वाराणसी(24×7न्यूजटाइम संवाददाता)। ईरान के सर्वोच्च नेता आयातुल्ला अली खामेनेई के प्रतिनिधि डॉ. अब्दुल मजीद हकीम इलाही शनिवार रात दरगाहे फातमान में खामेनेई की याद में आयोजित ताजियती जलसा व मजलिसे तहरीम (शोक सभा) में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। डॉ. इलाही ने कहा कि भारत के लोग न्याय और इंसाफ का सम्मान करने वाले हैं। वे हर मुश्किल घड़ी में सच के साथ खड़े रहते हैं। भारत और ईरान का रिश्ता बहुत पुराना है। बनारस की मिसाल किसी नगीने से कम नहीं है।
उन्होंने कहा, “तीस वर्ष पहले ही हम साफ कर चुके थे कि हमारे पास कोई न्यूक्लियर हथियार नहीं है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया था कि हमें यह हथियार नहीं चाहिए। ईरान के सर्वोच्च नेता आयातुल्ला अली खामेनेई ने फतवा भी दिया था, जिसमें उन्होंने न्यूक्लियर हथियार रखना हराम बताया है। हमारे पास कोई न्यूक्लियर बम नहीं है और भविष्य में इसे रखने का कोई विचार भी नहीं है। जब हमारे सर्वोच्च नेता ने फतवा दे दिया है, तो न्यूक्लियर हथियार बनाने का सवाल ही नहीं उठता।”
डॉ. इलाही काशी के इमानिया अरबी कॉलेज और दरगाह फातमान में आयोजित ताजियती जलसे में पहुंचे थे। उन्होंने ईरान का समर्थन देने के लिए भारतीयों को धन्यवाद दिया।
आगे उन्होंने कहा, “ईरान की स्थिति अब पहले से बेहतर हो रही है। ईरान के लोग हालात से लड़ते हुए भी खुश हैं। उन्होंने जिस जज्बे और हिम्मत का प्रदर्शन किया है, उसे पूरी दुनिया ने देखा है। ईरान के लोग आश्वस्त हैं कि शांति एक दिन जरूर स्थापित होगी, क्योंकि हर नागरिक अपने देश के साथ हर परिस्थिति में खड़ा है।”
डॉ. इलाही ने हॉर्मुज स्ट्रेट को लेकर कहा कि 28 फरवरी 2026 के पहले तक हॉर्मुज स्ट्रेट हजारों वर्षों से खुला था। दुनिया के सभी देश इसका लाभ उठा रहे थे और किसी देश की कोई शिकायत नहीं थी। 28 फरवरी के बाद जो तनाव पैदा हुआ, उसके बारे में सभी को पता करना चाहिए कि यह संकट किसने और क्यों पैदा किया। ईरान ने कोई परेशानी नहीं पैदा की। ईरान सभी की सुरक्षा के लिए लगातार प्रयासरत है। स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज मध्य पूर्व के साथ-साथ पूरी दुनिया के लिए महत्वपूर्ण जलडमरू है।
उन्होंने कहा कि ईरान के लोग आर्थिक प्रतिबंधों का सामना करते हुए मानसिक रूप से पहले से तैयार हैं और आने वाले दस वर्षों के लिए अपनी मानसिक स्थिति को और मजबूत कर चुके हैं।
काशी के बारे में डॉ. इलाही ने कहा, “काशी सिर्फ एक शहर नहीं, बल्कि आध्यात्मिकता, एकता और दर्शन का केंद्र है। हमारे यहां से भी बच्चे काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) में पढ़ने आते रहे हैं। भारत और ईरान का संबंध कोई नया नहीं, बल्कि हजारों वर्ष पुराना है।”
उन्होंने आगे कहा कि ईरान के लोग बहुत जल्द शांतिपूर्ण स्थिति की उम्मीद कर रहे हैं। वे अपनी स्वतंत्रता, अपनी भूमि और अपने देश के लिए खुद को बलिदान करने के लिए भी पूरी तरह तैयार हैं।





