Tuesday, June 2, 2026
spot_img

ईडी ने धन शोधन से संबंधित मामले में पी चिदंबरम के खिलाफ अभियोजन की स्वीकृति को अदालत के सामने पेश किया

(24×7न्यूजटाइम संवाददाता)
नयी दिल्ली। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री पी. चिदंबरम के खिलाफ आईएनएक्स मीडिया प्राइवेट लिमिटेड से संबंधित धन शोधन मामले में सक्षम अधिकारी से प्राप्त अभियोजन स्वीकृति के आदेश को पीएमएलए अदालत के समक्ष पेश कर दिया है। ईडी ने गुरुवार को यह जानकारी दी।
ईडी ने इस मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा आईएनएक्स मीडिया प्राइवेट लिमिटेड, आईएनएक्स न्यूज प्राइवेट लिमिटेड, कार्ति पी. चिदंबरम और अन्य के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 120-बी सहपठित धारा 420 और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं के तहत दर्ज प्राथमिकी के आधार पर धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत जांच शुरू की थी।
एजेंसी ने कहा, “जांच से पता चला है कि पी. चिदंबरम के कार्यकाल के दौरान आईएनएक्स मीडिया प्राइवेट लिमिटेड को विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड (एफआईपीबी) की मंजूरी दी गई थी। जांच में यह भी सामने आया कि एफआईपीबी मंजूरी देने और बाद में उसे नियमित करने के बदले में कथित तौर पर उन संस्थाओं के माध्यम से अवैध लाभ की मांग की गई और प्राप्त किया गया।”
ईडी ने बताया कि जांच से पता चला है कि ऐसी रकम को एडवांटेज स्ट्रैटेजिक कंसल्टिंग प्राइवेट लिमिटेड (एएससीपीएल) और उससे जुड़ी संस्थाओं सहित फर्जी कंपनियों के माध्यम से भेजा गया था, जो कार्ति पी. चिदंबरम के प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष नियंत्रण में थीं। इस रकम को वासन हेल्थ केयर प्राइवेट लिमिटेड और एजीएस हेल्थ केयर प्राइवेट लिमिटेड के शेयरों में निवेश के माध्यम से छिपाया गया और बाद में शेयरों की बिक्री व विदेशी निवेश के माध्यम से इसे बढ़ाया गया।
अधिकारी ने बताया कि जांच में यह भी पाया गया कि कार्ति पी. चिदंबरम और उनके करीबी सहयोगियों ने पी. चिदंबरम की ओर से काम किया और एफआईपीबी मंजूरी के मामलों में आईएनएक्स मीडिया के अधिकारियों के साथ बातचीत की और उससे प्राप्त अपराध की कमाई एकत्र की। इस राशि को बाद में धन शोधन के उद्देश्य से बनाई गई फर्जी कंपनियों के माध्यम से भेजा गया और बिना किसी वास्तविक व्यावसायिक गतिविधि के जटिल लेनदेन के जरिए इसे छिपाने की कोशिश की गई। इस रकम का उपयोग बाद में बैंक खातों में जमा करने और फर्जी संस्थाओं व सहयोगियों के नाम पर भारत और विदेश में चल और अचल संपत्तियों में निवेश के लिए किया गया। अपराध की कुल कमाई लगभग 65.88 करोड़ रुपये आंकी गई है।
पीएमएलए के प्रावधानों के तहत 53.93 करोड़ रुपये और 11.04 करोड़ रुपये की अपराध की कमाई को अस्थायी रूप से कुर्क किया गया है और निर्णायक प्राधिकारी द्वारा दोनों कुर्की आदेशों की पुष्टि कर दी गई है। इसके बाद, 2020 में राउज एवेन्यू कोर्ट के समक्ष पीएमएलए की धाराओं के तहत आरोप पत्र दायर किया गया था और 2021 में इस पर संज्ञान लिया गया था। इसके बाद, 2024 में एक पूरक आरोप पत्र भी दायर किया गया था।

spot_img

Related Articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisement -spot_img
- Advertisement -spot_img

Latest Articles