(24×7न्यूजटाइम संवाददाता)
गोरखपुर। पूर्वोत्तर रेलवे के मुख्यालय में चल रहा राजभाषा सप्ताह के अन्तिम दिन मंगलवार को कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। आयोजन का शुभारंभ पूर्वोत्तर रेलवे के महाप्रबंधक उदय बोरवणकर ने दीप प्रज्ज्वलित कर एवं माँ सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण कर किया। इस अवसर पर महाप्रबन्धक श्री बोरवणकर ने कहा कि हिन्दी दिवस न केवल हिन्दी अपितु समस्त भारतीय भाषाओं का दिवस है और देश की गौरवशाली परम्परा का परिचायक भी है। राजभाषा हिन्दी के प्रचार-प्रसार में रेल विभाग की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। हम भारतीय संविधान के अनुच्छेद 351 का समादर करते हैं और रेलवे अपने प्रत्येक कार्यक्षेत्र में राजभाषा हिन्दी के प्रयोग-प्रसार के लिये निरंतर सजग हैं। यह कवि सम्मेलन इसी का एक महत्वपूर्ण कड़ी है।
उन्होंने कहा कि गोरक्षनगरी की अपनी अलग साहित्यिक एवं सांस्कृतिक गरिमा रही है। यह नगर अनेक महान साहित्यकारों की कर्मभूमि और उनकी अमूल्य कृतियों की धरोहर रही है। इस रेल पर हरिवंश राय बच्चन, गोपाल दास नीरज, नरेन्द्र कोहली एवं राजेन्द्र यादव जैसे नामचीन लोग पधार चुके हैं। कलम के धनी इन साहित्यकारों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से समाज में युगान्तकारी परिवर्तन लाये हैं। इस कवि सम्मेलन में साहित्य के विविध रसों के कवियों को सुनने का अवसर प्राप्त हुआ। मंचासीन कवि अपनी काव्य रचना से हमारे रेलकर्मियों के अन्दर एक नई ऊर्जा का संचार करेंगे। स्वागत करते हुये मुख्य राजभाषा अधिकारी एवं प्रमुख मुख्य इंजीनियर संजय सिंहल ने कहा कि राजभाषा विभाग के तत्त्वावधान में आज यह कवि सम्मेलन आयोजित किया गया है। ऐसे आयोजनों से कर्मचारियों में राजभाषा हिन्दी में कार्य करने के प्रति जागरूकता बढ़ेगी। मेरठ से पधारी कवयित्री डा0 शुभम त्यागी ने माँ सरस्वती की वन्दना-‘‘मान करूँ सम्मान करूँ माँ, चरणों का तेरे ध्यान करूँ माँ‘‘ से कवि सम्मेलन आरम्भ किया। उन्होंने अपनी रचना ‘‘कोई नगमा गुनगुनाना अच्छा लगा, तेरा रूठना मनाना अच्छा लगा‘‘ हम तो चले आये तेरी एक मुस्कराहट पर, तेरे शहर में आना अच्छा लगा‘‘ प्रस्तुत किया जिसे सभी ने सराहा। प्रतापगढ़ से पधारी श्रृंगार रस की कवयित्री सुश्री प्रीती पाण्डेय ने अपनी कविता- ‘‘मन की सरहद में घूम लेती हूँ, इन हवाओं में घूम लेती हूँ याद जब भी तुम्हारी आती है, मैं तिरंगे को चूम लेती हूँ‘‘ से सभी का मन मोह लिया। बलिया से आये कवि डा0 अरूण पाण्डेय ने मंच का संचालन करते हुये अपना काव्य रचना इस प्रकार प्रस्तुत किया ‘‘फलक पर लाख तारे हों सितारा एक होता है, नजर को बांध दे ऐसा नजारा एक होता है‘‘ गाथायें फरिश्ते भी सुनाकर गर्व करते हों, लालों का लाल लाखों में भगत सिंह एक होता है। ने लोगों में देशप्रेम के प्रति जोश भर दिया। लखनऊ से आईं कवयित्री सुश्री सरिता सिंह ने अपनी काव्य रचना में कहा कि ‘‘सभल कर खेलना दिल से कहीं ये टूट न जाय, जो हमसे प्यार करते हैं कहीं रूठ वे न जांय। जख्म इतना ही देना यार, जितना हील हो जाय, जो हमसे दर्द को बांटे वो साथी छूट न जाय‘‘ वाराणसी से पधारे हास्य कवि डा0 नागेश शांडिल्य ने प्राथमिक विद्यालय में पढ़ाने के फायदे बताते हुये कहा कि- ‘‘हम अपनी पूरी जिन्दगी सुरक्षित गुजार सकते हैं, क्योंकि ये नन्हे बच्चे हमें कभी नहीं मार सकते हैं‘‘ मऊ से आये श्री पंकज प्रखर ने अपनी रचना प्रस्तुत करते हुये कहा कि ‘‘कुछ मनचलों व काफिरों से भारत शर्मिन्दा है, भूल न जाना वीर हमीद भी जिन्दा है‘‘ हास्य कवि श्री दमदार बनारसी ने अपनी कविता से उपस्थित श्रोताओं को हंसा दिया। इस अवसर पर अपर महाप्रबन्धक विनोद कुमार शुक्ल, प्रमुख विभागाध्यक्ष, वरिष्ठ अधिकारी, कर्मचारी एवं काव्यप्रेमी उपस्थित थे।





