Tuesday, June 2, 2026
spot_img

अब रेल यत्री ऑनलाइन कर पाएंगे हादसे, सामान के नुकसान, किराया-विवाद के मामलों में दावा: वैष्णव

(24×7न्यूजटाइम संवाददाता)
नयी दिल्ली। रेल यात्रियों को यात्रा के दौरान हादसे, अनहोनी घटनाओं अथवा सामान के नुकसान या चोरी आदि के मामलों में क्षतिपूर्ति के दावों के लिए इलेक्ट्रानिक सुविधा मिलेगी जिससे कोई यात्री ऐसे किसी भी मामले में रेलवे दावा न्यायाधिकरण (आसीटी) के समक्ष कहीं से भी दावा कर सकेगा।
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने गुरुवार को यहां भारतीय रेलवे की प्रमुख योजना ’52 हफ्तों में 52 सुधार’ के तहत सुधार संख्या तीन और चार क्रमश: रेलटेक नीति और रेलवे दावा न्यायाधिकरण (आसीटी) को पूरी तरह से डिजिटाइजेशन की करने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि ई- आरसीटी प्रणाली रेलवे दावा न्यायाधिकरण को पूरी तरह से कम्प्यूटर आधारित और डिजिट बनाएगी। यह देश में कहीं से भी तेज गति, ज़्यादा पारदर्शी और आम लोगों के पहुंच योग्य बनाकर दावा फाइल करने, प्रक्रिया और न्यायिक निर्णय लेने की गति को बदल देगी। उन्होंने बताया कि मौजूदा समय में देश भर में 23 आरसीटी पीठ हैं और दावा फाइल करना अभी लोगों को मुश्किलों का सामना करना पड़ता है, खासकर उन यात्रियों के लिए जो किसी घटना के समय दूसरे राज्यों में यात्रा कर रहे हों। दावा फाइल करने के लिए सही क्षेत्राधिकार तय करना अक्सर एक बड़ा मुद्दा बन जाता है, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा।
उन्होंने कहा कि इस सुधार का मकसद देश में कहीं से भी दावा फाइल करना आसान, डिजिटल और पहुंच योग्य बनाना है। नयी प्रणाली के तहत परेशान यात्री अपने स्थान की परवाह किए बिना यात्रा करते समय या अपनी मंज़िल पर पहुँचने पर भी इलेक्ट्रॉनिक तरीके से दावा फाइल कर सकेंगे। ई-फाइलिंग से लेकर मामला सूचना प्रणाली तक, पूरी प्रक्रिया डिजिट और एआई आदारित होगी। श्री वैष्णव ने कहा कि अगले 12 महीनों में, इस पहल के तहत रेलवे दावा न्यायाधिकरण की सभी पीठ पूरी तरह से डिजिटाइज़ हो जाएंगी।
उन्होंने बताया कि अगर यह मॉडल सफल होता है, तो इसी तरह के डिजिटल समाधान केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण जैसे दूसरे न्यायाधिकरणमें भी लागू किए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि इसका मकसद तेज़ प्रक्रिया , बेहतर पारदर्शिता और न्याय देने के लिए नागरिक-केंद्रित तरीका सुनिश्चित करना है।
उन्होंने कहा कि पहले, दावा करने और वकीलों को मामला फाइल करने, दस्तावेज जमा करने और मामले की प्रक्रिया को ट्रैक करने के लिए निजी तौर पर न्यायाधिकरण के दफ्तर जाना पड़ता था, जिसमें प्रक्रिया में देरी होती थी। ई-आरसीटी प्रणाली के आने से अब कहीं से भी, कभी भी ऑनलाइन मामला फाइल किए जा सकते हैं, जिससे मामला दर्ज करने वालों के लिए पहुंच , सुविधा और पारदर्शिता में काफी सुधार होगा।
श्री वैष्णव ने कहा कि रेलटेक नीति रेलवे में तकनीक को बड़े पैमाने पर और व्यवस्थित तरीके से शामिल करने के लिए तैयार की गयी है। उन्होंने कहा कि नयी नीति से नवप्रवर्तक, स्टार्टअप और अनुसंधानकर्ता भारतीय रेलवे से एक ढांचागत और आसान तरीके से जुड़ सकेंगे। उन्होंने कहा कि कोई भी व्यक्ति जिसके पास एक मज़बूत तकनीकी आइडिया हो, वह एक समर्पित रेलटेक पोर्टल के ज़रिए रेलवे से संपर्क कर सकेगा, जो पूरी तरह से डिजिटल, प्रक्रिया के ज़रिए काम करेगा। उन्होंने कहा कि इसका मकसद, कड़े विशेष विवरण के आधार पर ठेकेदार चुनने के पहले की मुश्किल प्रणाली से हटकर, नयी तकनीक के परीक्षण और अपनाने पर केंद्रिय करने वाला एक आसान, नवाचार-संचालित ढांचा तैयार कर दी है।
उन्होंने कहा कि इस नीति को को रक्षा क्षेत्र में शामिल करने की पहले, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय स्टार्टअप ढांचा और टेलीकॉम क्षेत्र नवाचार नीति जैसे सफल मॉडल का अध्ययन करने के बाद तैयार किया गया।
