Tuesday, June 2, 2026
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मुर्मु ने यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष कोस्टा, यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष डेर लेयेन के सम्मान में किया भोज का आयोजन

(24×7न्यूजटाइम संवाददाता)
नयी दिल्ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु मंगलवार राष्ट्रपति भवन में 77वें गणतंत्र दिवस समारोह के मुख्य अतिथियों यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन के सम्मान में भोज का आयोजन किया।
श्रीमती मुर्मु ने यूरोपीय संघ के नेताओं का स्वागत करते हुए कहा, ” गणतंत्र दिवस पर मुख्य अतिथि के रूप में उनकी उपस्थिति विशेष महत्व रखती है, जो हमारे आपसी जुड़ाव की गहराई और एक-दूसरे पर हमारे भरोसे को दर्शाती है।”
राष्ट्रपति ने कहा, “भारत और यूरोप न केवल समकालीन हितों से, बल्कि लोकतंत्र, बहुलवाद और खुली बाजार अर्थव्यवस्था जैसे साझा मूल्यों से भी जुड़े हुए हैं। ये सिद्धांत तेजी से बदलते वैश्विक माहौल में हमारा मार्गदर्शन करते हैं। उन्हें यह जानकर खुशी हुई कि पिछले दो दशकों में भारत-यूरोपीय संघ रणनीतिक साझेदारी उल्लेखनीय रूप से मजबूत हुई है।” उन्होंने कहा कि यह एक स्थिर, संतुलित और नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को आकार देने की हमारी सामूहिक आकांक्षा को दर्शाता है।
उन्होंने कहा, “अनिश्चितता और संघर्ष के इन समयों में, भारत और यूरोपीय संघ वैश्विक स्थिरता बनाए रखने की जिम्मेदारी साझा करते हैं। हमारा सहयोग कूटनीति, बहुपक्षवाद और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व के समर्थन में एक स्पष्ट संदेश देता है।”
राष्ट्रपति ने कहा, “आर्थिक सहयोग भारत-यूरोपीय संघ संबंधों का एक प्रमुख स्तंभ है। हम व्यापार और निवेश को साझा समृद्धि और सामाजिक प्रगति के साधनों के रूप में देखते हैं।” उन्होंने भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते पर ऐतिहासिक बातचीत के सफल समापन पर खुशी व्यक्त की और कहा कि यह लोगों के जीवन में महत्वपूर्ण सकारात्मक बदलाव लाएगा।
राष्ट्रपति ने कहा कि आज, समाज पर प्रौद्योगिकी का प्रभाव उतना ही गहरा है जितना अर्थव्यवस्था पर। भारत और यूरोपीय संघ जिम्मेदार नवाचार को आगे बढ़ाने के लिए मिलकर काम कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि इस यात्रा के दौरान संपन्न हुई सुरक्षा और रक्षा साझेदारी हमारे रक्षा उद्योगों के लिए नए अवसर खोलेगी।
श्रीमती मुर्मु ने कहा कि भारत स्वच्छ ऊर्जा, जलवायु वित्त और टिकाऊ प्रौद्योगिकियों के क्षेत्रों में यूरोपीय संघ के साथ सहयोग को और मजबूत करने के लिए उत्सुक है।
तीनों नेताओं ने विश्वास व्यक्त किया कि इस यात्रा के दौरान हुए महत्वपूर्ण समझौते भारत-यूरोपीय संघ रणनीतिक साझेदारी को और गहरा करेंगे। वे इस बात पर सहमत हुए कि भारत और ईयू संतुलन, स्थिरता और आशावाद की एक ताकत के रूप में उभर रहे हैं और साथ मिलकर हम एक ऐसे भविष्य को आकार दे सकते हैं जो टिकाऊ, समावेशी और मानवीय हो।

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