Tuesday, June 2, 2026
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500 अरब डॉलर आयात की प्रतिबद्धता अमेरिका के सामने झुकने का सबूत : कांग्रेस

नयी दिल्ली(24×7न्यूजटाइम संवाददाता)। कांग्रेस ने कहा है कि मोदी सरकार का अमेरिका से अगले पांच वर्षों में 500 अरब डॉलर के सामान आयात की कथित प्रतिबद्धता अमेरिका के सामने झुकने का सबूत है और इससे देश के किसानों, उद्योगों तथा अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।
कांग्रेस संचार विभाग के प्रभारी जयराम रमेश ने रविवार को सोशल मीडिया एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि 10 मई 2025 को भारतीय समयानुसार शाम 5:37 बजे अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने सबसे पहले युद्धविराम की घोषणा की थी, जिससे ऑपरेशन सिंदूर अप्रत्याशित रूप से रुक गया था। उन्होंने दावा किया था कि राष्ट्रपति ट्रंप के हस्तक्षेप के कारण यह संभव हुआ। इसके बाद 21 मई 2026 को भी रुबियो ने सबसे पहले वेनेजुएला के राष्ट्रपति की प्रस्तावित भारत यात्रा की जानकारी दी, जबकि भारत सरकार और वेनेजुएला की ओर से इसकी पुष्टि नहीं की गई थी।
उन्होंने कहा कि अब श्री रुबियो ने एक्स पर एक बयान में दावा किया है कि मोदी सरकार ने अगले पांच वर्षों में ऊर्जा, प्रौद्योगिकी और कृषि क्षेत्र पर ध्यान केंद्रित करते हुए अमेरिका से 500 अरब डॉलर के सामान खरीदने की प्रतिबद्धता जताई है।
कांग्रेस का कहना है कि वित्त वर्ष 2026 तक भारत का अमेरिका से वार्षिक आयात 52.9 अरब डॉलर है और यदि यह दावा सही है तो भारत को अमेरिका से अपना वार्षिक आयात लगभग दोगुना करना पड़ेगा।
श्री रमेश ने सवाल किया कि अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा ट्रंप टैरिफ को निरस्त किए जाने के बाद मलेशिया जैसे देशों ने अमेरिका के साथ अपने व्यापार समझौतों को निरस्त कर दिया, लेकिन मोदी सरकार ने कथित रूप से किसानों और उद्योगों को नुकसान पहुंचाने वाले भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर पुनर्विचार क्यों नहीं किया।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री विदेशी मुद्रा बचाने के लिए घरेलू ईंधन खपत और विदेश यात्राएं कम करने की अपील करते रहे हैं, फिर उसी समय अमेरिका से रिकॉर्ड स्तर के आयात की सहमति क्यों दी गई। कांग्रेस ने आशंका जताई कि इससे रुपये पर और दबाव पड़ सकता है।
श्री रमेश ने आरोप लगाया कि ऑपरेशन सिंदूर के युद्धविराम से लेकर भारत-अमेरिका व्यापार समझौते और वेनेजुएला के राष्ट्रपति की यात्रा तक विदेश नीति से जुड़ी सूचनाएं पहले वॉशिंगटन से सामने आ रही हैं, जबकि नई दिल्ली बाद में प्रतिक्रिया देती है। उन्होंने कहा कि यह स्थिति सरकार की विदेश नीति और पारदर्शिता पर सवाल खड़े करती है।

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