वित्तपोषण संरचना के बारे में जानकारी देते हुए रेल मंत्री ने बताया कि जब कोई स्टार्टअप या नवप्रवर्तक किसी काम का तकनीकी समाधान का प्रस्ताव पेश करते हैं, जैसे, रेलवे ट्रैक के पास हाथियों का पता लगाने के लिए एआई आधारित कैमरा प्रणाली, तो रेलवे ज़रूरी विकास निधि का 50 प्रतिशत तक मुहैया करायेगी। एक बार परियोजना सफल हो जाने पर समाधान को बढ़ाने के लिए बड़े लंबी अवधि तक के ऑर्डर दिए जाएंगे। यह नीति सिर्फ़ प्रयोग करने के लिए नहीं बल्कि यह सुनिश्चित करने के लिए तैयार की गयी है कि सफल नवाचार को बड़े पैमाने पर लागू किए जाएं।
रेलवे के अनुसार इस दौरान रेल टेक नीति का मकसद भारतीय रेलवे में नवाचार को बढ़ावा देने के लिए नवप्रवर्तकों , स्टार्टअप्स, उद्योगों और संस्थानों को शामिल करना है। यह नीति नवप्रवर्तकों के चयन को आसान बनाती है और नवाचार के लिए एक खास रेल टेक वेबसाइट’ पेश करती है। नवाचार की चुनौती चैलेंज कोई भी नवप्रवर्तक या विभागीय उपयोगकर्ता शुरू कर सकता है, जिसमें प्रस्ताव को एक ही चरण में विस्तत में जमा करना होता है। यह नीति एक उपभोक्ता – अनुकूल अंतराफलक देती है, स्केल-अप ग्रांट को तीन गुना से ज़्यादा बढ़ाती है और प्रोटोटाइप विकास और प्रशिक्षण के लिए अधिकतम आवंटन को दोगुना करती है।
मुख्य नवाचार क्षेत्र में हाथियों की आवाजाही का पता लगाने के लिए कृत्रिम बुद्धिमता (एआई) आधारित प्रणाली (ईआईडीएस), कोच में आग लगने की घटना का पता लगाने के लिए एआई आधारित प्रणाली , टूटी हुई रेल का पता लगाना के लिए ड्रोन आधारित प्रणाली , रेलटूटी हुई पटरियों का पता लगाना, पार्सल वैन (वीपीयू) पर भार गणना उपकरण निगरानी उपकरण, , कोच पर सोलर पैनल, कोचों की सफाई की निगरानी के लिए एआई आधारित प्रणाली, कोहरे वाले माहौल में रुकावट का पता लगाना, और पेंशन और विवाद सुलझाने के एआई आधारित प्रणाली हैं।
इस अवसर पर आरसीटी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति कंवलजीत सिंह अहलुवालिया भी उपस्थित थे। उन्होंने इस पहल के लिए रेल मंत्री श्री वैष्णव को बधाई दी और कहा कि उनके पास सूचना प्रौद्योगिकी विभाग भी है जिसके चलते यह सुधार तेजी से होने जा रहा है । उनके नेतृत्व की प्रसंसा करते हुए श्री अहलुवालिया ने कहा कि एआई आधारित ईआरसीटी प्रणाली से रेलवे में लंबित दवों का तेजी से सामाधान करने में बड़ी मदद मिलेगी। रेलवे का कहना है कि ई-आरसीटी चौबीसों घंटे ई-फाइलिंग और स्वचालित चेतावी के साथ दावों में तेज़ी, पारदर्शिता और नागरिक-केंद्रित डिजिटल प्रक्रिया सुनिश्चित करेगी।
श्री वैष्ण्व ने ‘रेलटेक’ डिटिटल प्लेटफार्म को को ‘स्टार्ट द्वारा, स्टार्टअप के लिए खुला मंच” बताते हुए कहा कि रेलटेक नीति का मसौदा स्टर्टअप इकाइयों ने ही बना कर दिया था। उन्होंने रेलटेक डिजिटल मंच को बटन दबा कर प्रारंभ करते हुए कहा, ” यह सतत खुला रहेगा। इस वेबसाइट पर आप अपने विचार, प्रौद्योगिकी समाधार कभी भी प्रस्तुत कर सकते हैं।”
इससे पहले श्री वैष्णव ने 14 परवरी को देश के विभिन्न हिस्सों में 500 कार्गो टर्मिनल बनाने तथा बिना आरक्षण वाले डिब्बों में आरक्षित डिब्बों की तरह सफाई की व्यवस्था करने की घोषणा की थी।
उल्लेखनीय है कि रेलवे दावा न्यायाधीकरण 1987 के तहत बना रेलवे दावा न्यायाधिकरण, रेलवे दुर्घटनाओं और अनचाही घटनाओं में मौत या चोट लगने पर मुआवज़े, सामान के खोने या न मिलने, और किराए तता माल के रिफंड से जुड़े रेलवे प्रशासन के खिलाफ दावों पर फैसला करता है। मौजूदा समय में भारत के 21 शहरों में मौजूद इसकी 23 पीठें हैं। इसकी मुख्य पीठ दिल्ली में है। इसकी हर पीठ में एक न्यायिक सदस्य और एक तकनीकी सदस्य होता है।

spot_img

Related Articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisement -spot_img
- Advertisement -spot_img

Latest Articles