(24x7newstime Correspondent)
लखनऊ। कांग्रेस को देश के विभाजन का जिम्मेदार ठहराते हुये उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि अपने इस कृत्य के लिये कांग्रेस को देश की जनता से माफी मांगनी चाहिये। विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के अवसर पर आयोजित संगोष्ठी को संबोधित करते हुये उन्होने कहा कि 14 अगस्त 1947 का दिन भारतीय इतिहास में एक काले अध्याय के रूप में दर्ज है, जब विभाजन की त्रासदी ने लाखों भारतीयों की जिंदगी को छिन्न-भिन्न कर दिया था। इस विभाजन में लगभग डेढ़ से दो करोड़ लोगों का पलायन हुआ, 15 से 20 लाख लोगों का कत्लेआम हुआ और लाखों भारतीयों को अपने ही घरों से बेघर होकर दर-दर की ठोकरें खानी पड़ी। यह त्रासदी इतनी भयानक थी कि आज तक इसके निशान भारतीय समाज में मौजूद हैं और यह कभी विस्मृत नहीं हो सकती।
उन्हाेंने कहा कि कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों को 1947 के विभाजन के लिए माफी मांगनी चाहिए और 1984 के सिख कत्लेआम, 1975 के आपातकाल और कश्मीर में धारा 370 लागू करने के लिए भी अपनी गलतियों का अहसास करना चाहिए। उन्होंने नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) का समर्थन करते हुए कहा कि हम उन शरणार्थियों को सम्मान और नागरिकता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं जो विभाजन के बाद पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आए थे। योगी ने कहा कि 14 अगस्त 1947 को जो हुआ, वह एक राष्ट्रीय त्रासदी थी, जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता। उस समय की सत्ता ने इस विभाजन को प्रशासनिक निर्णय बताकर जनता की आंखों में धूल झोंकी। यह विभाजन एक नैतिक और मानवीय अपराध था, जिसे कांग्रेस ने अपनी तुष्टीकरण की नीति के तहत साकार किया। मुख्यमंत्री ने विभाजन के दौरान हुए नरसंहार को याद करते हुए कहा कि यह विभाजन केवल एक प्रशासनिक निर्णय नहीं था, बल्कि एक बर्बरता का परिणाम था, जिसमें लाखों हिंदू, सिख, बौद्ध और जैनों को अपनी जड़ों से कटना पड़ा। इस दौरान बहन-बेटियों ने अपमान और दरिंदगी का सामना किया और उन्हें अपनी इज्जत की रक्षा करने का कोई मौका नहीं मिला। यह वह विभाजन था, जिसने पाकिस्तान जैसे दानव को जन्म दिया, जो आज भी हिंदुस्तान को डसने के लिए विभिन्न षड्यंत्रों में लिप्त है।
उन्होने कांग्रेस पर सीधा हमला करते हुए कहा कि कांग्रेस ने इस विभाजन को एक प्रशासनिक निर्णय की तरह प्रस्तुत किया, जैसे दो भाइयों के बीच संपत्ति का बंटवारा हो रहा हो। 1947 के विभाजन के बाद से कांग्रेस की तुष्टीकरण की नीति ने देश को बर्बाद किया और आज भी यही कांग्रेस देश को विभाजन की ओर धकेलने के प्रयास कर रही है। उन्होने कहा कि यह कांग्रेस वही पार्टी है, जिसने देश के संविधान का गला घोंटा और आपातकाल की आड़ में लोकतंत्र की हत्या की। यह वही कांग्रेस है, जिसने 1984 में सिखों के कत्लेआम को अंजाम दिया और आज भी अपने नेताओं के गलत फैसलों का परिणाम भुगतने की जगह, जनता को गुमराह करने की कोशिश कर रही है।
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उन्होंने 15 अगस्त 2021 को विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस की शुरुआत की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने इस स्मृति दिवस को शुरू कर देशवासियों को यह समझने का अवसर दिया कि विभाजन से पहले और बाद की क्या भयावह स्थितियां थीं। यह दिवस हमें यह याद दिलाता है कि 1947 में कितनी भयानक घटनाएं घटीं, जब लाखों लोग अपनी जान से हाथ धो बैठे। उत्तर प्रदेश सरकार ने विभाजन के शिकार परिवारों के लिए एक व्यापक कार्य योजना बनाई है। उन्होंने कहा कि हम उन परिवारों के लिए जो विभाजन के दौरान नागरिकता से वंचित हो गए थे, एक बड़ा राहत पैकेज तैयार कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश सरकार ने बिजनौर, पीलीभीत, लखीमपुर खीरी और रामपुर जैसे जिलों में इन परिवारों के लिए जमीन आवंटन की प्रक्रिया शुरू कर दी है और इसे जल्द ही पूरा किया जाएगा।
योगी ने कहा कि 1947 के विभाजन के शिकार हुए लोगों के लिए किसी संग्रहालय, स्मारक या श्रद्धांजलि स्थल का निर्माण नहीं किया गया। हम सभी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आभारी हैं जिन्होंने विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस की शुरुआत की और ऐसे परिवारों के लिए एक संग्रहालय और डिजिटल आर्काइव स्थापित करने की घोषणा की।
इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, बृजेश पाठक, राज्य सभा सांसद डॉ. दिनेश शर्मा, मंत्री असीम अरुण और पूर्व मेयर संयुक्ता भाटिया आदि मौजूद रहे।





