Tuesday, June 2, 2026
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मोदी के11साल के सुधारों से अर्थव्यवस्था को मिली ताकत,नयी कड़ी है जीएसटी सुधार

(24×7न्यूजटाइम संवाददाता)
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 11 वर्ष के कार्यकाल में वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) लागू करने, बैंकिंग सुधार, जनधन-आधार-मोबाइल पर आधारित जनधन खाते खोलने के अभियान, दिवाला संहिता और रेरा जैसे सुधारों से अर्थव्यवस्था को बड़ी ताकत मिली है और देश आज दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है।
भू-राजनीतिक परिस्थितियों की अनिश्चितताओं के बावजूद भारत चालू वित्त वर्ष की प्रथम तिमाही में 7.8 प्रतिशत की आर्थिक वृद्धि के साथ आज दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेज गति से बढ़ती अर्थव्यवस्था है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा है कि देश जल्दी ही अमेरिका और चीन के बाद तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था होगा। 2013-14 में भारत की रैंकिंग 11वीं थी।
श्री मोदी सरकार के जन जनधन खातों के माध्यम से योजनाओं के लाभ के प्रत्यक्ष अंतरण (डीबीटी) की व्यवस्था से सार्वजनिक बजट का लीकेज बंद हुआ है और योजनाओं के चलाने की लागत कम हुई है। बैंकों की अवरुद्ध सम्पत्तियों (एनपीए) की पहचान और उनके समाधान के सरकार के निर्णय से सरकारी बैंकों मजबूत हुए और लाभ में हैं तथा उनकी ऋण देने की क्षमता बढ़ी है। दिवाला एवं ऋण शोधन अक्षमता कानून से लाखों करोड़ रुपये की अवरुद्ध परिसम्पत्तियों का पुनरूद्धार हुआ है तथा कंपनियों ओर बैंकों की बैलेंस सीट की दोहरी दुर्बलता का इलाज हो सका है।
जीएसटी से पूरे देश का बाजार एकीकृत हुआ है तथा व्यापार की राह में राज्यों की बिक्री कर चौकियों तथा चुंगी के नाकों की बाधा इतिहास बन गयी है। जुलाई 2017 में जीएसटी को लागू करने के ऐतिहासिक सुधार के बाद मोदी सरकार के नेतृत्व में जीएसटी परिषद ने इसी माह जीएसटी में दूसरी पीढ़ी के सुधार की घोषणा की है। अब सरकार के सामने इसी माह 22 तारीख से लागू हो रही जीएसटी की नयी दरों का लाभ आम जनता तक पहुंचाने की चुनौती है। जीएसटी के दूसरे चरण के सुधार से आम लोगों को काफी लाभ मिलने की उम्मीद है, हालांकि इससे केंद्र सरकार की राजकोषीय स्थिति के सामने कुछ समय के लिए चुनौती बढ़ सकती है।
जीएसटी 2.0 में 12 प्रतिशत की दर में आने वाली 99 प्रतिशत वस्तुएं 5 प्रतिशत की दर के दायरे में आ गयी हैं। अब देखना यह है कि कंपनियां इसका कितना लाभ लोगों को देती हैं।
मोदी सरकार के 11 साल के इतिहास को देखें तो यह न सिर्फ राजनीतिक आलोचनाओं की कीमत पर नये कानून बनाने का साहस रखती है, बल्कि उसे लागू कराने में भी कोई कोर-कसर नहीं छोड़ती है। जीएसटी सुधारों का हालांकि कोई भी राजनीतिक दल विरोध नहीं कर रहा है, पर कुछ राजनीतिक आलोचक इसे बिहार चुनाव की नजर से जरूर देख रहे हैं।
सत्ता में आते ही मोदी सरकार का सबसे बड़ा फैसला जनधन योजना था। इसने न सिर्फ प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं में गड़बड़ी रोकने के लिए जमीन तैयार की बल्कि करोड़ों लोगों को बैंकिंग नेटवर्क से जोड़ा। अब तक इस योजना के अंतर्गत 56 करोड़ से अधिक बैंक अकाउंट खोले गए हैं जिनमें कुल जमा राशि करीब 2,64,910 करोड़ रुपये है।
नोटबंदी का फैसला एक ऐसा फैसला रहा जिसने कई विवादों को जन्म दिया। सरकार ने 8 नवंबर 2016 को महज चार घंटे के नोटिस पर रात आठ बजे 500 रुपये और 1000 रुपये के नोटों को प्रचलन से बाहर करने की घोषणा की। इसके कारण आम लोगों को काफी परेशानी हुई। सरकार का दावा था कि इससे कालेधन का इस्तेमाल बंद हो जायेगा और आतंकवाद का वित्त पोषण थमेगा। लेकिन, रिजर्व बैंक और सरकार के आंकड़े देखें तो इन दोनों में से कोई भी लक्ष्य हासिल नहीं हो पाया।
