Tuesday, June 2, 2026
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भारतीय रेलवे के ‘ट्रक्स-ऑन-ट्रेन’ पहल से देश में बदलेगा माल परिवहन का परिदृश्य

(24×7न्यूजटाइम संवाददाता)
नयी दिल्ली। भारत की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था के साथ माल ढुलाई की मांग में लगातार बढ़ोतरी को देखते हुये भारतीय रेलवे ने समर्पित माल ढुलाई गलियारे (डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर – डीएफसी) के तहत एक नयी सेवा ‘ट्रक्स-ऑन-ट्रेन (ट्रेन पर ट्रक) (टीओटी)’ शुरू की है, जो सड़क और रेल परिवहन के सर्वोत्तम गुणों को एक साथ जोड़ती है।
रेलवे का यह प्रयोग सड़कों पर बढ़ते ट्रकों के दबाव, ईंधन की खपत और वायु प्रदूषण जैसी चुनौतियों को वैकल्पिक और टिकाऊ समाधान देने की दिशा में एक पहल है। इस सेवा के तहत भरे हुए ट्रकों को विशेष रूप से संशोधित फ्लैट वैगनों पर लादकर समर्पित माल ढुलाई कॉरिडोर पर रेल के जरिए लंबी दूरी तक पहुंचाया जाता है। ट्रक केवल पहले और आखिरी मील की सड़क यात्रा करते हैं, जबकि लंबा और सबसे अधिक ईंधन खपत वाला हिस्सा रेल द्वारा तय होता है। इससे न केवल समय की बचत होती है, बल्कि लागत और पर्यावरणीय प्रभाव भी कम होता है।
वर्तमान ट्रक्स-ऑन-ट्रेन सेवा पश्चिमी डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के न्यू रेवाड़ी – न्यू पालनपुर खंड पर संचालन किया जा रहा है। लगभग 636 किलोमीटर लंबे इस मार्ग पर सड़क से जहां माल पहुंचाने में करीब 30 घंटे लगते थे, वहीं टीओटी सेवा से यह समय घटकर लगभग 12 घंटे रह गया है। जैसे-जैसे डीएफसी का नेटवर्क विस्तार करेगा, इस सेवा को अन्य खंडों तक भी बढ़ाया जाएगा।
टीओटी सेवा की सबसे बड़ी खासियत इसका सरल और प्रतिस्पर्धी मूल्य ढांचा है। ट्रकों के वजन के आधार पर प्रति वैगन शुल्क तय है। जैसे 25 टन तक के ट्रक के लिए 25,543, 25 रुपये से 45 टन के लिए 29,191 रुपये और 45 से 58 टन तक के ट्रक के लिए 32,000 रुपये शुल्क लिया जाता है। खाली ट्रकों के लिए यह शुल्क और भी कम, केवल 21,894 रुपये प्रति वैगन है।
दुग्ध क्षेत्र को प्रोत्साहन देने के लिए दूध टैंकरों पर जीएसटी नहीं लगाया जाता, जिससे यह सेवा डेयरी उद्योग के लिए और आकर्षक बन गई है। जनवरी 2024 से ओपन इंडेंट बुकिंग (खुला मांग पंजीकरण पत्र) की सुविधा भी शुरू की गई है, जिससे ग्राहक अपनी जरूरत के अनुसार बुकिंग कर सकते हैं।
वित्त वर्ष 2025 (अप्रैल से दिसंबर) के दौरान टीओटी सेवा ने 545 रेक का संचालन किया, जिसमें 3 लाख टन से अधिक माल ढोया गया और 36.95 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित हुआ।
आंकड़ों के अनुसार, न्यू पालनपुर टर्मिनल से 273 रेक संचालित हुए, जिनसे 2 लाख टन से अधिक माल और 20.18 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ। वहीं न्यू रेवाड़ी से 272 रेक चले, जिनसे लगभग 1 लाख टन माल और 16.76 करोड़ रुपये की कमाई हुई। इससे स्पष्ट है कि पश्चिमी भारत के डेयरी, एफएमसीजी और अन्य औद्योगिक क्लस्टरों में इस सेवा को मजबूत समर्थन मिला है। अमूल जैसी बड़ी संस्थाओं की भागीदारी ने इसकी विश्वसनीयता और बढ़ाई है।
टीओटी सेवा का सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक लाभ है मॉडल शिफ्ट यानी लंबी दूरी की माल ढुलाई का सड़क से रेल की तरफ स्थानांतरण। इससे राजमार्गों पर भीड़ कम होगी और सड़क दुर्घटनाओं का जोखिम कम होने के साथ ही डीजल की खपत में भारी कमी आती है।
केवल पालनपुर–रेवाड़ी मार्ग पर ही इस सेवा से करीब 48,875 ट्रक लंबे सड़क सफर से हट गए हैं। इससे अनुमानित 88.8 लाख लीटर डीजल की बचत और लगभग 23 करोड़ किलोग्राम कार्बन डाइ ऑक्सइड (सीओटू) उत्सर्जन में कमी आई है।
डीएफसी नेटवर्क पूरी तरह विद्युतीकृत है, जिससे ट्रकों को रेल पर ले जाने से कार्बन डाइऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड और पार्टिकुलेट मैटर जैसे प्रदूषकों में उल्लेखनीय कमी आती है। भविष्य में जैसे-जैसे बिजली उत्पादन में नवीकरणीय ऊर्जा का हिस्सा बढ़ेगा, रेल आधारित माल ढुलाई और भी स्वच्छ होगी। इसके अलावा, भारी ट्रक यातायात से होने वाले सड़क धूल प्रदूषण में भी कमी आती है, जिससे राजमार्गों के आसपास रहने वाले लोगों के स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। लंबे समय तक ड्राइविंग से होने वाली चालक थकान भी घटती है, जिससे सड़क सुरक्षा में सुधार होता है।
व्यावसायिक दृष्टि से ट्रक्स-ऑन-ट्रेन भारतीय रेलवे के लिए एक नया और टिकाऊ राजस्व स्रोत बनकर उभरा है। अब तक 1,955 से अधिक यात्राएं, 10 लाख टन से ज्यादा माल ढुलाई और 131 करोड़ रुपये से अधिक का कुल राजस्व इसका प्रमाण है। भविष्य में नए फ्लैट मल्टीपर्पज (सपाट बहुउद्देश्यीय) (एफएमपी) वैगनों, अतिरिक्त टर्मिनलों और नए मार्गों के साथ यह सेवा और विस्तार पाएगी।

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