Tuesday, June 2, 2026
spot_img

नोएडा हवाई अड्डे पर दिखेगा बनारस का घाट, आगरे का ताज और ‘रहस्यमयी घर’

ग्रेटर नोएडा(24×7न्यूजटाइम संवाददाता)। उत्तर प्रदेश के जेवर स्थित नोएडा अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर 15 जून से उड़ानें शुरू होने से पहले एयरपोर्ट टर्मिनल पर गंगा तट पर बनारस घाट से लेकर यमुना तट पर ताजमहल को बारीकी से जीवंत किया गया है। हवाई अड्डे पर पद्म श्री से सम्मानित परेश मैती की कलाकृतियों में देश और उत्तर प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत अत्याधुनिक अवसंरचना के साथ सहज रूप से एकाकार हो रही है। इसमें स्मारकों की झलक देने वाले लाल ग्रेनाइट, बनारस के घाटों को प्रतिबिंबित करती सीढ़ियों और पश्चिमी उत्तर प्रदेश की हवेलियों से प्रेरित खुले प्रांगण का उपयोग किया गया है। एयरपोर्ट की कलात्मक अवधारणा के केंद्र में ‘रहस्यमयी घर’ नामक इंस्टॉलेशन है, जिसमें आठ हजार से अधिक पीतल की घंटियां शामिल हैं। यह देखने वालों को शहर की भागदौड़ के बीच दुर्लभ शांति और आत्मिक शांति का अनुभव कराता है। हवाई अड्डे की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि मैती ने इन पीतल की घंटियों से एक ऐसा “आवास” रचा, जो आत्मिक परिवर्तन, शांति और आध्यात्मिक अनुभव का प्रतीक बनता है। यह सकारात्मकता और जीवन की अव्यवस्था में सुकून खोजने का संदेश देता है। मैती की विशाल ऑयल-ऑन-कैनवास कृति ‘जागृति’ भारत के सांस्कृतिक और आध्यात्मिक स्थलों का जीवंत दृश्य प्रस्तुत करती है। यह कलाकृति भारतीय दर्शन में कला के छह अंगों – षडंग – के सिद्धांत पर आधारित है। छह पैनलों में फैली यह भव्य पेंटिंग गंगा, यमुना, सरस्वती और सरयू नदियों तथा उनके किनारे बसे ऐतिहासिक स्थलों को एक सूत्र में जोड़ती है। पहला पैनल वाराणसी (काशी) को दर्शाता है और भक्ति, शांति और आध्यात्मिकता का अनुभव कराता है। दूसरा पैनल सारनाथ के सांची स्तूप को समर्पित है, जहाँ भगवान बुद्ध ने ज्ञान प्राप्ति के बाद अपना पहला उपदेश दिया था। तीसरे पैनल में आगरा स्थित प्रेम के प्रतीक ताजमहल का शांत और मनोहर दृश्य है। यमुना नदी के किनारे स्थित यह विश्व धरोहर उगते सूरज की रोशनी में और अधिक भव्य दिखायी देता है। चौथा पैनल मथुरा और वृंदावन पर आधारित है, जिसमें गोवर्धन पर्वत पर स्थित पवित्र कुसुम सरोवर को दर्शाया गया है। भगवान कृष्ण की जन्मभूमि का यह शांत और आध्यात्मिक दृश्य जल में प्रतिबिंबित होता हुआ दिखायी देता है। पांचवां पैनल अयोध्या को दर्शाता है, जहां भगवान राम का जन्म हुआ था। सरयू नदी के तट पर स्थित यह ऐतिहासिक नगरी भारत की सांस्कृतिक विरासत, पौराणिकता और आध्यात्मिकता का प्रतीक है। अंतिम पैनल में महाकुंभ की जीवंत ऊर्जा को चित्रित किया गया है। सभी छह पैनलों में सूर्योदय का तत्व समान है जो आध्यात्मिक जागरण का भी प्रतिनिधित्व करता है। इसीलिए इसे ‘जागृति’ नाम दिया गया है।

spot_img

Related Articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisement -spot_img
- Advertisement -spot_img

Latest Articles