Saturday, June 13, 2026
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चीन-पाकिस्तान को भारत का करारा जवाब,कहा जम्मू कश्मीर भारत का अभिन्न अंग, दूसरे देश को टिप्पणी करने का अधिकार नहीं

नयी दिल्ली (24×7न्यूजटाइम संवाददाता)। भारत ने चीन और पाकिस्तान के संयुक्त बयान में केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर जिक्र को बेवजह बताते हुए पूरी तरह खारिज कर दिया है और सख्त टिप्पणी करते हुए कहा है कि जम्मू कश्मीर भारत का अविभाज्य अंग है तथा किसी भी अन्य देश को इस मामले में टिप्प्णी करने का अधिकार नहीं है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मंगलवार को इस संबंध में मीडिया के सवालों के जवाब में तथाकथित चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे परियोजना को वैधता देने के प्रयासों का यह कहते हुए विरोध किया कि ये कदम भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का उल्लंघन करते हैं। उन्होंने चीन और पाकिस्तान के बीच तथाकथित ‘सीमा-पार जल संसाधन सहयोग’ संबंधी बयान का भी विरोध किया और कहा कि भारत ने इससे संबंधित समझौतों को कभी मान्यता नहीं दी। प्रवक्ता ने चीन और पाकिस्तान के संयुक्त बयान में जम्मू कश्मीर के जिक्र पर सख्त टिप्पणी करते हुए कहा , ” भारत, चीन और पाकिस्तान के संयुक्त बयान में केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर के बारे में बेवजह के ज़िक्र को पूरी तरह से खारिज करता है। भारत का रुख हमेशा एक जैसा रहा है और संबंधित पक्षों को इसकी पूरी जानकारी है। केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर और लद्दाख, भारत के अभिन्न और अविभाज्य अंग रहे हैं, हैं और हमेशा रहेंगे। किसी भी अन्य देश को इस मामले पर टिप्पणी करने का कोई अधिकार नहीं है।” चीन पाकिस्तान आर्थिक गलियारे पर प्रवक्ता ने कहा , ” जहां तक तथाकथित चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा परियोजनाओं का सवाल है, जिनमें से कुछ भारत के संप्रभु क्षेत्र में स्थित हैं, हम अन्य देशों द्वारा इन क्षेत्रों पर पाकिस्तान के अवैध और ज़बरदस्ती के कब्ज़े को मज़बूत करने या उसे वैधता देने के किसी भी कदम का पूरी तरह से विरोध और खंडन करते हैं; क्योंकि ये कदम भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का उल्लंघन करते हैं। यह बात पाकिस्तानी और चीनी अधिकारियों को कई बार स्पष्ट रूप से बता दी गई है।” इसके अलावा उन्होंने चीन और पाकिस्तान के बीच तथाकथित ‘सीमा पार जल संसाधन सहयोग’ का भी विरोध किया और कहा ,” हमने चीन और पाकिस्तान के बीच तथाकथित ‘सीमा-पार जल संसाधन सहयोग’ के ज़िक्र को भी देखा है। चूंकि इन दोनों देशों के बीच कोई साझा सीमा नहीं है, इसलिए तथाकथित ‘सीमा-पार जल संसाधन सहयोग’ का सवाल ही पैदा नहीं होता। भारत ने पाकिस्तान और चीन के बीच 1963 के तथाकथित सीमा समझौते को कभी भी मान्यता नहीं दी है।” उल्लेखनीय है कि रिपोर्टों के अनुसार पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और फील्ड मार्शल आसीम मुनीर की चीन यात्रा के दौरान दिये गये संयुक्त वक्तव्य में जम्मू कश्मीर मुद्दे का समाधान राष्ट्र के प्रस्तावों के तहत किये जाने की बात कही गयी है।

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