Saturday, June 13, 2026
spot_img

उच्चतम न्यायालय ने एनसीआरटी की पाठ्यपुस्तक में ‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’ के अंश पर कड़ा ऐतराज जताया

(24×7न्यूजटाइम संवाददाता)
नयी दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) की कक्षा आठ की सामाजिक विज्ञान की नई पाठ्यपुस्तक के उन अंशों पर कड़ा ऐतराज जताया, जिसमें कथित तौर पर ‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’ का जिक्र करने वाला एक अध्याय शामिल है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जोयमाल्य बागची की पीठ ने इन अंशों पर स्वत: संज्ञान लेते हुए इस मामले की सुनवाई की। मुख्य न्यायाधीश ने कहा, “संस्थान के प्रमुख के रूप में, मैंने अपना कर्तव्य निभाया है और संज्ञान लिया है। यह एक सोची-समझी चाल लगती है। मैं ज्यादा कुछ नहीं कहूँगा।”
दिन की शुरुआत में वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने पीठ के समक्ष यह मुद्दा उठाया और चिंता व्यक्त की कि स्कूली छात्रों को न्यायपालिका में कथित भ्रष्टाचार के बारे में पढ़ाया जा रहा है। मुख्य न्यायाधीश ने संकेत दिया कि अदालत इस मामले की स्वयं जांच करेगी और संस्था को बदनाम करने के किसी भी प्रयास की अनुमति नहीं देगी। उन्होंने कहा कि उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों सहित बार और बेंच दोनों इस पर चिंतित हैं।
न्यायूर्ति जोयमाल्य बागची ने भी गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि यह संविधान के बुनियादी ढांचे पर हमला है। उन्होंने कहा, “किताब स्वयं बुनियादी ढांचे के खिलाफ जाती प्रतीत होती है।”
अदालत के समक्ष पेश की गई एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, पाठ्यपुस्तक के अध्याय में समाज में न्यायपालिका की भूमिका पर एक पाठ के हिस्से के रूप में ‘न्यायपालिका के विभिन्न स्तरों पर भ्रष्टाचार’ पर चर्चा की गई है। इसमें मामलों के लंबित होने और बुनियादी ढांचे के मुद्दों जैसी चुनौतियों का भी उल्लेख है।
वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने इस हमले को ‘चयनात्मक’ बताते हुए अन्य सार्वजनिक संस्थानों की ओर इशारा किया जो भ्रष्टाचार के लिए जाने जाते हैं, लेकिन केवल न्यायपालिका में भ्रष्टाचार को ही उजागर किया गया है।

spot_img

Related Articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisement -spot_img
- Advertisement -spot_img

Latest Articles