(24x7newstime Correspondent)
नयी दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 79वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर भगवान श्रीकृष्ण, गुरु तेग बहादुर, भगवान बिरसा मुंडा और महान समाज सुधारक महात्मा ज्योतिबा फुले को याद करते हुए देश की आजादी और संविधान के निर्माण के लिए जी-जान लगाने वाले डॉ राजेंद्र प्रसाद, बाबा साहेब डॉ भीमराव अंबेडकर, पंडित जवाहर लाल नेहरू, सरदार वल्लभभाई पटेल, डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन और श्यामा प्रसाद मुखर्जी को नमन किया।
श्री मोदी ने लाल किले के प्राचीर से देशवासियों को संबोधित करते हुए कहा कि 1947 में अनंत संभावनाओं के साथ, कोटि-कोटि भुजाओं के सामर्थ्य से देश आजाद हुआ। देश की आकांक्षायें उड़ानें भर रही थीं, लेकिन चुनौतियां उससे भी कुछ ज्यादा थीं। पूज्य बापू के सिद्धांतों पर चलते हुए संविधान सभा के सदस्यों ने एक बहुत ही महत्वपूर्ण दायित्व निभाया। उन्होंने कहा, “भारत का संविधान जब 75 वर्ष से एक प्रकाश स्तंभ बनकर हमें मार्ग दिखाता रहा है। भारत का संविधान बनाने में डॉ राजेंद्र प्रसाद, बाबा साहेब अंबेडकर, पंडित नेहरू, सरदार वल्लभभाई पटेल, डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन, इतना ही नहीं हमारी नारी शक्ति का भी योगदान कम नहीं था। हंसा मेहता और दक्षयानी वेलायुद्धन जैसी विदुषियों ने भी भारत के संविधान को सशक्त करने में अपनी भूमिका निभायी थी। ”
उन्होंने कहा, “ मैं आज लाल किले के प्राचीर से देश का मार्गदर्शन करने वाले, देश को दिशा देने वाले, संविधान के निर्माताओं को आदरपूर्वक नमन करता हूं। ”
प्रधानमंत्री ने कहा, “ हम आज डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती भी मना रहे हैं। डॉक्टर मुखर्जी भारत के संविधान के लिए बलिदान देने वाले देश के पहले महापुरुष थे। संविधान के लिए बलिदान, अनुच्छेद 370 की दीवार गिराकर एक देश एक संविधान के मंत्र को जब हमने साकार किया, तो हमने डॉक्टर मुखर्जी को सच्ची श्रद्धांजलि दी। ”
उन्होंने कहा कि आजादी के लिए अनगिनत लोगों ने बलिदान दिये हैं। भारत की आजादी के लिए जवानी खपा दी, फांसी पर लटक गये। श्री मोदी ने कहा, “ 75-100 साल पहले का वो कालखंड याद कीजिए, पूरा देश स्वतंत्र भारत के मंत्र को लेकर के जीता था। आज समय की मांग है, स्वतंत्र भारत का मंत्र लेकर के जीने वालों ने हमें स्वतंत्र भारत दिया। आज 140 करोड़ देशवासियों का एक ही मंत्र होना चाहिए समृद्ध भारत। अगर कोटि-कोटि लोगों के बलिदान से स्वतंत्र भारत हो सकता है, तो कोटि-कोटि लोगों के संकल्प से, पुरुषार्थ से, आत्मनिर्भर बनने से, वोकल फॉर लोकल की बात करने से, स्वदेशी के मंत्र को जापने से, समृद्ध भारत भी बन सकता है, वह पीढ़ी स्वतंत्र भारत के लिए खप गयी थी, ये पीढ़ी समृद्ध भारत के लिए नये कदम उठाये, यही समय की मांग है।”
प्रधानमंत्री ने कहा, “ महान समाज सुधारक महात्मा ज्योतिबा फुले जी की 200वीं जयंती आ रही है। हम उस जयंती के समारोह शुरू करने जा रहे हैं और महात्मा ज्योतिबा फुले के सिद्धांत तथा उन्होंने जो मंत्र दिये, उसमें पिछड़े वर्ग की उत्थान के लिए हमारे लिए प्रेरणा है। पिछड़ों को प्राथमिकता देते हुए हम परिवर्तन की ऊंचाइयों को प्राप्त करना चाहते हैं। हम इसके लिए परिश्रम की पराकाष्ठा करना चाहते हैं। हम पारदर्शी नीतियों द्वारा पिछड़ों को प्राथमिकता, ये हम धरती पर उतारना चाहते हैं, हर पिछड़े के जीवन में उतारना चाहते हैं। ”
