सहारनपुर मंडल की जटिल सामाजिक संरचना भाजपा के लिए चुनौती, योगी पर टिकी चुनावी उम्मीदें

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सहारनपुर,(24×7न्यूजटाइम संवाददाता)। पश्चिमी उत्तर प्रदेश का सहारनपुर मंडल आगामी 2027 विधानसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के लिए एक महत्वपूर्ण लेकिन चुनौतीपूर्ण क्षेत्र बना हुआ है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मंडल की मिश्रित सामाजिक संरचना और जातीय रूप से बिखरे मतदाता समीकरणों के कारण यहां किसी एक जाति विशेष के प्रभावशाली नेता के लिए व्यापक राजनीतिक आधार तैयार करना आसान नहीं है। ऐसे में भाजपा की चुनावी रणनीति काफी हद तक मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की लोकप्रियता और संगठनात्मक क्षमता पर निर्भर दिखाई देती है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का हाल के महीनों में सहारनपुर मंडल में लगातार दौरा करना राजनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सोमवार को बिजनौर में कार्यक्रम के बाद उनका सहारनपुर स्थित मां शाकुम्भरी देवी सिद्धपीठ क्षेत्र का दौरा प्रस्तावित है। हाल ही में क्षेत्र में आई बाढ़ और उससे हुए नुकसान के मद्देनजर यह दौरा प्रशासनिक और राजनीतिक दोनों दृष्टियों से अहम माना जा रहा है।
पूर्व आईपीएस अधिकारी और पूर्व कुलपति डॉ. अशोक कुमार राघव का कहना है कि सहारनपुर मंडल की जनसांख्यिकीय संरचना ऐसी है जहां किसी एक जाति का किसी बड़े भूभाग पर निर्णायक वर्चस्व नहीं है। विभिन्न जातियों के छोटे-छोटे समूह अलग-अलग क्षेत्रों में फैले हुए हैं। यही कारण है कि यहां चुनावी सफलता के लिए बहुजातीय समर्थन जुटाना आवश्यक हो जाता है।
राजनीतिक पर्यवेक्षकों के अनुसार सहारनपुर, मुजफ्फरनगर और शामली जिलों में मुस्लिम मतदाता महत्वपूर्ण संख्या में हैं, जबकि दलित मतदाता भी प्रभावशाली भूमिका निभाते हैं। ऐसे में चुनावी मुकाबलों में सामाजिक गठबंधनों का महत्व बढ़ जाता है। भाजपा के लिए परंपरागत समर्थक वर्गों के साथ अन्य सामाजिक समूहों में भी स्वीकार्यता बनाए रखना चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है।
लोकसभा चुनाव 2024 के परिणामों ने भी इस क्षेत्र में भाजपा की चुनौतियों को रेखांकित किया था। सहारनपुर, कैराना और मुजफ्फरनगर लोकसभा सीटों पर विपक्षी उम्मीदवारों की जीत ने संकेत दिया कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में चुनावी मुकाबला पहले की तुलना में अधिक प्रतिस्पर्धी हो चुका है।
वर्तमान विधानसभा प्रतिनिधित्व की बात करें तो सहारनपुर जिले में भाजपा के चार विधायक हैं, जबकि कुछ सीटों पर समाजवादी पार्टी का कब्जा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा के सामने केवल चुनावी गणित ही नहीं बल्कि विभिन्न सामाजिक वर्गों के बीच संतुलन बनाए रखने की चुनौती भी है। विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले विधानसभा चुनावों में सहारनपुर मंडल की भूमिका महत्वपूर्ण रहने वाली है। क्षेत्र की सामाजिक विविधता, स्थानीय मुद्दे, नेतृत्व की स्वीकार्यता और राजनीतिक गठबंधन चुनावी परिणामों को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारक होंगे। ऐसे में सभी प्रमुख दलों के लिए यह क्षेत्र रणनीतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण बना हुआ है।

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