Tuesday, June 2, 2026
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नागरिकता के बिना ही बनी थीं सोनिया मतदाता : भाजपा

(24X7newstime Correspondent)
नयी दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता तथा केंद्रीय संस्कृति और पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने दावा किया है कि कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी का नाम देश की नागरिकता मिलने से पहले ही मतदाता सूची में शामिल हो गया था।
भाजपा नेता ने गुरुवार को यहां पार्टी मुख्यालय में संवाददाता सम्मेलन में आरोप लगाया कि भाजपा ने सत्ता के लिए नैतिक-अनैतिक रास्ता हमेशा अपनाया है। उनका कहना था कि अनैतिक रास्तों से चुनाव जीतने के लिए, फर्जीवाड़ा, छल और कपट के माध्यम से सत्ता को हासिल करने का खेल कांग्रेस ने हमेशा से खेला है।
उन्होंने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी जब कांग्रेस पार्टी का नेतृत्व कर रहे थे तब उनके अपने लोकसभा क्षेत्र अमेठी में खुलेआम बूथ पर कब्जा किया गया था। लोगों को अनैतिक तरीकों से मतदान करने से रोका गया था। यही कारण था कि तब अमेठी में फिर से मतदान कराने की आवश्यकता पड़ी थी लेकिन कांग्रेस ने फिर मतदान न हो इसके लिए भी भरसक प्रयास किए थे। उनका कहना था कि श्रीमती गांधी को लेकर सवाल उठाया जा रहा है कि 1983 में जब वह देश की नागरिक नहीं बनी थीं तो उससे तीन साल पहले बिना नागरिकता लिये किस तरह से, किस कानून, किस आधार पर उन्होंने मतदाता सूची में अपना नाम दर्ज कराकर मताधिकार का प्रयोग किया था।
श्री शेखावत ने आरोप लगाया लोकसभा में विपक्ष के नेता गांधी जब से कांग्रेस पार्टी का नेतृत्व कर रहे हैं, वो हमेशा देश विरोधी ताकतों के साथ खड़े दिखे। उन्होंने कहा कि जब हर ऐसे मौके पर एकजुट होने की आवश्कता थी या हर ऐसा अवसर जब देश किसी विषय को लेकर गर्व कर रहा था, तब कांग्रेस राष्ट्र विरोधी ताकतों या विदेशी ताकतों के साथ गलबहियां दिख रही थी।
उन्होंने कांग्रेस पर शुरू से चुनाव में धांधली करने का आरोप लगाते हुए कहा, “1952 के चुनाव में बाबा साहेब अंबेडकर लोकसभा में न पहुंचें…इसे लेकर पंडित जवाहर लाल नेहरू ने पहले उनके सामने प्रत्याशी खड़ा किया, फिर कम्युनिस्ट पार्टी से मिलकर एक गठजोड़ बनाया और फिर परिणाम अपने अनुकूल न आते देख, उन्होंने 74,333 वोटों को अयोग्य घोषित करा दिया, जिसके चलते अंबेडकर जी चुनाव हार गए।”
भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि 1952 के चुनाव में तत्कालीन प्रधानमंत्री नेहरू के नेतृत्व में बैलेट बॉक्स जो भरे हुए थे, उसमें नाइट्रिक एसिड डालकर उसे नष्ट करने की घटनाएं अखबारों के पहले पन्ने में छपी थी। इतना ही नही, उनके बाद के कालखंड में गांधी-नेहरू परिवार ने फिर सत्ता में बने रहने के लिए श्रीमती इंदिरा गांधी के चुनाव के समय में सरकारी संसाधनों का दुरुपयोग करने के साथ-साथ मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए अनैतिक तरीकों का इस्तेमाल किया, जिस पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उनके चुनाव को खारिज किया था। ये हम सबके संज्ञान में है। 1952 से लेकर 1957, 1962, 1967… कांग्रेस ने सभी चुनावों में जो धांधली की, वो आज भी इतिहास के पन्नों में दर्ज हैं।

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