Tuesday, June 2, 2026
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जयशंकर की अमेरिका को दो टूक, अमेरिका अपने हितों से प्रेरित तो भारत भी अपने राष्ट्रीय हितों से बंधा है

नयी दिल्ली (24×7न्यूजटाइम संवाददाता)। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी को बेहद मजबूत तथा राष्ट्रीय हितों से प्रेरित बताते हुए कहा है कि दोनों देश आतंकवाद जैसी समान चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। इसके साथ ही उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत के इजरायल, ईरान और खाड़ी देशों के साथ भी अच्छे और मजबूत संबंध हैं तथा इस चुनौतीपूर्ण स्थिति में वह संतुलन बनाते हुए सभी के साथ संबंधों को महत्व देता है। श्री जयशंकर ने साफ शब्दों में कहा कि ऊर्जा आपूर्ति के मामले में भारत सस्ते और भरोसेमंद ऊर्जा स्रोतों को प्राथमिकता देता है।
भारत यात्रा पर आये अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो के साथ रविवार को द्विपक्षीय वार्ता के बाद संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में श्री जयशंकर ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच राजनीतिक समझ के संदर्भ में एक रणनीतिक साझेदारी है जो कई क्षेत्रों में राष्ट्रीय हितों की समानता पर आधारित है। उन्होंने कहा कि लेकिन ट्रंप प्रशासन ने अपनी विदेश नीति के दृष्टिकोण को ‘अमेरिका फर्स्ट’ के रूप में बहुत स्पष्टता से सामने रखा है। वहीं जहाँ तक भारत का संबंध है, हमारा दृष्टिकोण ‘इंडिया फर्स्ट’ का है। इसलिए हम दोनों स्पष्ट रूप से अपने-अपने राष्ट्रीय हितों से प्रेरित हैं। दुनिया भर में ऊर्जा आपूर्ति की अनिश्चित स्थिति के बारे में उन्होंने कहा कि भारत की प्राथमिकता विश्वसनीय , बडे़ और सस्ते स्रोत से ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा, “जहाँ तक ऊर्जा के मुद्दों का संबंध है, हमारी ऊर्जा सुरक्षा के लिए यह महत्वपूर्ण है कि हमारे पास अनेक स्रोत हों, बड़े स्रोत हों, भरोसेमंद स्रोत हों और सस्ते स्रोत हों। इस दृष्टि से अमेरिका कई मायनों में उपयुक्त है। कुछ अन्य देश भी ऐसे हैं। इसलिए हम आपूर्ति के अनेक स्रोतों में विविधता बनाए रखना जारी रखेंगे और सबसे उचित लागत पर उन्हें बनाए रखेंगे, क्योंकि अंततः हमारे लोगों को सस्ती और सुलभ दरों पर ऊर्जा उपलब्ध कराना हमारी जिम्मेदारी है…” उन्होंने कहा कि भारत उन बहुत कम देशों में से एक है जिसके अमेरिका, इज़रायल, ईरान और खाड़ी देशों के साथ बहुत अच्छे और मजबूत संबंध हैं। उन्होंने कहा कि इन देशों में हमारे वास्तविक हित जुड़े होने से ,” हमारे लिए इस स्थिति में चुनौती यह है कि इन सभी संबंधों को कैसे बनाए रखें, अपनी हिस्सेदारी की रक्षा कैसे करें और अपने हितों को कैसे आगे बढ़ाएँ।” होर्मुज जलडमरूमध्य से ऊर्जा आपूर्ति में आ रही बाधा के संबंध में विदेश मंत्री ने कहा कि भारत और अमेरिका दोनों ही सुरक्षित और निर्बाध समुद्री व्यापार के पक्षधर हैं । हमारा यह भी मानना है कि वैश्विक स्तर पर ऊर्जा की कीमतें कम बनी रहें और ऊर्जा के स्रोत अधिक उपलब्ध हों। उन्होंने कहा,” हम इस क्षेत्र में सुरक्षित और निर्बाध समुद्री व्यापार के बहुत पक्षधर हैं। हम वास्तव में वहाँ बाज़ारों को खुला देखना चाहते हैं। हम किसी प्रकार की बाधाएँ नहीं देखना चाहते। इसलिए ये वे सिद्धांत हैं जिनके आधार पर हम उस