मेक इन इंडिया मिशन, जो आज भी जारी है, देश में विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए शुरू किया गया है। इसकी शुरुआत 25 मई 2014 को हुई थी। इससे कई विदेशी कंपनियों ने भारत में अपने प्लांट लगाये और आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ने की हमारी गति तेज हुई। बाद में हर सरकारी नीति में मेक इन इंडिया को शामिल किया गया।
डिजिटल इंडिया मिशन को जैम (जनधन आधार मोबाइल) के जरिये लोगों तक बिना किसी लीकेज के सुविधा पहुंचाने के प्रयास का आधार कहा जा सकता है। चाहे यूपीआई हो या आधार आधारित लेनदेन के सुविधा, इन सबके लिए कनेक्टिविटी को बढ़ावा देने का काम इस मिशन ने किया। इस दिशा में काम पिछली सरकारें भी कर रही थीं, लेकिन इसे मिशन मोड में शुरू किया गया। इसमें ऑनलाइन बुनियादी ढांचे में सुधार, इंटरनेट कनेक्टिविटी बढ़ाना, ग्रामीण इलाकों को हाई-स्पीड इंटरनेट से जोड़ना शामिल है।
आधार को सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए अनिवार्य बनाने और देश के हर व्यक्ति का आधार कार्ड बनाने का प्रयास पिछली सरकारों ने भी किया था, लेकिन वे इसमें मामूली सफलता हासिल कर सकीं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दृढ़ राजनीतिक इच्छा शक्ति ने इसे संभव कर दिखाया। राज्यसभा में विधेयक गिर न जाये इसलिए आधार एक्ट को फाइनेंस बिल के रूप में पेश किया गया। इसकी राजनीतिक आलोचना भी हुई, लेकिन इसने वह कर दिखाया जिसे लोग असंभव मान रहे थे।
उज्ज्वला योजना के जरिये पारंपरिक ईंधनों की जगह रसोई गैस (एलपीजी) के इस्तेमाल के लिए जमीन तैयार की गयी। इसके तहत गरीब परिवारों की महिलाओं को एलपीजी कनेक्शन के लिए सिक्योरिटी की राशि नहीं जमा करानी होती है। गैस चूल्हे का पैसा किस्तों में काटा जाता है और सिलेंडर पर सरकार सब्सिडी दे रही है। इसके बावजूद अभी योजना के तहत औसत सिलेंडर बुकिंग साल में चार के आसपास है जो बताता है कि गांवों में लोग पारंपरिक ईंधनों का भी इस्तेमाल कर रहे हैं। योजना की शुरुआत मई 2016 में उत्तर प्रदेश के बलिया से हुई थी।
साल 2017 में 01 जुलाई से देश में वैट की जगह जीएसटी लागू किया गया। यह भी एक ऐसा कदम था जिसके बारे में पिछली सरकार प्रयास कर रही थी, लेकिन सफलता नहीं मिल सकी थी। मोदी सरकार ने राजस्व क्षतिपूर्ति का प्रावधान कर राज्यों को इसके लिए तैयार किया।
आयुष्मान भारत योजना में हर लाभार्थी परिवार को पांच लाख रुपये तक सालाना मुफ्त इलाज की सुविधा दी जाती है। इस योजना से वास्तव में गरीब लोगों को लाभ हुआ है। योजना में 70 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों को साल 2024 में शामिल किया गया जिससे बुजुर्गों को बुढ़ापे में इलाज की चिंता से मुक्ति मिली है। सरकार द्वारा हाउसिंग बाजार में कंपनियों की घोखाधड़ी पर अंकुशल लगाने के लिए एक आदर्श रियल एस्टेट विनियमन कानून (रेरा) बनाया जिसे आज सभी राज्य लागू कर रहे हैं।
नये आयकर कानून को भी इसी साल संसद से मान्यता मिली है जो अगले वित्त वर्ष से लागू हो जायेगा। इसका उद्देश्य 64 साल पुराने आयकर अधिनियम की जगह वर्तमान की जरूरतों के हिसाब से नया कानून लाना और कई संशोधनों के कारण उत्पन्न पेचीदगियों को दूर करना है।
इनमें ज्यादातर फैसलों के लिए सिर्फ राजनीतिक इच्छा शक्ति ही काफी थी। इसे देखते हुए उम्मीद की जानी चाहिये कि सरकार जीएसटी 2.0 का पूरा लाभ आम लोगों को मिलना सुनिश्चित करेगी।

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