श्री मोदी ने कहा, “हमारा देश भाग्यवान है, हजारों साल की विरासत के हम धनी हैं, और वह हमें निरंतर ऊर्जा मिलती है, प्रेरणा मिलती है, त्याग और तपस्या की राह मिलती है। आज ये वर्ष गुरु तेग बहादुर जी का 350वां शहीदी वर्ष है। देश की संस्कृति की रक्षा, भारत के मूल्यों की रक्षा के लिए उन्होंने अपना सब कुछ निछावर कर दिया। मैं आज उनको नमन करता हूं।”
उन्होंने कहा, “ हमारा स्पष्ट मत है, ये देश सिर्फ सरकारें नहीं बनाती है, ये देश राजसत्ता पर विराजमान लोग ही नहीं बनाते हैं, ये देश शासन की विधा संभालने वाले नहीं बनाते हैं, ये देश बनता है कोटि-कोटि जनों के पुरुषार्थ से, ऋषियों के, मुनियों के, वैज्ञानिकों के, शिक्षकों के, किसानों के, जवानों के, सेना के, मजदूरों के, हर किसी के प्रयास से देश बनता है। हर किसी का योगदान होता है। व्यक्ति का भी होता है, संस्थाओं का भी होता है। ”
उन्होंने कहा, “आज मैं बहुत गर्व के साथ एक बात का जिक्र करना चाहता हूं। आज से 100 साल पहले एक संगठन का जन्म हुआ, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, 100 साल की राष्ट्र की सेवा, एक बहुत ही गौरवपूर्ण स्वर्णिम पृष्ठ है। व्यक्ति निर्माण से राष्ट्र निर्माण के संकल्प को लेकर के 100 साल तक मां भारती का कल्याण का लक्ष्य लेकर के लक्ष्यावधि स्वयंसेवकों ने मातृभूमि के कल्याण के लिए अपना जीवन समर्पित किया है। सेवा, समर्पण, संगठन और अप्रतिम अनुशासन, यह जिसकी पहचान रही है, ऐसा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ दुनिया का यह सबसे बड़ा गैर सरकारी संगठन है, एक प्रकार से, 100 साल का उसका समर्पण का इतिहास है। मैं आज यहां लाल किले के प्राचीर से 100 साल की इस राष्ट्र सेवा की यात्रा में योगदान करने वाले सभी स्वयंसेवकों को आदरपूर्वक स्मरण करता हूं और देश गर्व करता है, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की इस 100 साल की भव्य, समर्पित यात्रा को और हमें प्रेरणा देता रहेगा।”
प्रधानमंत्री ने कहा, “ यह भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती का अवसर है, तब इन जनजातीय क्षेत्रों को नक्सल से मुक्त कर करके मेरे जनजातीय परिवार के नौजवानों की जिंदगी बचा करके, हमने भगवान बिरसा मुंडा को एक सच्ची श्रद्धांजलि दी है।”
उन्होंने कहा, “ हमारे पूर्वजों ने त्याग और बलिदान से आजादी पायी है। हमें स्वतंत्र भारत दिया है, उन महापुरुषों के प्रति हमारा कर्तव्य है कि हम हमारे देश में ऐसी हरकतों को स्वीकार न करें, उनकी सच्ची श्रद्धांजलि होगी और इसलिए मैं आज लाल किले को प्राचीर से कहना चाहता हूं। हमने एक ‘हाई पावर डेमोग्राफी मिशन’ शुरू करने का निर्णय किया है। यह मिशन, इस मिशन के द्वारा यह जो भीषण संकट नजर आ रहा है, भारत पर मंडरा रहा है यह जो संकट है, उसको निपटाने के लिए तय समय में सुविचारित निश्चित रूप से अपने कार्य को करेगा, उस दिशा में हम आगे बढ़ रहे हैं।”
उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण को याद करते हुए कहा, “ जब मुझे भगवान श्री कृष्ण याद आते हैं, तो हम देख रहे हैं कि पूरे विश्व में आज युद्ध के तौर-तरीके बदल रहे हैं। हमने देखा है कि भारत युद्ध के हर नये तौर तरीकों से निपटने में समृद्ध है। हमने ऑपरेशन सिंदूर में दिखा दिया है, टेक्नोलॉजी में जो भी महारत थी। पाकिस्तान ने हमारे सैन्य ठिकानों पर, हमारे एयरबेस पर, हमारे संवेदनशील स्थानों पर, हमारे आस्था के केंद्रों पर, हमारे नागरिकों पर मिसाइल और ड्रोन से अनगिनत बार वार किया, लेकिन हमारे जांबाजों ने उसकी हर कोशिश को नाकाम कर दिया।”





