नयी दिल्ली(24×7न्यूजटाइम संवाददाता)। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी को भारतीय राजनीति का ‘भस्मासुर’ करार देते हुए दावा किया है कि कांग्रेस जल्द ही दो हिस्सों में बंट जाएगी।
भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता गौरव भाटिया ने सोमवार को पार्टी मुख्यालय में संवाददाता सम्मेलन में कहा कि यह बड़े दुख की बात है कि विपक्ष के नेता ऐसे समय में इस तरह का बयान दे रहे हैें, जब देश मजबूती के साथ चुनौतियों का सामना कर रहा है। उन्होंने कहा, “जहां इस वैश्विक संकट के दौरान कई देशों की अर्थव्यवस्थाएं कमज़ोर हुई हैं, वहीं दूसरी ओर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत इस वैश्विक चुनौती का मज़बूती से सामना कर रहा है। हमारी अर्थव्यवस्था मज़बूत है।”
उन्होंने कहा कि एक ‘टूलकिट मॉडल’ जो विनाशकारी, अराजक, अपरिपक्व और मूर्खतापूर्ण है तथा श्री गांधी के दिमाग की उपज है। यह एक बार फिर सामने आया है जब श्री गांधी ने दावा किया कि केन्द्र की मोदी सरकार एक साल के अंदर गिर जाएगी। उन्होंने श्री गांधी पर अराजकता फैलाने का आरोप लगाते हुए कहा, “अगर आपका (श्री गांधी ) मकसद अराजकता फैलाना है, तो हमारा संकल्प भारत को और भी ज़्यादा मज़बूत बनाना है। आप आगे बढ़ें और अपनी पूरी ताकत लगा दें। हमने भारत को और भी आगे ले जाने का मन बना लिया है।”
भाजपा प्रवक्ता ने दावा किया कि यह सरकार (राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन सरकार) स्थिर और मज़बूत भी है प्रवक्ता ने दावा किया कि जल्द ही कांग्रेस दो हिस्सों में बंट जाएगी और कांग्रेस के नेता भी विपक्ष के नेता द्वारा ऐसे भारत-विरोधी और अशांति फैलाने वाले बयान दिए जाने के पक्ष में नहीं हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस यह गलत जानकारी फैला रही है कि भारत अमेरिकी दबाव के कारण रूस से कच्चा तेल आयात नहीं कर रहा है। उन्होंने कहा, “हम देश के हित में ही फैसले लेंगे। यह बात बिल्कुल साफ है। हम किसी के दबाव में काम नहीं करते।”
उन्होंने कहा कि राजग के शासन में पिछले चार पांच वर्षों में रूस से 30 प्रतिशत तक कच्चे तेल का आयात किया गया है जबकि संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) के शासन में यह आंकड़ा केवल एक प्रतिशत था। उन्होंने कहा, “साल 2026 में हमने रूस से सबसे ज़्यादा कच्चे तेल का आयात किया। रूसी तेल के आयात से देश को लगभग 20-25 अरब डॉलर की बचत हुई है। जब हमने रूसी तेल आयात करने का फैसला किया था, तो उसी श्री गांधी और कांग्रेस ने इस फैसले का विरोध किया था।”