क्षेत्र के प्रति अपना दृष्टिकोण रखते हैं।” आतंकवाद को साझा चुनौती बताते हुए श्री जयशंकर ने कहा कि भारत और अमेरिका के साझा हित हैं, लेकिन वे साझा चुनौतियों का भी सामना करते हैं। उनमें आतंकवाद प्रमुख है। उन्होंने कहा ,” इस संबंध में हमारी स्थिति बिल्कुल स्पष्ट है। यह शून्य सहिष्णुता की नीति है। हम इस क्षेत्र में हमारे दोनों देशों की संबंधित एजेंसियों के बीच मजबूत सहयोग की सराहना करते हैं। मैं विशेष रूप से पिछले वर्ष अमेरिका से भारत को 26/11 मुंबई हमलों के एक प्रमुख साजिशकर्ता के प्रत्यर्पण की सराहना करता हूं। उन्होंने श्री रूबियो के समक्ष अमेरिका की नयी वीजा नीति का भी मुद्दा उठाया । उन्होंने कहा ,”लोगों के बीच संबंध हमारे रिश्ते के केंद्र में हैं। मैंने विदेश मंत्री रुबियो को वीज़ा जारी करने के संबंध में वैध यात्रियों के सामने आने वाली चुनौतियों से अवगत कराया। जबकि हम अवैध और अनियमित आवागमन से निपटने के लिए सहयोग कर रहे हैं, हमारी अपेक्षा है कि इसका प्रभाव वैध आवागमन पर प्रतिकूल रूप से नहीं पड़ना चाहिए। आखिरकार, यह हमारे व्यापार, प्रौद्योगिकी और अनुसंधान सहयोग के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।”
श्री रूबियो ने भी पिछले कुछ महीनों में भारत और अमेरिका के बीच संबंधों में आई खटास से संबंधित सवाल के जवाब में कहा कि अमेरिका-भारत संबंधों की गति में कोई कमी नहीं आई है। उन्होंने कहा कि यह सवाल केवल भारत ही नहीं अन्य देशों के संदर्भ में भी पूछा जा रहा है और यह स्थिति व्यापार से संबंधित है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप का मानना है कि दूसरे देशों के साथ व्यापार को लेकर अमेरिकी अर्थव्यवस्था में बहुत बड़ा असंतुलन पैदा हो गया है और इसे दूर करने के लिए उन्होंने सभी देशों के साथ व्यापार का मुद्दा उठाया है। उन्होंने कहा ,” हम भारत के साथ बहुत अधिक व्यापार करते हैं, इसलिए स्पष्ट रूप से इस आकार और क्षमता वाले देश के साथ व्यापार को संतुलित करना और आपकी अर्थव्यवस्था के उत्पादक साधनों के साथ तालमेल बैठाना, किसी छोटे देश की तुलना में अलग है। उन्होंने कहा ,” इस पुनर्संतुलन के माध्यम से हम अंततः ऐसे व्यापारिक समझौतों तक पहुँचने की कोशिश कर रहे हैं और हमें विश्वास है कि हम पहुँचेंगे, जो अमेरिका के लिए अच्छे होंगे, लेकिन हमारे व्यापारिक साझेदारों के लिए भी लाभकारी होंगे। हमें उम्मीद है कि उनमें से एक भारत होगा। वास्तव में, हम इसे संभव बनाने के बहुत करीब हैं। हमें आशा है कि हमारे व्यापार प्रतिनिधि बहुत जल्द यहाँ आ सकते हैं। मेरा मानना है कि पिछले सप्ताह या उससे पहले भारतीय प्रतिनिधिमंडल मेरिका में था। हमने जबरदस्त प्रगति की है और मुझे लगता है कि अंततः अमेरिका और भारत के बीच एक ऐसा व्यापार समझौता होगा जो दीर्घकालिक होगा, दोनों पक्षों के लिए लाभकारी होगा और इस तरह टिकाऊ होगा कि वह हमारे राष्ट्रीय हितों से भी ध्यान देगा।” ईरान के बारे में पूछे गये सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि ईरान के साथ संघर्ष के संदर्भ में जल्दी ही कुछ अच्छा होने संभावना होने की संभावना है । उन्होंने कहा कि इस बारे में बातचीत में प्रगति हो रही है और जल्द अच्छी खबर सुनने को मिल सकती है। उन्होंने कहा कि वह इस बारे में और ज्यादा कुछ नहीं कहेंगे।

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