नयी दिल्ली(24×7न्यूजटाइम संवाददाता)। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार को आरोप लगाया कि कुछ लोग हिंदू समाज और जनजातीय समुदायों के बीच भेद पैदा करने का षड्यंत्र कर रहे हैं, लेकिन उन्हें यह नहीं मालूम कि “हम सब एक हैं और जनजातीय समाज की आस्थाएं, प्रकृति पूजा और जीवन पद्धति सनातन परंपरा से ही जुड़ी हुई हैं।
श्री शाह यहां आयोजित जनजाति सांस्कृतिक समागम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि भगवान बिरसा मुंडा की जयंती का यह 150वां वर्ष है और देशभर के अनेक जनजातीय नायकों के वंशज इस कार्यक्रम में उपस्थित हैं, जिन्हें वह प्रणाम करते हैं। उन्होंने कहा कि संविधान ने हर व्यक्ति को अपने धर्म और आस्था के साथ सम्मानपूर्वक जीने का अधिकार दिया है। वनवासी समुदाय अपनी विविध आस्थाओं के साथ प्रकृति की पूजा करते हैं और यही परंपरा उन्हें सनातन धर्म से जोड़ती है।
श्री शाह ने कहा कि कुछ लोग यह प्रचार कर रहे हैं कि समान नागरिक संहिता (यूसीसी) जनजातीय समुदायों को उनकी संस्कृति के साथ जीने नहीं देगी। उन्होंने कहा कि यह पूरी तरह भ्रम फैलाने का प्रयास है। उन्होंने कहा, “हमने गुजरात और उत्तराखंड में यूसीसी लागू किया है। वहां जनजातीय समुदायों को यूसीसी से बाहर रखा गया है। इससे जनजातीय समाज को कोई नुकसान नहीं होने वाला।” उन्होंने लोगों से अपने गांवों में जाकर यह संदेश फैलाने का आग्रह किया कि जनजातीय समुदायों को यूसीसी से डरने की आवश्यकता नहीं है।
इस अवसर पर जनजाति सुरक्षा मंच के राष्ट्रीय संयोजक गणेश राम भगत ने कहा कि कई लोग यह कहते हैं कि आदिवासी हिंदू नहीं हैं, जबकि जनजातीय समाज भगवान राम को अपना पूर्वज मानता है। उन्होंने कहा, “भगवान राम ने 14 वर्ष हमारे घरों में बिताए। उन्होंने कभी नहीं पूछा कि तुम क्या खाते हो या क्या पहनते हो।”
राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष हर्ष चौहान ने कहा कि देशभर की 550 जनजातियों का प्रतिनिधित्व इस कार्यक्रम में हुआ है। उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज ने इतिहास में दिल्ली की रक्षा के लिए काम किया, लेकिन कभी दिल्ली कूच नहीं किया। उनका समाज जंगलों में रहकर प्रकृति के साथ कुटुंब की तरह जीवन जीता रहा।श्री चौहान ने कहा कि आक्रांताओं ने भी जनजातीय समुदायों से लड़ने का साहस नहीं किया, लेकिन अंग्रेजों ने उन्हें “ट्राइब” कहकर जंगलों से अलग करने की कोशिश की।उन्होंने कहा, “जो भय या लालच में धर्मांतरित हो गया, उसे हम अपना नहीं मान सकते।”





