Tuesday, June 2, 2026
spot_img

ईडी अधिकारियों के खिलाफ बंगाल पुलिस की एफआईआर पर रोक,ममता बनर्जी और बंगाल के डीजीपी को सुप्रीम नोटिस

(24×7न्यूजटाइम संवाददाता)

नयी दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के उन अधिकारियों के खिलाफ पश्चिम बंगाल पुलिस की ओर से दर्ज प्राथमिकी पर रोक लगा दी जिन्होंने राजनीतिक परामर्श फर्म आई-पैक के परिसर और उसके सह-संस्थापक प्रतीक जैन के घर की तलाशी ली थी।
न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति विपुल पंचोली की अध्यक्षता वाली पीठ ने ईडी की तलाशी में बाधा डालने के आरोप वाली याचिका पर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, पुलिस महानिदेशक राजीव कुमार और अन्य को नोटिस जारी किया।
न्यायालय ने इस घटना की केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से जांच की मांग वाली ईडी की याचिका पर उनकी प्रतिक्रिया भी मांगी है। यह देखते हुए कि याचिकाओं में ‘गंभीर सवाल’ उठाये गये हैं, पीठ ने कहा कि प्रथम दृष्टया उसका मानना है कि इस मामले में केंद्रीय एजेंसियों की जांच में राज्य एजेंसियों ने बाधा डाली।
शीर्ष अदालत ने कहा, “कानून के राज का पालन करने और हर अंग को स्वतंत्र रूप से काम करने देने के लिए इन मामलों की जांच जरूरी है, ताकि अपराधी किसी खास राज्य की कानून लागू करने वाली एजेंसियों के तहत सुरक्षित न रहें।”
न्यायालय ने चेतावनी दी कि ऐसे मामलों की जांच न करने से किसी एक या दूसरे राज्य में ‘अराजक’ की स्थिति पैदा हो सकती है। न्यायालय ने साफ किया कि हालांकि केंद्रीय एजेंसियों के पास राजनीतिक दलों की चुनाव से जुड़ी गतिविधियों में दखल देने का कोई अधिकार नहीं है, लेकिन वे भी कानूनी एजेंसियों की सही जांच में रुकावट नहीं डाल सकते।
पीठ ने प्रतिवादियों को जवाब दाखिल करने के लिए दो हफ्ते का समय दिया। इस बीच ईडी की तलाशी ली गयी जगहों के फुटेज वाले सीसीटीवी कैमरों और दूसरे स्टोरेज उपकरणों के साथ-साथ आस-पास के इलाकों के सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने का आदेश दिया। सीबीआई जांच की मांग के अलावा ईडी ने उन दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को वापस करने का भी निर्देश मांगा हैं, जिन्हें कथित तौर पर मुख्यमंत्री बनर्जी ने तलाशी वाली जगहों से ले लिया था। मामले की आगे की सुनवाई 3 फरवरी को होगी।
यह विवाद पिछले हफ्ते ईडी की तलाशी से उपजा है, जो 2020 के धन शोधन मामले के सिलसिले में है, जो व्यवसायी अनूप माजी के कथित कोयला तस्करी से जुड़ा है।
तलाशी के दौरान मुख्यमंत्री बनर्जी ने आई-पैक कार्यालय और इसके सह-संस्थापक के निवास में यह आरोप लगाते हुए प्रवेश किया कि तृणमूल कांग्रेस के संवेदनशील राजनीतिक डाटा को निशाना बनाया जा रहा है। ईडी ने हालांकि उनके कार्यों को धन शोधन अधिनियम (पीएमएलए) के तहत अपनी शक्तियों पर ‘सीधा हमला’ बताया। सुनवाई के दौरान ईडी की ओर से उपस्थित सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इस घटना को ‘बहुत गंभीर’ करार दिया और सख्त कार्रवाई की मांग की, जिनमें मुख्यमंत्री के साथ गये पुलिस अधिकारियों का निलंबन भी शामिल है।
उन्होंने ईडी अधिकारियों के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी पर रोक लगाने पर भी जोर देते हुए तर्क दिया कि यह केंद्रीय बलों को डराने और उनका मनोबल गिराने के लिए दर्ज की गयी थीं। मुख्यमंत्री का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने ईडी की याचिका का विरोध करते हुए कहा कि कलकत्ता उच्च न्यायालय में इस मामले की पहले सुनवाई होनी चाहिए, जहां इसी तरह की कार्यवाही लंबित हैं।
उन्होंने कहा कि सुश्री बनर्जी ने तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष के तौर पर चुनाव से जुड़े गोपनीय डाटा को सुरक्षित रखने के लिए काम किया था और ईडी की तलाशी में किसी भी तरह का बाधा डालने से इनकार किया।
राज्य सरकार और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी और अन्य ने भी ‘अनुच्छेद 32’ के तहत प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की याचिका की स्वीकार्यता पर सवाल उठाये और पसंद की अदालत चुनने का आरोप लगाया।
सभी पक्षों को सुनने के बाद शीर्ष अदालत ने ईडी अधिकारियों के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी पर रोक लगा दी और मामले के व्यापक पहलुओं की जांच शुरू की। अदालत ने इस दौरान संस्थागत स्वतंत्रता और कानून के शासन की रक्षा करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

spot_img

Related Articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisement -spot_img
- Advertisement -spot_img

Latest Articles