नयी दिल्ली(24×7न्यूजटाइम संवाददाता)। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और अन्य वैश्विक चुनौतियों के बावजूद रेलवे ने इस साल मई महीने में 1450 लाख टन माल की ढुलाई की है, जो गत वर्ष के इसी महीने की तुलना में 1.3 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है।
रेलवे ने सोमवार को जारी विज्ञप्ति में बताया कि इस वृद्धि का मुख्य श्रेय लौह अयस्क, इस्पात, उर्वरक और ‘अन्य शेष सामान’ श्रेणियों में शानदार प्रदर्शन को जाता है। रेलवे ने कहा है कि माल ढुलाई में यह वृद्धि, पश्चिम एशिया में चल रही भू-राजनीतिक स्थिति और लॉजिस्टिक्स तथा आपूर्ति श्रृंखलाओं पर इसके अप्रत्यक्ष प्रभाव से उत्पन्न चुनौतियों के बावजूद हासिल की गयी है।
रेलवे ने कहा है कि भारतीय रेलवे ने निरंतर परिचालन निगरानी और संसाधनों के कुशल उपयोग के माध्यम से, पूरे देश में आवश्यक वस्तुओं की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करने पर अपना ध्यान केंद्रित रखा। रेलवे के अनुसार ‘अन्य शेष सामान’ श्रेणी में 16 प्रतिशत की शानदार वृद्धि दर्ज की गयी, जबकि लौह अयस्क की ढुलाई में 4.8 प्रतिशत और पिग आयरन तथा तैयार इस्पात की ढुलाई में पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में 3.5 प्रतिशत की वृद्धि हुयी। उर्वरकों की ढुलाई में भी 6.2 प्रतिशत की अच्छी वृद्धि दर्ज की गई, जो अर्थव्यवस्था के प्रमुख क्षेत्रों को समर्थन देने के प्रति रेलवे की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
रेलवे ने कहा है कि कोयला रेलवे की माल ढुलाई यातायात का सबसे बड़ा हिस्सा बना हुआ है। पिछले वर्ष की तुलना में इसकी ढुलाई में लगभग एक प्रतिशत की वृद्धि हुई है। कोयला आधारित बिजली संयंत्रों की आवश्यकताओं को पूरा करने और ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए भारतीय रेलवे ने कोयले की आवाजाही को प्राथमिकता दी और पूरे नेटवर्क में इसके परिवहन की बारीकी से निगरानी की है।
रेलवे ने कहा है कि भारतीय रेलवे ने माल की निर्बाध आवाजाही को सुगम बनाने और विभिन्न क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए, घरेलू और एक्जिम (निर्यात-आयात) दोनों प्रकार के कंटेनर यातायात की निगरानी भी तेज कर दी है। इन उपायों ने चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में भी माल ढुलाई में वृद्धि को बनाए रखने और आपूर्ति श्रृंखला की दक्षता को बनाए रखने में मदद की है।
रेलवे के अनुसार यात्री यातायात के मोर्चे पर मई महीने में 61 करोड़ से अधिक यात्रियों को उनके गंतव्य तक पहुंचाया, जबकि पिछले वर्ष की इसी अवधि में यह संख्या लगभग 59 करोड़ थी। इस वृद्धि का मुख्य श्रेय ‘गैर-उपनगरीय’ श्रेणी को जाता है, जिसमें 7.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गयी। इस श्रेणी में यात्रियों की संख्या 28 करोड़ से बढ़कर 30 करोड़ हो गई। यह पूरे देश में छोटी और लंबी, दोनों तरह की यात्राओं के लिए रेल यात्रा के प्रति लोगों की लगातार बनी हुई पसंद को दिखाता है।
रेलवे ने कहा है कि यात्रा की मांग में होने वाली मौसमी बढ़ोतरी को पूरा करने के लिएअलग-अलग रूटों पर बड़ी संख्या में ‘समर स्पेशल ट्रेनें’ चलायी गयी हैं। आधुनिक ट्रेन सेवाओं के लगातार विस्तार से यात्रियों की सुविधा में भी बढ़ोतरी हुई है। राष्ट्रीय परिवहन सेवा प्रदाता अभी 164 ‘वंदे भारत’ सेवाएं चला रहा है, जिसमें हाल ही में हावड़ा और कामाख्या के बीच शुरू की गई ‘शयनयान वंदे भारत’ सेवा भी शामिल है। वहीं, ‘अमृत भारत’ सेवाओं की संख्या बढ़कर 68 हो गयी है, जिनमें से तीन नयी सेवाओं का शुभारंभ इस वर्ष मई महीने में ही हुआ।





