्थिति में विमान सेवा कंपनी रिफंड या अपने क्रेडिट शेल में पैसा जमा कराने का विकल्प देगी। यात्री यदि अस्पताल में भर्ती नहीं हुआ है तो उसे विमान सेवा कंपनी के डीजीसीए के पैनल में शामिल एयरोस्पेस मेडिसिन विशेषज्ञ से इस बात का मेडिकल प्रमाणपत्र जमा कराना होगा कि वह यात्रा के लिए फिट नहीं है।
डीजीसीए ने कहा है कि सरकार विमान सेवा कंपनियों की वाणिज्यिक गतिविधियों में दखलअंदाजी न करने के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन यात्रियों से मिलने वाली शिकायतों के बढ़ती संख्या के मद्देनजर आम लोगों के हितों की रक्षा में कदम उठाना और इसके लिए न्यूनतम मानक तय करना अनिवार्य हो गया था।

spot_img

Related Articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisement -spot_img
- Advertisement -spot_img

Latest Articles